अद्भुत अटल गीत : काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं...

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/08/16 01:32

नई दिल्ली। देश में भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी बनाने के सफर में सबसे बड़ा और अहम किरदार निभाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी को दुनियाभर में एक प्रकांड एवं मंजे हुए प्रखर राजनेता के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने मजबूत सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्ष को भी मजबूत बनाने में हमेशा भागीदारी निभाई है। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत ठीक नहीं है। वाजपेयी 11 जून से दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती हैं, जहां इस वक्त उनकी हालत स्थिर बनी हुई है और उन्हें लाइफ सपोर्टिंग सिस्टम पर रखा गया है।

वाजपेयी ने अक्सर अपने भाषणों में कहा है कि, 'सत्ता पक्ष तभी कुछ काम कर सकता है, जब विपक्ष मजबूत होगा। अगर विपक्ष मजबूत होगा तो सत्ता पक्ष खुद-ब-खुद देश के विकास की दिशा में मजबूती से कार्य कर सकता है।' ऐसे में वापजेयी को राजनीति के क्षेत्र में एक मजबूत विपक्ष के निर्माणकर्ता के रूप में भी पहचाना जाता है।

वाजपेयी के एक प्रखर राजनेता के साथ साथ एक दिग्गज कवि भी रहे हैं, और उन्‍होंने कई कवि सम्मलेनों में ​भी शिरकत की है। और तो और, राजनेता के रूप में किसी मंच पर जनसभा को संबोधित करते हुए भी लोग उनकी कविताएं सुनने का अनुरोध तक भी किया करते थे। ऐसे में वापजेयी राजनीतिक मंच से अपने संबोधन में भी कई मर्तबा कविता पाठ कर दिया करते थे। वाजपेयी के संबोधन की शैली भी जहां प्रखर राजनेता की रही, वहीं उनके संबोधन का अंदाज भी कविताओं से भरा हुआ रहा।

एक कवि के रूप में वाजपेयी की कई ऐसी कविताएं हैं, जो उनकी प्रखर कवि की छवि को प्रदर्शित करती है। वाजपेयी की इन्हीं कविताओं में से 'गीत नया गाता हूं...', 'हार नहीं  मानूंगा...', 'आओ फिर से दिया जलाएं...', 'गीत नहीं गाता हूं...', 'कदम मिला कर चलना होगा...', 'मैं अखिल विश्व का गुरू महान...' 'जीवन की ढलने लगी सांझ...' जैसे कई कविताएं शामिल हैं। उनकी कविताओं को आज भी लोग सुनना पसंद कीते हैं।

वाजपेयी अपनी कविता 'गीत नया गाता हूं...' को अक्सर अपने भाषणों में पढ़ा करते थे। ऐसे में उनकी इस कविता की पक्तियां पढ़ना भी काफी रौचक है। प्रस्तुत है 'गीत नया गाता हूं...'

'टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर, पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर,
झरे सब पीले पात, कोयल की कूक रात, प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूं।
गीत नया गाता हूं।
टूटे हुए सपनों की सुने कौन सिसकी? अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी।
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूँगा, काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं।
गीत नया गाता हूं।

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