राहुल गांधी के दौरे से पूर्व गहलोत सरकार की 'सियासी एक्सरसाइज'

Dr. Rituraj Sharma Published Date 2019/01/05 01:15

जयपुर (ऋतुराज शर्मा)। गहलोत सरकार ने लोकसभा चुनाव के हिसाब से पूरे राजस्थान का प्रतिनिधित्व तय करने के लिए शुक्रवार देर रात जिलों में प्रभारी मंत्रियों को बना दिया है। मंत्रिमंडल सचिवालय ने इसका देर रात आदेश जारी किया है। इसके जरिए मंत्रिपरिषद में जिन जिलों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला, उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए सियासी हिसाब से प्रभारी मंत्रियों के जरिए कवर अप करने और साधने की कोशिश की गई है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे से पूर्व गहलोत सरकार ने जिलों में प्रभारी मंत्री नियुक्त कर दिए हैं। इसके तहत मंत्रियों को उनके गृह जिले में नहीं बल्कि दूसरे जिले में प्रभारी बनाया गया है। राहुल गांधी के दौरे से ऐन पहले एक्सरसाइज अहम मानी जा रही है।

23 मंत्रियों को बनाया जिला प्रभारी :
— बीडी कल्ला : जैसलमेर, बाड़मेर
— शांति धारीवाल : जयपुर
— परसादी लाल : झुंझुनूं 
— मास्टर भंवरलाल मेघवाल : उदयपुर
— लालचंद कटारिया : जोधपुर, पाली
— रघु शर्मा : सीकर
— प्रमोद जैन भाया : अजमेर
— विश्वेंद्र सिंह : करौली, धौलपुर
— हरीश चौधरी : दौसा
— रमेश चंद मीणा : झालावाड़, बारां
— उदय लाल आंजना : राजसमंद
— प्रताप सिंह खाचरियावास : कोटा, बूंदी 
— शाले मोहम्मद : चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़
— गोविंद सिंह डोटासरा : श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ 
— ममता भूपेश : अलवर 
— अर्जुन सिंह बामणिया : भीलवाड़ा
— भंवर सिंह भाटी : जालौर, सिरोही
— सुखराम बिश्नोई : नागौर
— अशोक चांदना : भरतपुर
— टीकाराम जूली : टोंक, सवाई माधोपुर
— भजन लाल जाटव : बीकानेर
— राजेंद्र यादव : बांसवाड़ा, डूंगरपुर
— डॉ. सुभाष गर्ग : चूरू

करीब 10 मंत्रियों को दो दो जिलों का प्रभार दिया। इनके सहित कुछ जिलों में से मंत्रिपरिषद में प्रतिनिधित्व नहीं है। सवाईमाधोपुर, झालावाड़, धौलपुर पाली जैसे करीब 10 से 12 जिले ऐसे हैं, जहां कांग्रेस प्रत्याशियों के नहीं जीतने या अन्य कारणों से उन जिलों को मंत्रिपरिषद में यह सरकार की भागीदारी में प्रतिनिधित्व नहीं मिला। लोकसभा चुनाव के नजरिये से इन जिलों पर योजनाओं के क्रियान्वयन में खास फोकस रहेगा। इसलिए इन जिलों में प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति हुई है।

अहम और दिलचस्प तथ्य यह है कि इनमें उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का नाम शामिल नहीं है। लोकसभा चुनाव की दृष्टि से यह कवायद इस मायने में अहम मानी जा रही है कि जिन जिलों को मंत्रिपरिषद में प्रतिनिधित्व नहीं मिला था, अब वहां प्रभारी मंत्रियों के जरिए बैलेंस किया जाएगा। यह मंत्री जिलों में प्रभारी सचिवों के साथ दौरा और रात्रि विश्राम करके सरकार की योजनाओं की प्रगति की पूरी मॉनिटरिंग करेंगे। खासतौर पर फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने के लिए इनकी अहम जिम्मेदारी रहेगी।

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