जयपुर VIDEO: अब मरुधरा में दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक ट्रेनें, अप्रैल से तस्वीर बदलने की उम्मीद

VIDEO: अब मरुधरा में दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक ट्रेनें, अप्रैल से तस्वीर बदलने की उम्मीद

जयपुर: प्रदेश का बड़ा हिस्सा अभी तक विद्युतीकृत ट्रेनों से अछूता है. यहां तक कि राजधानी जयपुर में चलने वाली ट्रेनें भी अभी डीजल इंजन से दौड़ती हैं, लेकिन तेज गति से हो रहे विद्युतीकरण से अप्रैल से तस्वीर बदलने की उम्मीद है. हालांकि अभी भी रेलवे प्रशासन को बड़े फंड की जरूरत होगी, जिससे प्रदेश में विद्युतीकरण के कार्य को तेजी से पूरा किया जा सके. खास रिपोर्ट:

औसत स्पीड में 18 फीसदी तक की बढोतरी:
उत्तर-पश्चिम रेलवे देश के उन चुनिंदा जोनल रेलवे में शामिल है, जिसमें बिजली से ट्रेनों का संचालन नहीं किया जाता है. देशभर में 67.36 हजार किलोमीटर क्षेत्र में रेलवे ट्रैक बिछा हुआ है. इसमें 35.488 हजार किलोमीटर ट्रैक पर विद्युतिकरण हो चुका है. अभी 54 फीसदी यात्रीभार और 65 फीसदी माल लदान इलैक्ट्रिक ट्रेनों से ही किया जा रहा है. जयपुर से दिल्ली, अहमदाबाद और मुंबई तक लंबा रेल रूट है. विद्युतीकरण का एक सबसे महत्वपूर्ण फायदा यह है कि जितने लंबे रेल रूट पर विद्युतीकरण होता है, तो उस सेक्शन में ट्रेनों की संख्या और आवागमन के फेरे बढ़ने से उस सेक्शन की औसत स्पीड में भी 18 फीसदी तक बढोतरी हो सकेगी. ऐसे में इन रूटों पर इलेक्ट्रीफिकेशन पूरा हो जाने के बाद इन रेलखंडों की औसत स्पीड में 18 फीसदी तक की बढोतरी हो सकेगी. 

अप्रैल माह तक 30 फीसदी हिस्से में बिजली से ट्रेनों का संचालन:
ऐसा माना जा रहा है कि अप्रैल माह तक उत्तर-पश्चिम रेलवे जो राजस्थान के करीब 90 फीसदी क्षेत्रफल को समेटे हुए है, इसके करीब 30 फीसदी हिस्से में बिजली से ट्रेनों का संचालन शुरु हो जाएगा. बिजली के इंजन से ट्रेनों का संचालन शुरू होने के बाद रोजाना करीब 4 लाख लीटर डीजल की खपत कम हो जाएगी और वायु प्रदूषण भी कम हो जाएगा. गौरतलब है कि रेलवे हर साल डीजल खरीद पर 26.80 हजार करोड रुपए खर्च करता है. जबकि वर्तमान इलैक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन पर इसका महज 36 फीसदी ही खर्च आता है. 

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जानिए प्रदेश में विद्युतीकरण की प्रोग्रेस ?
—मथुरा-अलवर - 121 किमी - कार्य पूरा हुआ
—दिल्ली सराय रोहिल्ला-बांदीकुई - 217 किमी - कार्य पूरा हुआ
—जिलो-रींगस - 64 किमी - कार्य पूरा हुआ
—रींगस-फुलेरा - 63 किमी - कार्य पूरा हुआ
—अजमेर-उदयपुर - 282 किमी - कार्य पूरा हुआ
—ईदगाह-भरतपुर - 50 किमी - कार्य पूरा हुआ
—फुलेरा-मदार - 72 किमी - कार्य पूरा हुआ
—गुडिया-रानी - 98 किमी - कार्य पूरा हुआ
—हनुमानगढ़-सूरतगढ़ - 47 किमी - कार्य पूरा हुआ
—बांदीकुई-भरतपुर - 97 किमी - कार्य पूरा हुआ
—कनकपुरा-फुलेरा - 51 किमी - कार्य पूरा हुआ
—मावल-पालनपुर - 39 किमी - कार्य पूरा हुआ
—गांधीनगर-कनकपुरा - 14 किमी - कार्य प्रगति पर
—मदार-गुडिया - 131 किमी - कार्य प्रगति पर
—बांदीकुई-जयपुर - 91 किमी - कार्य प्रगति पर

