VIDEO: बड़ी प्रशासनिक चूक, आखिर कहां से आई सेवारत चिकित्सकों की दो-दो सूची ?

Vikas Sharma Published Date 2019/04/06 02:29

जयपुर। मेडिकल पीजी 2019 की प्रवेश प्रक्रिया में ग्रामीण सेवा के चिकित्सकों को बोनस अंक देने की कवायद में बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आ रही है। कोर्ट आदेश के बाद नीट (पीजी) काउंसलिंग बोर्ड ने भले ही एक दिन के लिए विकल्प लिंक खोला हो, लेकिन पूरे मामले पर सवाल खड़े करते हुए जांच के लिए सरकार को पत्र भेजा है। बोर्ड के इस पत्र ने मेडिकल हेल्थ डायरेक्टरेट में खलबली मचा दी है। पेश है पूरे मामले से पर्दा उठाती फर्स्ट इंडिया की रिपोर्ट:

प्रदेश में मेडिकल पीजी प्रवेश में इनसर्विस केटेगिरी के चिकित्सकों को बोनस अंक देने का मामला वैसे तो हर साल ही गर्माता है, लेकिन इस बार बोनस अंक देने के मामले के मामले से ज्यादा पात्रता सूची की गड़बड़ी ने नीट (पीजी) काउंसलिंग बोर्ड के सामने समस्या खड़ी कर दी है। दरअसल, मेडिकल हेल्थ डायरेक्टरेट ने बोनस अंक के लिए नीट(पीजी) काउंसलिंग बोर्ड को जो सूची सौंपी थी, उससे अलग सूची कोर्ट में दायर याचिका में अभ्यर्थियों ने पेश कर दी। इसी सूची के आधार पर कोर्ट ने न सिर्फ बोर्ड सदस्यों को लताड़ लगाई, बल्कि ऐसे सभी अभ्यर्थियों को कॉलेज का विकल्प भरने के लिए एक दिन का समय दिया। इस पूरी कवायद में मेडिकल हेल्थ डायरेक्टरेट की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है।

दो-दो सूचियों के पीछे की कहानी:

—10 जनवरी को आयोजित की गई थी नीट पीजी एक्जाम 2019
—सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना में तय किया गया पूरा शिड्यूल
—शिड्यूल के अनुसार 25 मार्च से 5 अप्रेल तक पहले राउण्ड की काउंसलिंग की जानी है। 
—हाईकोर्ट के निर्देश थे कि ग्रामीण सेवा के चिकित्सकों को प्रवेश में निर्धारित बोनस अंक दिए जाए
—बोनस अंक देने के लिए पात्र अभ्यर्थियों की सूची मेडिकल हेल्थ डायरेक्टरेट ने बोर्ड को 29 मार्च को सौंपी।
—इस सूची के आधार पर मेरिट लिस्ट जारी कर 2 अप्रेल तक के लिए ऑप्शन फॉर्म खोल दिए गए, लेकिन इसके बाद डायरेक्टरेट ने सूची में संशोधन के लिए आग्रह किया 
—बोर्ड ने दो अप्रेल को डायरेक्टरेट के अधिकारियों की बात सुनी, लेकिन निर्धारित समय सीमा का हवाला देते हुए ऑप्शन फॉर्म खोल का आग्रह अस्वीकार कर दिया गया। 
—ऐसे में लेखराज एवं पांच अन्य की याचिकाएं कोर्ट में लगी, जिसमें ग्रामीण सेवा के चिकित्सकों की बोनस अंक देने के लिए एक दूसरी सूची पेश कर दी गई। 
—सूची के आधार पर कोर्ट ने बोर्ड को लताड़ लगाई और फिर तीन मार्च शाम सात बजे से चार मार्च सुबह 11 बजे तक के लिए एकबार फिर ऑप्शन फार्म खोला गया। 
—बोर्ड ने जब इस पूरे मामले की पड़ताल करवाई तो पता चला कि पांच नए डॉक्टरों के नाम उस सूची में शामिल किए गए है, जो कोर्ट में पेश की गई है। 
—यानी पीजी काउंसलिंग में बोनस अंक के लिए इनसर्विस यानी सेवारत चिकित्सकों की दो-दो सूची सामने आई है। 

कोर्ट की फटकार के बाद बोर्ड ने भले ही अभ्यर्थियों के लिए ऑप्शन खोल दिया हो, इसके बाद से पूरा मामला तूल पकड़े हुए है। बोर्ड ने बकायदा
मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव, सरकार के एडिशनल एडवोकेट जनरल को पत्र भेजकर तथ्यात्मक जानकारी दी है। साथ ही मामले की गंभीरता बताते हुए इस बारे में स्वतंत्र एजेंसी से जांच का आग्रह भी किया है। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में भी मामला भेजने की तैयारी है। 

आखिर क्या है बोनस अंक की गणित:

—प्रदेश में दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा देने वाले चिकित्सकों को पीजी प्रवेश में बोनस अंक देने का प्रावधान किया हुआ है। 
—पिछले साल ही कोर्ट के आदेश पर दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों को नोटिफाइड किया गया 
—इन इलाकों के चिकित्सायल में एक साल की सर्विस पर दस, दो साल पर बीस और तीन साल की सर्विस पर 30 फीसदी अंक बतौर बोनस दिए जाते है। 

नीट पीजी प्रवेश के मामले में सामने आई लापरवाही को लेकर बोर्ड और मेडिकल हेल्थ डायरेक्टरेट आमने-सामने की स्थिति में है। बोर्ड ने सरकार को प्रकरण भेज दिया है, जबकि मेडिकल हेल्थ डायरेक्टरेट के अधिकारी अभी भी खुद के बचाव के लिए 29 मार्च की सूची को ही सही ठहरा रहे है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि आखिर जब डायरेक्टरेट ने दूसरी सूची जारी ही नहीं की तो कोर्ट में अभ्यर्थी नई सूची कहां से ले आए। अब देखना ये होगा कि इस पूरे मामले में की जांच में किस पर गाज गिरती है। 

... संवाददाता विकास शर्मा की रिपोर्ट 

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in