निगम अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहे निर्माण कार्यों के खिलाफ उतरे महापौर

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/06/28 04:58

जोधपुर। जोधपुर नगर निगम के कुछ क्षेत्रों में बिना अनुमति लिए नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर जोधपुर के महापौर घनश्याम ओझा ने पत्र के ज़रिये भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से जांच कराने की मांग की है। इस पर एसीबी ने पत्र को परिवाद मानकर जांच शुरु कर दी है और आवश्यक रिकॉर्ड एसीबी की टीम नगर निगम से ले रही है।

गौरतलब है कि महापौर ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार राेक पाने में लाचारी जताई और कहा कि हाउसिंग बोर्ड के सैकड़ों मकानों में बिना इजाजत कमर्शियल निर्माण हो रहे हैं। जबकि निगम तो एकल खिड़की से टाइप डिजाइन की अनुमति देता है। बिना कर्मचारी-अफसरों की मिलीभगत यह संभव नहीं है, इसलिए जांच की जाए। महापौर की शिकायत पर एसीबी मुख्यालय ने परिवाद दर्ज कर लिया है। अब ब्यूरो की स्पेशल यूनिट ने निगम-हाउसिंग बोर्ड से जवाब-तलब भी शुरू कर दिया है।

निगम ने 2 हजार मकानों की सूची दी है, जिन्हें निर्माण की अनुमति दी थी। एसीबी वहां हुए कमर्शियल निर्माण की जांच कर अफसर-कर्मचारियों के भ्रष्टाचार की पोल खोलेगी।महापौर ओझा ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को लिखे पत्र में नगर निगम तथा कार्मिकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि पूरे शहर में निर्माण कार्य हो रहे हैं। हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में आवासीय मकानों में अवैध रूप से वाणिज्यिक गतिविधियां बिना किसी की इजाजत से चल रही है। नगर निगम में बिना पैसे दिए कोई कामकाज नहीं होता है। ऐसा टॉप से बॉटम तक हो रहा हैं।

एसीबी स्पेशल यूनिट प्रभारी जगदीश सोनी ने बताया कि एसीबी मुख्यालय ने महापौर के पत्र को परिवाद मानकर दर्ज किया है। महापौर ने निगम में बिना लेन-देन कोई भी काम नहीं होने का भी गंभीर आरोप लगाया है। निगम से रिकाॅर्ड तलब किया गया है। उधर जोधपुर के फुलेराव की घाटी क्षेत्र में 33 लाख के विकास कार्य को लेकर सूरसागर विधायक सूर्यकांता व्यास ने सवाल उठाए हैं और सूत्रों से पता लगा है कि इस संबंध में एक परिवार एसीबी को जांच के लिए दिया है।

इस पूरे मामले में 33 लाख रुपए की राशि उठाये जाने के बाद भी मौके पर काम नहीं दिखने की बात विधायक सूर्यकांता व्यास ने कही है। इस मामले में एसीबी की टीम पड़ताल कर रही है। गौरतलब है कि यह पहला मौका होगा, जब किसी संस्था के प्रमुख ने खुद की ही सरकार होने के साथ साथ खुद की ही पार्टी के निगम बोर्ड होने के बावजूद भ्रष्टाचार की शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को करने के साथ मामले की तह तक पड़ताल का आग्रह किया है। अब देखना है कि इस मामले में एसीबी की जांच में क्या निकलता है।

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