आज फिर सीबीआई के सामने पेश होंगे राजीव कुमार ,बढ़ सकती हैं मुश्किलें

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/02/10 08:41

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुए पुलिस और सीबीआई विवाद के बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर कोलकाता पुलिस पर सारधा चिट फंड मामले की जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने शनिवार को शिलॉन्ग में पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से करीब 7 घंटे 15 मिनट तक  पूछताछ की। सीबीआई के ज्यादातर सवाल सारदा चिटफंड स्कैम की शुरुआत यानी अप्रैल 2013 से लेकर अब तक के पूरे विवाद पर केंद्रित थे। उस वक्त राजीव कुमार बिधाननगर के पुलिस कमिश्नर थे। इसके अलावा सीबीआई अधिकारियों ने 'नष्ट किए गए' सबूतों को लेकर भी पूछताछ की। इस मामले में सीबीआई आज भी पूछताछ करेगी।

बतादें, सीबीआई ने रविवार को राजीव कुमार के खिलाफ बोलने वाले पूर्व टीएमसी सांसद कुणाल घोष को भी बुलाया है। कुणाल घोष को 2013 में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित की गई एसआईटी ने गिरफ्तार किया था। उन्होंने जून 2014 में सीबीआई को एक 94 पेज का लेटर भेजा था जिसमें सारदा घोटाले में बंगाल सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। कुणाल शनिवार को शिलॉन्ग पहुंच गए। उन्होंने कहा, 'सीबीआई ने मुझे रविवार को सुबह 10 बजे पूछताछ के लिए बुलाया है।' राजीव कुमार को इसके आधे घंटे बाद 10:30 बजे पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

मालूम हो, चुनाव आयोग के निर्देशानुसार राज्य सरकार को 28 फरवरी तक कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार का तबादला करना है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पहले ही संकेत दे दिए थे कि चुनाव आयोग द्वारा निर्देशित सारे ट्रांसफर 15 से 20 फरवरी तक पूरे कर लिए जाएंगे। मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 20 फरवरी को होनी है, लिहाजा सीबीआइ का प्रयास है कि अगली सुनवाई से पहले वह आइपीएस राजीव कुमार से पूछताछ पूरी कर ले। ऐसे में सीबीआइ की पूछताछ का ये समय काफी महत्वपूर्ण हो चुका है।

गौरतलब है कि चिटफंड घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ टीम इससे पहले रविवार को कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर पहुंची थी। वहां सीबीआइ टीम को अंदर घुसने तक नहीं दिया गया। उल्टा कोलकाता पुलिस, सीबीआइ अफसरों को जबरन थाने लेकर पहुंच गई थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर राजनीति का आरोप लगाते हुए सीबीआइ जांच का विरोध करने के लिए पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के समर्थन में धरना शुरू कर दिया था। इसके बाद पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय ने राजीव कुमार को सीबीआइ के सामने पेश होने और ईमानदारी से जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। हालांकि, कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
 

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