जयपुर के समीप आसमान से गिरा उल्कापिंड, विभागीय अधिकारियों ने की पुष्टि

Ramswaroop Lamror Published Date 2017/06/06 22:03

जयपुर। राजधानी जयपुर में भांकरोटा के समीप मुकुंदपुरा गांव में उल्कापिंड गिरने की घटना ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहली बार ऐसी घटना देखी है। पुलिस ने इस घटना के बाद संबंधित विभाग को भी सूचना दी, ताकि इस घटना की विभागीय जांच हो सके। एफएसएल के साथ पुरातत्व विभाग और बिड़ला तारामंडल के अधिकारियों को भी सूचना दी गई। मौके पर पहुंचे विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ठोस धातू का जो टुकड़ा जमीन पे गिरा है, वह उल्कापिंड ही है।


जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के रिटायर्ड प्रोफेसर राजेन्द्र त्रिपाठी भी सूचना मिलने पर मौके पर आए। फिजिक्स के प्रोफेसर रहे त्रिपाठी का कहना है कि अंतरिक्ष में उल्काएं घूमती रहती है। वे आपस में चुंबकीय शक्ति से बंधी होती है। जो उल्का चुंबकीय शक्ति से बाहर आ जाती है, वह नीचे गिर जाती है। यह उल्का भी आसमान से आकर जमीन पर गिरी है।


बिड़ला तारामंडल के सहायक निदेशक संदीप भट्टाचार्य भी मौके पर पहुंचे। भट्टाचार्य का कहना है कि बड़ी साइज की उल्काएं कई बार पृथ्वी पर गिर जाती है। घर्षण की वजह से पृथ्वी तक आते आते छोटी हो जाती है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी साइज की उल्काएं बहुत कम ही गिरती है। करीब 22 साल पहले पिपलीकलां गांव में भी बीस किलो के तीन टुकड़े गिरे थे। इसके बाद छह इंच के चार किलो वजनी उल्का लम्बे समय बाद ही देखने को मिली है। इस उल्का में कौन कौन से पदार्थ है, यह जांच के बाद ही पता चलेगा।

 

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