VIDEO : पान मसाले के नाम से जहर परोस रहा पान पराग, हाई कोर्ट का नोटिस जारी

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/21 09:15

जयपुर (रामसिंह राजावत)। अगर आप पान पराग पान मसाला खाने के शौकीन हैं, तो अभी से ही संभल जाइये, क्योंकि आप नहीं जानते हैं कि आप कैंसर को खुला बुलावा दे रहे हैं। ये हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि हाईकोर्ट में पेश पान पराग की जांच रिपोर्ट कह रही है। दरअसल, पान पराग के सैंपल की जांच रिपोर्ट में ऐसे कई हानिकारक तत्व मिले हैं, जिनसे कैंसर जैसी खरतनाक बीमारियां होती हैं। इस मामले में हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और पूछा है कि क्यों न इसकी बिक्री पर रोक लगा दी जाए।

विज्ञापन की ये टैग लाइन भले ही आपको अच्छी लगे, लेकिन अगर आप पान पराग का इस्तेमाल करते हैं, तो जरा सावधान हो जाइये। क्योंकि पान पराग से बारातियों का स्वागत नहीं होगा, बल्कि पान पराग कैंसर का स्वागत करेगा। खाद्य प्रयोगशाला की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। जो पान पराग बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा है, उसको खाद्य प्रयोगशाला ने अनसेफ फूड घोषित कर दिया है। रिपोर्ट में कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। सैंपल की जांच के दौरान पान पराग में जहरकारक तत्व मिले, फिर भी जिम्मेदार आंखें बंद करके बैठे हैं। इस खबर पर राजस्थान हाईकोर्ट ने भी मुहर लगा दी है।

हाईकोर्ट ने पान पराग पान मसाले में मिलावट को लेकर सख्त रुख अख्तियार किया है। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और पूछा है कि क्यों न पान पराग की बिक्री पर रोक लगा दी जाए। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पान पराग के मालिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पान पराग खाद्य पदार्थ में जहरीले तत्वों की मिलावट को लेकर कोर्ट में अब अगली सुनवाई 14 फरवरी को होगी। हाईकोर्ट ने ये नोटिस समाजसेवी राजेंद्र सिंह शेखावत की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है।

गौरतलब है कि पान पराग मैग्नीशियम कार्बोनेट की मिलावट और अनसेफ फूड होने को लेकर चर्चा में आया था। फिर भी इसकी लगातार जारी बिक्री और सुनवाई नहीं होने के तथ्यों को आधार बनाकर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। जस्टिस मोहम्मद रफीक की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते नोटिस जारी किए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता एके जैन ने इस मामले की पैरवी की और अदालत को पान पराग की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की गुहार लगाई। कोर्ट को चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी की गई रिपोर्ट और अनसेफ खाद्य पदार्थ से जुड़े फैक्टस भी बताए।

पान पराग पान मसाले के नाम से परोसे जा रहे जहर का खुलासा उदयपुर और अजमेर से जारी सैंपल रिपोर्ट से हुआ था। सैपल जांच के बाद प्रयोगशाला ने पान पराग को अनसेफ फूड बताया था। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि पान पराग मान मसाले में भारी मात्रा में मैग्नीशियम कार्बोनेट मिलाया जाता है। मैग्नीशियम कार्बोनेट हानिकारक पदार्थ है। इसके इस्तेमाल से कैंसर जैसी कई घातक बीमारियां होती हैं। इस खुलासे के बाद भी पान पराग की बाजार में धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। लिहाजा, समाजसेवी राजेंद्र सिंह शेखावत ने चिकित्सा विभाग से कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन, मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तो दूर बिक्री पर प्रतिबंधित लगाने की भी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद राजेंद्र सिंह ने अदालत की शरण ली थी।

चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी गाइडलाइन और नियमों की बात करें तो सैंपल जांच में अगर खाद्य पदार्थ को अनसेफ बताया जाता है तो उसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। फिर भी जांच रिपोर्ट आने के एक साल बाद भी चिकित्सा विभाग ने कार्रवाई नहीं की। जहरकारक तत्वों वाले पान मसाले की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है और स्वास्थ्य महकमा आंख मूंदे बैठा है। सवाल यही उठता है कि आखिर इस जहर की बिक्री किसके इशारे पर हो रही है। बहरहाल, अब मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया है और इस मामले को अदालत ने गंभीरता से लिया है, जिसके बाद पान पराग के मलिकों की मुश्किल बढ़ गई हैं।

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