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VIDEO: पड़ताल में बड़ा खुलासा, रोडवेज में राजस्व चोरी के जिम्मेदार 150 से ज्यादा व्हाट्सएप ग्रुप

उदयपुर: प्रदेश की सत्ता में दशको से सरकारों के आने औऱ चले जाने का दौर जारी है, लेकिन खस्ताहाल आर्थिक हालातों से जूझ रही राजस्थान रोडवेज के दुर्दिन समाप्त होने के बजाए और ज्यादा बिगडते जा रहे हैं. यही नहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने राजस्थान रोडवेज की नैय्या को और ज्यादा डुबोने में बडी भूमिका निभाई है. 

खास पड़ताल:
दरअसल फर्स्ट इंडिया न्यूज द्वारा की गई खास पड़ताल में सामने आया हैं कि राजस्थान रोडवेज के 54 आगारों में हजारों चालक और परिचालक रोडवेज में  राजस्व के रिसाव के सहभागी बने हुए हैं. यही नहीं रोडवेज के इन चालक औऱ परिचालकों द्वारा बनाये गये करीब 150 से ज्यादा व्हाट्सएप्प ग्रुप रोडवेज के राजस्व में करोडों का चूना लगा रहे हैं. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर कैसे राजस्थान रोडवेज के चालक औऱ परिचालक रोडवेज को डुबोने पर अमादा है. पेश हैं खास इन्वेस्टिगेटिव रिर्पोट:

रोडवेज लगातार बदहाल:
प्रदेश में लाखों लोगों के लिए प्रतिदिन परिवहन का सबसे बडा साधन राजस्थान रोडवेज लगातार बदहाल हो रहा हैं. प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने वाली लगभग हर सरकार नें इस सरकारी उपक्रम को फायदे में लाने के अटूट प्रय़ास किये हैं, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा. राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के आला अधिकारियों द्वारा इस उपक्रम को फायदे में लाने के लिए लगभग हर दिन कोई ना कोई योजना बनाई जाती हैं, लेकिन तमाम योजनाएं फिस्स हो जाती हैं.  

150 से ज्यादा व्हाट्सएप्प ग्रुप:
हमारे उदयपुर संवाददाता ने दर्जनों चालक और परिचालकों से चर्चाओं के बाद पाया कि प्रदेश के 54 रोडवेज आगारों के चालक औऱ परिचालक राजस्व को रोज चूना लगा रहे हैं. इन आगारों के चालक और परिचालको नें करीब 150 से ज्यादा ऐसे व्हाट्सएप्प ग्रुप बना रखे हैं, जिनमें रोडवेज की फ्लाइंग टीमों की रोज की लोकेशन साझा की जाती हैं. जैसे की यदि कोई बस जयपुर से हरिद्धार के लिए चल रही हैं, तो उस रुट पर फ्लाइंग टीम की लोकेशन इस बस से पहले गुजरने वाले चालक और परिचालकों द्वारा दे दी जाती हैं. ऐसे में फ्लाइंग टीम की लोकेशन के आस पास ये परिचालक सजग हो जाते है और बेटिकट यात्रियों को एवजी टिकट देकर बच जाते हैं. ऐसे में रोडवेज की फ्लाइंग टीमें बहुत ज्यादा सफल नहीं हो पाती और ये चालक परिचालक जमकर चांदी कूटते हैं. यही नहीं इनके द्वारा बनाये गये व्हाट्सएप्प ग्रुप में साफ निर्देश भी हैं कि फ्लाइट टीम की लोकेशन और उनके वाहन नंबर के अलावा कोई भी सूचनाएं इन ग्रुप्स में साझा नहीं की जाए. 

रोडवेज के राजस्व के रिसाव का रास्ता बने व्हाट्सएप्प ग्रुप:
—प्रदेशभर के 54 आगारों में कार्यरत हैं हजारों चालक-परिचालक. 
—करीब 150 से ज्यादा व्हाट्सएप्प ग्रुप हैं फ्लाइंग टीम की लोकेशन साझा करने के लिए. 
—राज्य के अलावा पड़ोसी राज्यो में जाने वाली रोडवेज के लिए भी साझा होती हैं फ्लाइंग टीम की लोकेशन 
—प्रतिदिन करोडों रुपयें के राजस्व का हो रहा हैं रोडवेज को नुकसान. 
—वैधानिक तौर पर ऐसे व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाकर कर राजस्व चोरी करना हैं सर्विस रुल्स के खिलाफ. 

राजस्व चोरी को पूरी तरह रोकना फिलहाल बड़ी चुनौती:
मजे की बात तो यह है कि प्रदेश के परिवहन मंत्री खुद इस बात को कबूल करते हैं कि रोडवेज में राजस्व के रिसाव को रोकने के लिए अभी भी एक फुल प्रूफ सिस्टम की जरुरत है. हालांकि मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास नें साफ किया कि पिछले कुछ महिनो में रोडवेज में भ्रष्टाचार को कम करके करोंडो रुपये महिने के बचाये जा रहे है, लेकिन इस राजस्व चोरी को पूरी तरह रोकना फिलहाल बड़ी चुनौती बना हुआ हैं.

... उदयपुर से रवि कुमार शर्मा की रिपोर्ट 

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