इस वजह के चलते परशुराम ने धरती को 21 बार किया था क्षत्रिय विहीन

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/05/07 01:07

जयपुर। वैशाख मास शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म होने के कारण आज के दिन को परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। ऋषि जमदग्नि और रेणुका परशुराम के माता-पिता थे। कहा जाता है कि भगवान शिव के परमभक्त परशुराम न्याय के देवता हैं, जिन्होंने 21 बार इस धरती को क्षत्रिय विहीन किया था। 

उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि एक बार सहस्त्रार्जुन अपनी पूरी सेना समेत भगवान परशुराम के पिता जमदग्रि मुनी के आश्रम पहुंचा। मुनि ने अपनी कामधेनु गाय के दूध से पूरी सेना का स्वागत किया लेकिन सहस्त्रार्जुन ने लालचवश मुनि की चमत्कारी कामधेनु को अपने बल का प्रयोग कर छीन लिया। जिसके बाद परशुराम ने इस बात का पता लगते ही सहस्त्रार्जुन को मौत के घाट उतार डाला। 

इस वजह से किया सहस्त्रार्जुन का वध
सहस्त्रार्जुन के पुत्रों ने परशुराम से बदला लेने के लिए उनके पिता का वध कर दिया। जिसके बाद उनकी मां भी अपने पति के वियोग में उनकी चिता पर ही सती हो गईं। मां और पिता की मौत से गुस्साए परशुराम ने शपथ ली कि वह धरती से समस्त क्षत्रिय वंशों का संहार कर देंगे। उन्होंने एक या दो बार नहीं बल्कि पूरे 21 बार पृथ्वी से क्षत्रियों का विनाश कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। 

सीता स्वयंवर के दौरान टूटने वाला धनुष भगवान परशुराम का ही था
त्रेतायुग में सीता स्वयंवर के दौरान टूटने वाला धनुष भगवान परशुराम का ही था। अपने धनुष के टूटने से क्रोधित परशुराम का जब लक्ष्मण के साथ संवाद हुआ तो भगवान श्री राम ने परशुराम जी को अपना सुदर्शन चक्र सौंप दिया था। यह वहीं सुदर्शन चक्र था जो द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के पास था।


 

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