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मुमताज़ : “संगमरमर सा ये रेशमी  शफ्फाक बदन, देखने वाले इसे ताजमहल कहते हैं.”
मुमताज़ : “संगमरमर सा ये रेशमी शफ्फाक बदन, देखने वाले इसे ताजमहल कहते हैं.”

मुमताज़ का ज़िक्र आता है तो एक शेर बरबस होठों पर मचल उठता है- “संगमरमर सा ये रेशमी  शफ्फाक बदन, देखने वाले इसे ताजमहल कहते हैं.” कुछ ऐसी ही दिखती थी मुमताज़ सिल्वर स्क्रीन पर, लेकिन कहते हैं की ऑफ स्क्रीन वो और भी खुबसूरत दिखती थी. आज 31  जुलाई है, मुमताज़ की सालगिरह. 

मुमताज़ के फिल्म करियर का सफ़र कोई आसान नहीं था. एक एक्स्ट्रा के रूप उन्होंने काम शुरू किया ...उम्र रही होगी कोई बारह बरस..जवान हुई तो पहलवान से हीरो बने दारा सिंह के साथ कई फिल्मो में बतौर हिरोइन काम किया. इसका नुकसान ये हुआ की मुमताज़ पर लेबल लग गया की वो स्टंट फिल्मो की हेरोइन हैं. और फिर अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने अपने आप को उस मुकाम पर ले आई की बड़े बड़े हीरोज़  उनके साथ काम करना चाहते थे.


किस सुपरस्टार के प्रपोज़ल को ठुकराया मुमताज़ ने :


फिल्म बालब्रह्मचारी के समय शम्मी कपूर के साथ मुमताज़ की नजदीकियां बढ़ गयी थी. शम्मी कपूर के दो बच्चे थे और उनकी पत्नी गीता बाली कपूर की मौत हो चुकी थी. शम्मी कपूर ने मुमताज़ को प्रपोज़ भी कर दिया लेकिन 18  साल की मुमताज़ का करियर उस वक़्त उठान पर था और वो शम्मी साहब के दो बच्चो की माँ बनने के लिए भी तैयार नहीं थी . मिड 70s में मुमताज़ जब अपने करियर के शिखर पर थी उन्होंने NRI बिजनेसमैन मयूर माधवानी से शादी कर ली और अपनी गहस्थी बसाली. 

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