पंचतत्व में विलीन हुए भींचरी के लाडले किशनसिंह, खासोआम ने दी नम आंखों से विदाई

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/12/17 03:50

रतनगढ़ (चूरू)। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए रतनगढ़ में भींचरी के लाडले किशनसिंह को आज हम आंखों से विदाई दी गई। शहीद किशनसिंह को उनके पांच वर्षीय बेटे धर्मवीर ने मुखाग्नि दी। आम और खास ने पुष्पांजलि अप्रित कर शहीद किशनसिंह की शहादत को नमन किया।

पांच वर्षीय मासूम धर्मवीर और दो वर्षीय मोहित कुछ समझ नहीं पा रहे थे कि आज उनके घर पर इतनी भीड़ क्यों है और माहौल गमगीन क्यों है। इन दोनों मासूमों को पता ही नहीं था कि आज उनके पिता का साया उनके सिर से उठ चुका है। अब उनके पापा कभी लौट कर नहीं आएंगे। शहीद की पत्नी के आंसू रुक नहीं रहे थे और बूढ़ी मां का भी रो-रो कर बुरा हाल था। माहौल गमगीन था, आंखे नम थीं, लेकिन चेहरों पर गर्व के भाव भी थे। क्योंकि उनका सपूत किशनसिंह देश के काम आया और देश की सीमा की रक्षा करते हुए उसने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

शहीद किशनसिंह की पार्थिव देह जैसे ही उनके पैतृक गांव भींचरी पहुंची तो जनसमुदाय उमड़ पड़ा। 'शहीद किशनसिंह अमर रहे' के जयघोष गूंज रहे थे, तो पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लग रहे थे। चूरू सांसद राहुल कस्वां, रतनगढ़ MLA अभिनेष महर्षि, पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा सहित कई गणमान्यों ने शहीद को पुष्प चक्र अप्रित कर शहीद की शहादत को नमन किया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ओर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की तरफ से भी शहीद को पुष्पचक्र अर्पित किए गए हैं।

जम्मू के पुलवामा में रतनगढ़ का लाडला किशन सिंह शहीद

इसके बाद शहीद किशनसिंह की पार्थिव देह अंत्योष्टि स्थल पर पहुंची, जहां पर सेना के जवानों ने हवाई फायर कर सलामी दी। शहीद के पांच वर्षीय बेटे धर्मवीर ने मुखग्नि दी। जिला कलेक्टर मुक्तानन्द अग्रवाल, एसपी राममूर्ति जोशी सहित प्रशासनिक अधिकारी और जन प्रतिनिधि मौजूद रहे। गौरतलब है कि किशनसिंह राजपूत 2009 में सेना में 55 आरआर में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। उनके दो पुत्र हैं, जिसमें बड़ा पुत्र धर्मवीर 4 साल का और मोहित 2 साल का है।

शहीद के एक बड़े भाई जीवराजसिंह हैं, जो कोलकाता में ट्रक चलाकर परिवार का लालन-पालन करते हैं। शहीद किशनसिंह की पत्नी रतनगढ़ में खाडिया बास में एक किराए के मकान में बच्चों के साथ रहती हैं। शहीद के अंतिम दर्शनों के लिए जनसैलाब उमड़ा तो वहीं युवाओ में जोश का जज्बा था और पाकिस्तान व आतंकवाद के खिलाफ गुस्सा भी। ऐसे में शहीद किशनसिंह की शहादत को फर्स्ट इंडिया न्यूज का भी सलाम।

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