नागरिकता हर किसी का जन्म सिद्ध अधिकार, कोई सरकार इसे नहीं छीन सकती: पासवान

FirstIndia Correspondent Published Date 2020/01/04 10:01

नई दिल्ली: बीजेपी की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर अलग रुख अख्तियार करती नजर आ रही है. एलजेपी नेता और सांसद राम विलास पासवान ने कहा है कि धर्म के आधार पर कोई सरकार किसी की नागरिकता को नहीं छीन सकती. ऐसे में अब विपक्ष के साथ बीजेपी की सहयोगी पार्टी एलजेपी भी इसके खिलाफ होती नजर आ रही है. 

एनआरसी पर अभी तक नहीं हुई कोई बात: 
समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए एलजेपी ने रामविलास पासवान ने कहा कि चाहे दलित, आदिवासी, पिछड़े, अल्पसंख्यक या उगड़ी जाति के लोग हों, वे सभी देश के असली नागरिक हैं. नागरिकता उसका जन्म सिद्ध अधिकार है. कोई सरकार इसे छीन नहीं सकती. किसी भी भारतीय को इसको लेकर बेवजह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कह कि, जहां तक राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी)की बता है तो अभी तक इस पर कोई बात नहीं हुई है. इसका किसी मजहब से कोई लेना देना नहीं है. इसके आधार पर किसी की नागरिकता नहीं ली जा सकती. 

कानून को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा:
एलजेपी नेता रामविलास पासवान ने कहा कि सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता मेरा और मेरी पार्टी का मिशन है. मैंने जीवनभर दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है. साथ ही उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार नागरिकता तो दूर रही, इनके अधिकार पर उंगली नहीं उठा सकती है. पासवान ने ट्वीट करते हुए कहा कि नागरिकता (संशोधन) अधिनयम, 2019 को लेकर पूरे देश में भ्रम फैलाया जा रहा है. पीएम ने बार-बार कहा है कि यह कानून नागरिकता देने के लिए है छीनने के लिए नहीं है. 

भारतीय नागरिकता से इसका कोई लेना देना नहीं:
उन्होंने कहा कि मुसलमानों को इस कानून के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि भारतीय नागरिकता से इसका कोई लेना देना नहीं है. साथ ही कहा कि 2003 में सीएए में संशोधन किया गया जिसमें एनआरसी जोड़ा गया. 2004 में यूपीए की सरकार इसे वापस लेने की बजाय 7 मई 2010 को लोकसभा में तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा था-यह स्पष्ट है कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का हिस्सा होगा.


 

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