VIDEO: निकाय अधिकारियों की बड़ी लापरवाही, VVIP मामलों का भी नहीं हुआ निस्तारण

VIDEO: निकाय अधिकारियों की बड़ी लापरवाही, VVIP मामलों का भी नहीं हुआ निस्तारण

जयपुर: शहरी निकायों में आमजन की शिकायतों और समस्याओं का निस्तारण तो दूर की बात है. सीएम हेल्पलाइन मुख्यमंत्री कार्यालय अथवा राष्ट्रपति कार्यालय से प्राप्त परिवादों का भी निस्तारण नहीं किया जा रहा है. मजबूरन मामले में नोडल एजेंसी जन अभाव अभियोग निराकरण विभाग को दखल देना पड़ा. आमजन की शिकायतों एवं समस्याओं को दर्ज कराने के लिए राज्य सरकार के राजस्थान संपर्क पोर्टल, सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त मामलों के निस्तारण की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी प्रदेश के जन अभाव अभियोग निराकरण विभाग की है. 

बड़े निकाय इस मामले में फेल साबित:
विभाग ने हाल ही पिछले 4 सालों से 31 दिसंबर 2020 तक लंबित प्रकरणों की पड़ताल की. इस पड़ताल में सामने आया कि शहरी निकायों के अधिकारी आमजन के मामलों में ही नहीं बल्कि वीवीआइपी मामले जिनमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त मामले आते हैं उनमें भी में भी बड़े लापरवाह हैं. प्रदेश के बड़े निकाय जिनमें नगर निगम शामिल हैं. उनके कामकाज को नजीर मानते हुए छोटे निकाय नगर परिषद और नगर पालिका सीखते हैं यह बड़े निकाय भी इस मामले में फेल साबित हो रहे हैं. आपको बताते हैं प्रदेश के नगर निगमों के इस मामले में क्या हाल है.

जानिए इस मामले में नगर निगमों के हाल:
-जयपुर के नगर निगमों के 4623 सामान्य परिवाद, राष्ट्रपति कार्यालय से प्राप्त 2, जनसमस्याओं के159, राज्यपाल भवन से 15 और मुख्यमंत्री कार्यालय से 25 परिवाद लंबे समय से लंबित चल रहे हैं.

-जोधपुर के नगर निगमों के 775 सामान्य परिवाद, राष्ट्रपति कार्यालय से प्राप्त 1, जनसमस्याओं के19, राज्यपाल भवन से 2 और मुख्यमंत्री कार्यालय से 12 परिवाद लंबे समय से लंबित चल रहे हैं.

-कोटा के नगर निगमों के 746 सामान्य परिवाद, जनसमस्याओं के 28 मुख्यमंत्री कार्यालय से 2 परिवाद लंबे समय से लंबित चल रहे हैं.

-उदयपुर नगर निगम के 242 सामान्य परिवाद,  जनसमस्याओं के 4 और मुख्यमंत्री कार्यालय से 1 परिवाद लंबे समय से लंबित चल रहे हैं.

-बीकानेर नगर निगम के 210 सामान्य परिवाद,  जनसमस्याओं के 8 और मुख्यमंत्री कार्यालय से 5 परिवाद लंबे समय से लंबित चल रहे हैं.

सभी नगर निगमों को इनके निस्तारण की सख्त हिदायत:
राष्ट्रपति कार्यालय, राज्यपाल कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त इन वीवीआइपी मामलों के निस्तारण के लिए जन अभाव अभियोग निराकरण विभाग के प्रमुख सचिव अश्वनी भगत ने स्वायत शासन विभाग के सचिव भवानी सिंह देथा को अर्ध शासकीय पत्र भेजा है. इस पत्र में इन वीवीआइपी मामलों का ब्यौरा देते हुए कहा गया है कि इन मामलों को अविलंब निस्तारित किया जाए. इस पत्र पर स्वायत शासन विभाग नेे सभी नगर निगमों को इनके निस्तारण की सख्त हिदायत दी है. इसके अलावा पिछले 4 साल की पड़ताल में सामने आया हैै कि राजस्थान संपर्क पोर्टल पर बड़ी संख्या में परिवाद लंबित चल रहेे हैं. जिन्हें निपटाने के लिए निकाय अधिकारियों की ओर से कार्यवाही नहीं की जा रही है आपको बताते हैं कितनेेे ऐसे मामले लंबित हैं.

जानिए कितने मामले लंबित:
-15 अगस्त 2017 से 31 दिसंबर 2020 तक स्वायत शासन विभाग से संबंधित कुल 8464 मामले लंबित हैं.

-इससे पहले 18 मार्च 2016 से स्वायत शासन विभाग से संबंधित लंबित मामलों की कुल संख्या 344 है.

-इसी अवधि में जयपुर के नगर निगमों के 177 और जोधपुर के नगर निगमों के 22 परिवाद लंबे समय से लंबित चल रहे हैं.

-इसी प्रकार बीकानेर नगर निगम के 8, उदयपुर नगर निगम के 4 और अजमेर नगर निगम के 3 परिवाद लंबित हैं.

लंबे समय तक लंबित रहना बहुत ही गंभीर विषय:
राष्ट्रपति कार्यालय, राज्यपाल कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त इन वीवीआइपी मामले लंबे समय तक लंबित रहना बहुत ही गंभीर विषय है. इन मामलों में निकाय अधिकारियों की घोर लापरवाही यह बताती है कि आमजन से जुड़े मामले में यह अधिकारी कितने सजग होंगे?

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