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कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर प्रियंका गांधी ने साधा योगी सरकार पर निशाना, यूपी में बच्चों के साथ अपराध की सबसे ज्यादा घटनाएं

कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर प्रियंका गांधी ने साधा योगी सरकार पर निशाना, यूपी में बच्चों के साथ अपराध की सबसे ज्यादा घटनाएं

लखनऊ: प्रियंका गांधी ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर योगी सरकार पर हमला बोला है. प्रियंका ने ट्वीट करते हुए यूपी की बीजेपी सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने उन्नाव में बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना का जिक्र करते हुए ट्वीट किया और लिखा कि यूपी की बीजेपी सरकार में बच्चों के साथ अपराध की सबसे ज्यादा घटनाएं घटी हैं. 

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आखिर कब तक ऐसे चलेगा?
प्रियंका ने सवाल करते हुए कहा कि क्या सरकार पर इन घटनाओं का कोई असर नहीं पड़ता? नौ साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ और इलाज के दौरान वो नहीं रही. आखिर कब तक ऐसे चलेगा. बता दें कि यूपी के उन्नाव जिले में नौ साल की मासूम बच्ची को दरिंदे ने हवस का शिकार बनाया. विरोध करने पर आरोपी ने मासूम का गला दबा दिया. उसके बाद पीड़िता ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लोकर जांच शुरू कर दी है. 

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मंगलवार शाम अज्ञात व्यक्ति ने किया दुष्कर्म: 
यह घटना उन्नाव जिले के बिहार थाना इलाके के एक गांव की है जहां कक्षा पांच में पढ़ने वाली नौ साल की बच्ची से मंगलवार शाम अज्ञात व्यक्ति ने दुष्कर्म किया. शोर मचाने पर आरोपी ने उसका गला दबा दिया. उसके बाद बच्ची के बेहोश होने पर आरोपी उसे गांव के बाहर सुनसान जगह पर फेंककर फरार हो गया. उसके बाद ग्रामीणों ने मासूम को बेहोस ही लात में पड़ा देखकर पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को अस्पताल पहुंचाया जहां उसकी मौत हो गई. 
 

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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने राज्यसभा चुनाव में बगावत करने वाले सात विधायकों को निलंबित कर दिया है. इसके साथ ही मायावती ने कहा कि एमएलसी के चुनाव में बसपा जैसे को तैसा का जवाब देने के लिए पूरी ताकत लगा देगी. बीजेपी को वोट देना पड़ेगा तो भी देंगे.

राज्यसभा चुनावों में हम सपा प्रत्याशियों को बुरी तरह हराएंगे:
मायावती ने कहा कि हमारी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के दौरान सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने के लिए सपा से हाथ मिलाया था. लेकिन उनके परिवारिक अंतरकलह के कारण बसपा के साथ गठबंधन कर भी वो ज्यादा लाभ नहीं उठा पाए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्यसभा चुनावों में हम सपा प्रत्याशियों को बुरी तरह हराएंगे. इसके लिए हम अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे. इसके लिए अगर हमें भाजपा या किसी अन्य पार्टी के प्रत्याशी को अपना वोट देना पड़े तो हम वो भी करेंगे.

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इन विधायकों को किया पार्टी से निलंबित:
मायावती ने विधायक असलम राइनी (भिनगा-श्रावस्ती), असलम अली (ढोलाना-हापुड़), मुजतबा सिद्दीकी (प्रतापपुर-इलाहाबाद), हाकिम लाल बिंद (हांडिया- प्रयागराज) , हरगोविंद भार्गव (सिधौली-सीतापुर), सुषमा पटेल( मुंगरा बादशाहपुर) और वंदना सिंह -( सगड़ी-आजमगढ़) को पार्टी से निलंबित कर दिया है.

सभी बागी विधायक जल्द ही सपा ज्वॉइन कर सकते हैं:
गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान बसपा के सात विधायक बागी हो गए हैं. माना जा रहा है कि सभी बागी विधायक जल्द ही सपा ज्वॉइन कर सकते हैं. इनकी मुलाकात अखिलेश यादव से हो चुकी है.

हाथरस केस: यूपी में जातीय दंगा फैलाने के लिए मॉरीशस से भेजे गए 50 करोड़, 100 करोड़ की विदेशी फंडिंग का दावा

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लखनऊ: हाथरस मामले के बहाने यूपी में जातीय दंगे फैलाने की साजिश में जांच एजेंसियों के हाथ बड़ा सुराग हाथ लगा है. प्रवर्तन निदेशालय की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, इस कांड के बहाने जातीय दंगा फैलाने के लिए पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पास मॉरिशस से 50 करोड़ आए थे. सूत्रों के मुताबिक, पूरी फंडिंग 100 करोड़ से अधिक रुपये की थी. अब इस पूरे मामले की जांच की जा रही है. 

