loksabha election 2019 : नागौर जिस पर नही करता कोई गौर, नेताओं के वादे और दावे धरातल से दूर

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/14 03:51

नागौर। नागौर मतलब जिस पर गौर नही हो वो है नागौर। आज यह हम उस लिहाज से भी कह रहे है क्योंकी नागौर का जो विकास आज तक होना चाहिए था उस विकास से कोसो दूर है। नागौर जिला जहां आज भी मूलभूत सुविधाओं की काफी कमी है। लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर चुनावी बिसात बिछ चुकी है।

शतरंज पर मोहरों की चाले राजनीतिक दलों ने बिछा दी हैं। लेकिन जिले में क्या समस्या है क्या मुख्य मुद्दे है इस पर आज भी नेता गौर नही कर रहे हैं। और जिले के सियासी माहौल में नेताओ के भाषणों में राष्ट्रीय मुद्दे हावी हैं ज्योति मिर्धा कांग्रेस के घोषणा पत्र और उसके मुद्दों को जनता के बीच लेकर जा रही है तो हनुमान बेनीवाल नरेंद्र मोदी को एक बार फिर से प्रधानमंत्री बनाने के लिए राष्ट्र हित में मतदान की बात कहकर लोगों से वोट मांग रहे है। 

जी हां यह नागौर है जनाब - यहां नहीं करता कोई मुद्दों की बात...जिला मुख्यालय सहित लोकसभा क्षेत्र की कई मांगें वर्षों से नहीं हुई आजतक पूरी, लेकिन जनप्रतिनिधि नहीं देते ध्यान और चुनाव के बाद भूल जाते हैं असली मुद्दे। चुनाव के समय जनता से बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता मतदान के बाद ऐसे रंग बदलते हैं कि गिरगिट भी शरमा जाए। 

जनता की परेशानी से किसी को कोई सरोकार नहीं रहता। अब तो स्थिति और बदल गई है, चुनावों में राजनीतिक पार्टियां हो या फिर कोई राजनेता, एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर ही टाइमपास कर लेते हैं। चुनाव में मुद्दों की बात करने वाले नेता बहुत कम रह गए हैं।  हालांकि इसके लिए कुछ हद तक मतदाता भी जिम्मेदार है, क्योंकि मुद्दों की बात करने वाले नेता को चुनने की बजाय धर्म, जाति, समुदाय की बात करने के साथ धन-बल का उपयोग करने वालों को ज्यादा तवज्जो दी जाती है। इस बार का लोकसभा चुनाव भी स्थानीय मुद्दों से भटकता नजर आ रहा है। 

नागौर लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो दो दर्जन से अधिक ऐसे मुद्दे हैं, जो पिछले कई सालों से केवल मुद्दे ही बने हुए हैं, उनका समाधान नहीं हो पाया है। होता भी कैसे, क्योंकि जो नेता जीतकर दिल्ली गए, उन्होंने इन मुद्दों को उठाया ही नहीं और जो हार गए, वे जनता को दुबारा चुनाव में ही दिखे।

  नागौर लोकसभा के मुद्दे

- जिले के लोगों को मीठा पानी उपलब्ध करवाना
- नागौरी नस्ल के बछड़ों के परिवहन पर लगी रोक हटवाना
- जिला मुख्यालय पर डीजे कोर्ट खुलवाना
- जिला मुख्यालय पर मेडिकल कॉलेज खुलवाना व जेएलएन अस्तपाल में चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ के पद भरवाना
- जिला मुख्यालय पर विश्वविद्यालय खुलवाना
- नागौर शहर के चारों तरफ रिंग रोड का निर्माण कार्य पूरा करवाना
- नागौर शहर में निर्माणाधीन दो आरओबी के काम में गति देने के साथ दोनों आरओबी के साइड में सर्विस रोड का निर्माण करवाना.
- शहर में सीवरेज पाइपलाइन व पेयजल की पाइपलाइन का काम समय पर व गुणवत्ता के साथ पूरा करवाना
- जिला मुख्यालय सहित लोकसभा क्षेत्र के डीडवाना, जायल, खींवसर व कुचामन में औद्योगिक क्षेत्रों का विकास
- जिले में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा दिया जाए।
- नागौर शहर में रामदेव पित्ती अस्पताल को दुबारा शुरू किया जाए।
- परबतसर से किशनगढ़ रेल मार्ग का कार्य शुरू हो।
- लाडनूं में सरकारी महिला महाविद्यालय हो।
- लाडनूं अस्पताल में ब्लड बैंक शुरू हो।
- डीडवाना में नमक उद्योग पुन:शुरू हो, साथ ही औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा मिले।
- डीडवाना को जिला बनाने की मांग पूरी हो।
- नावां व कुचामन में नमक उद्योग के लिए श्रमिक, उत्पादन, रिफाइनरी व रेलवे के बीच स्पष्ट नीति निर्धारण।
- खींवसर में किसानों के खेतों में लाइम स्टोन की छोटी लीजे मिले।
जायल में नगरपालिका खुले व सार्वजनिक बस स्टैण्ड का निर्माण हो।
- जायल गौण मण्डी को मुख्य मण्डी में क्रमोन्नत कर मण्डी सहकारी समिति का गठन करना।
- खनन श्रमिकों का चिह्नीकरण कर स्थानीय स्तर पर ही सरकारी सुविधाओं का लाभ उपलब्ध करवाया जाए।
- मकराना में पाइप लाइनों में लीकेज के कारण पेयजल सप्लाई में गंदा पानी आ रहा है पुरानी पाइपलाइन की जगह नई पाइप लाइन बिछाई की मांग।
- रेलवे लाइन शहर को दो भागों में विभाजित करती है, इसलिए ओवरब्रिज की आवश्यकता

        नागौर से संवाददाता नरपत ज़ोया की रिपोर्ट

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