एसएमएस मेडिकल कॉलेज में पांच माह में फिर नई टीम !

Vikas Sharma Published Date 2019/08/04 04:41

जयपुर: चिकित्सा शिक्षा विभाग के एक फरमान ने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में "प्रशासन" का फिर से चेहरा बदल दिया है. विभाग ने हाल ही में "एचओडी" के पद को प्रशासनिक श्रेणी के पदों की सूची से हटाने का फैसला किया है. इसके चलते एसएमएस समेत सभी मेडिकल कॉलेजों में पांच माह के अन्तराल में एकबार फिर "प्रशासन" की नई टीम सामने आई है. आखिर क्या है पूरा मामला और अब सूबे के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज में किन डॉक्टरों के पास रहेगी विभागों की जिम्मेदारी, पेश है फर्स्ट इंडिया की रिपोर्ट: 

चिकित्सा शिक्षा विभाग के एक फरमान से बदलती तस्वीर:
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में पहले वरिष्ठता के आधार पर विभागों में मुखिया लगाए जाते थे, लेकिन करीब ढाई साल पहले कोर्ट के आदेश की पालना में दो साल का रोटेशन नियम लागू किया गया. यानी कोई भी चिकित्सक एचओडी के पद पर दो साल से अधिक समय तक नहीं रहेगा. इसके साथ ही जब मेडिकल टीचर्स का सेवाकाल 62 से बढ़ाकर 65 किया गया तो भी विरोध से बचने के लिए यह फरमान निकाला गया कि प्रशासनिक पदों पर चिकित्सक सिर्फ 62 साल तक ही रहेंगे. तब सरकार ने प्रशासनिक पद के रूप में प्राचार्य, अति.प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, अस्पताल अधीक्षक के पद को नोटिफाइड किया. इस मामले में वरिष्ठ चिकित्सकों की बेकद्री को लेकर फर्स्ट इंडिया ने प्रमुखता से खबर चलाई. इसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने नोटिफिकेशन में संशोधन करते हुए विभागाध्यक्ष के पद को प्रशासनिक पद की सूची से हटाया है. इस आदेश का इम्पेक्ट ये रहा कि अकेले एसएमएस अस्पताल में एक दर्जन से अधिक एचओडी बदले है. इसके साथ ही आधा दर्जन एचओडी को भी अपना दो साल का कार्यकाल पूरा करने का मौका मिला है.  

एसएमएस में ये होंगे अब विभागाध्यक्ष:
—मेडिसिन : डॉ एस बनर्जी 
—गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी : डॉ एसएस शर्मा 
—पैथोलॉजी : डॉ कुसुम माथुर 
—माइक्रोबाइलॉजी : डॉ नित्या व्यास
—यूरोलॉजी : डॉ विनय तोमर 
—सर्जरी : डॉ लक्ष्मण अग्रवाल 
—न्यूरोसर्जरी : डॉ एस के जैन  
—ऑप्थेमोलॉजी : डॉ कमलेश खिलनानी
—ईएनटी : डॉ सुनीता अग्रवाल
—ऑथोपेडिक : डॉ महेश बंसल 
—पीडियाट्रिक मेडिसिन : डॉ एमएल गुप्ता
—चेस्ट एण्ड टीबी : डॉ एस पी अग्निहोत्री 
—एनेस्थिसिया : डॉ फरीद अहमद 
—गायनिक : डॉ बी एस मीणा
—मनोरोग : डॉ आर के सोलंकी 
—सर्जिकल ऑकोलॉजी : डॉ राजगोविन्द शर्मा 

एसएमएस मेडिकल कॉलेज में बदलाव की बयान में कई रोचक केस भी सामने आए है. मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ यू एस अग्रवाल को स्कीन डिपार्टमेंट में दो साल तक एचओडी बनाया गया है, लेकिन उन्होंने साथी चिकित्सकों को मौका देते हुए एचओडी पद पर ज्वाइन नहीं करने का फैसला किया है. इसके साथ ही एक दो एचओडी ऐसे भी है, जिन्हें दो साल की समयावधि के चलते 15 दिन से लेकर चार माह तक के लिए नया जिम्मा मिला है. 

मेडिकल कॉलेज में बदलाव की बयार में रोचक तथ्य:
—बदलाव के बाद भी घर में रहेगा एचओडी का "तमगा"
—कॉलेज में मेडिसिन विभाग के एचओडी बने डॉ एस बनर्जी, लेकिन उनकी धर्मपत्नी डॉ केपी बनर्जी से छीना एचओडी पद 
—कॉलेज में गायनिक विभाग की एचओडी थी डॉ केपी बनर्जी, नए फरमान के बाद डॉ बी एस मीणा को मिली यह जिम्मेदारी 
—कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ यूएस अग्रवाल अब बनाए गए स्कीन एचओडी
—लेकिन उन्होंने एचओडी का पद साथी चिकित्सकों के लिए छोड़ने का लिया फैसला 
—ऐसे में मौजूदा एचओडी डॉ दीपक माथुर ही संभालेंगे जिम्मेदारी 
—महज 15 दिन के लिए यूरोलॉजी में एचओडी बनाए गए डॉ विनय तोमर 

सरकार के नए फरमान की चिकित्सक समुदाय में मिलीजुली प्रतिक्रिया मिल रही है. कुछ युवा मेडिकल टीचर्स इस फैसले का विरोध भी कर रहे है, लेकिन अधिकांश का मत ये है कि इस बदलाव से उन वरिष्ठ चिकित्सकों को फिर से मुख्य धारा में आने का मौका मिला है, जिन्होंने 62 साल से ऊपर होने के चलते खुद को सिस्टम से अलग कर लिया था. उनके अनुभव का फायदा विभाग को मिलेगा, साथ ही दो साल के रोटेशन के बाद नए चिकित्सकों को मौका भी मिलता रहेगा. 

... संवाददाता विकास शर्मा की रिपोर्ट 
 

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