जयपुर-अजमेर मंडल में विद्युतीकरण का कार्य अंतिम चरण में:
उत्तर-पश्चिम रेलवे के जयपुर और अजमेर मंडल में विद्युतीकरण का कार्य अंतिम चरण में है. राजस्थान के 1606 रूट किमी हिस्से में  विद्युतीकरण का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि कुल ट्रैक किलोमीटर को देखा जाए तो यह आंकड़ा 2598 किलोमीटर है. हालांकि राजस्थान सहित देशभर में चल रहे विद्युतिकरण के कार्यों की गति काफी धीमी है. लेकिन जयपुर और अजमेर के लोगों का बिजली से दौडने वाली ट्रेन में सफर करने का सपना अब जल्दी ही पूरा हो जाएगा. दरअसल अभी शिवदासपुरा-सवाईमाधोपुर और कनकपुरा-फुलेरा रूट पर विद्युतिकरण का काम पूरा हो चुका है. तो वहीं जयपुर-बांदीकुई के बीच करीब 90 फीसदी काम पूरा किया जा चुका है. ऐसे में अब जयपुर यार्ड में विद्युतिकरण का काम शुरु कर दिया गया है. जो कि मार्च माह के मध्य तक पूरा कर लिया जाता है. इसके पूरा होने के बाद जयपुर-दिल्ली, आगरा, अहमदाबाद और कोटा ट्रंक रुट पर इलैक्ट्रिक इंजन वाली ट्रेनों का संचालन शुरु हो जाएगा. रेलवे प्रशासन रेलवे ट्रैक के विद्युतीकरण के साथ ही स्टेशनों व कार्यालयों की छतों पर सोलर प्लांट लगा रहा है, जिससे बिजली की अच्छी बचत हो रही है. 

जानिए, क्या फायदा होगा इलेक्ट्रिफिकेशन से ?
—एक डीजल इंजन की अधिकतम ईंधन भराव क्षमता 5 हजार लीटर होती है
—डीजल इंजन से एक किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग आठ लीटर डीजल खर्च होता है
—जयपुर में रोजाना लगभग लगभग 200 इंजनों का आवागमन होता है
—जयपुर से कोटा/मुंबई वाया सवाईमाधोपुर, दिल्ली/आगरा वाया बांदीकुई और
—अहमदाबाद/उदयपुर वाया अजमेर के बीच इलेक्ट्रिक ट्रेन शुरू होने से डीजल की बचत होगी
—इससे करीब 40 फीसदी डीजल इंजनों का संचालन बंद हो जाएगा. 
—रेलवे को रोजाना 4 लाख लीटर डीजल की बचत होने की उम्मीद है
—एक तरफ जहां राजस्व की बचत होगी. वहीं दूसरी तरफ वायु प्रदूषण भी कम होगा

कुल मिलाकर अभी भी 1550 किमी का हिस्सा प्रदेश में ऐसा है, जहां विद्युतीकरण कार्य को जल्द पूरा किए जाने की जरूरत है. उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बजट में भी प्रदेश में विद्युतीकरण के लिए अच्छा फंड मिलेगा, जिससे विद्युतीकरण के कार्यों को तेज गति से पूरा किया जा सकेगा. 

... संवाददाता काशीराम चौधरी की रिपोर्ट 
 

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