मेरठ से चार संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया गया था:
बता दें कि हाथरस कांड के बहाने दंगे फ़ैलाने की साजिश में राजधानी लखनऊ, हाथरस समेत कई थानों में दर्जन भर से ज्यादा एफआईआर दर्ज हैं. गौरतलब है कि हाथरस में दंगे की साजिश रचने के आरोप में मेरठ से चार संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया गया था. इन चारों का पीएफआई संगठन से रिश्ता बताया जा रहा था. पुलिस ने इनके पास से भड़काऊ साहित्य बरामद किया था. इससे पहले यूपी पुलिस ने एक वेबसाइट के जरिए दंगों की साजिश का दावा भी किया है.

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पीड़िता को न्याय दिलाने के नाम पर रातों-रात एक वेबसाइट बनाई गई:
वहीं हाथरस को लेकर बनी वेबसाइट 'जस्टिस फॉर हाथरस विक्टिम' की जांच ईडी करेगा. दरअसल, जांच एजेंसियों को शुरुआती जांच में पता चला है कि पीड़िता को न्याय दिलाने के नाम पर रातों-रात एक वेबसाइट बनाई गई. इसके तहत यूपी में जातीय दंगा फैलान की साजिश रची गई थी. इतना ही नहीं इस वेबसाइट के माध्यम से इस्लामिक देशों से फंडिंग भी की गई. अब वेबसाइट के जरिए जिन खातों में पैसा आया है, उसकी जांच ईडी करेगा. यह वेबसाइट प्लेटफॉर्म कॉर्ड डॉट कॉम पर बनाई गई थी.

क्या था यूपी सरकार का दावा: 
यूपी सरकार के अनुसार, प्रदेश में जातीय दंगों की साजिश कराकर दुनिया मैं पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की छवि खराब करने के लिए जस्टिस फार हाथरस नाम से रातों रात वेबसाइट तैयार हुई. वेबसाइट में फर्जी आईडी के जरिए हजारों लोग जोड़े गए.

हाथरस मामला : जांच पूरी नहीं होने पर SIT को रिपोर्ट सौंपने के लिए 10 दिन का अतिरिक्त समय मिला

हाथरस मामला : जांच पूरी नहीं होने पर SIT को रिपोर्ट सौंपने के लिए 10 दिन का अतिरिक्त समय मिला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में दलित समुदाय की महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और उसकी मौत मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 10 दिन का और समय दिया गया है. गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने बुधवार को बताया कि एसआईटी को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 10 दिन का और समय दिया गया है.

30 सितंबर को एसआईटी का गठन किया था: 
अतिरिक्त समय दिए जाने की वजह के बारे में पूछने पर अवस्थी ने बताया "इसका एक ही कारण है और वह यह, कि अभी जांच पूरी नहीं हो पाई है." गौरतलब है कि हाथरस में एक दलित लड़की से कथित रूप से सामूहिक बलात्कार के बाद उसकी मौत के मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने पिछली 30 सितंबर को एसआईटी का गठन किया था. उस वक्त उसे अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए सात दिन का समय दिया गया था. यह अवधि आज समाप्त हो रही है.

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इस मुद्दे को लेकर तमाम विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा:  
हाथरस मामले को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां खासी तेज हैं. इस मुद्दे को लेकर तमाम विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा है. राज्य सरकार ने इसकी सीबीआई जांच की भी सिफारिश की है.

अपने रवैये में बदलाव लाये योगी सरकार : मायावती

अपने रवैये में बदलाव लाये योगी सरकार : मायावती

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने हाथरस मामले के पीड़ित परिवार से मुलाकात करने गये विपक्षी नेताओं के साथ पुलिस की बदसलूकी की निंदा करते हुए सरकार को अपने रवैये में बदलाव लाने की सलाह दी है.

वार्ता के बाद मिली रिपोर्ट अतिःदुखद थी: 
मायावती ने सोमवार को एक ट्वीट किया, 'हाथरस में कथित सामूहिक दुष्कर्म और मौत के मामले के बाद सबसे पहले पीड़ित परिवार से मिलने व सही तथ्यों की जानकारी के लिए वहां 28 सितम्बर को बसपा प्रतिनिधिमण्डल गया था, जिनकी थाने में ही बुलाकर उनसे वार्ता कराई गई थी. वार्ता के बाद मिली रिपोर्ट अतिःदुखद थी, जिसने मुझे मीडिया में जाने के लिए मजबूर किया.'

मीडिया के जाने पर भी उनके साथ हुई बदसलूकी शर्मनाक:
उन्होंने कहा, 'इसके बाद वहां मीडिया के जाने पर भी उनके साथ हुई बदसलूकी तथा कल और परसों विपक्षी नेताओं एवं लोगों पर पुलिस का लाठीचार्ज अति-निन्दनीय व शर्मनाक है. सरकार को अपने इस अहंकारी व तानाशाही वाले रवैये को बदलने की सलाह, वरना इससे लोकतन्त्र की जड़ें कमजोर होंगी.'

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हाथरस में हुआ था 19 वर्षीय दलित लड़की से कथित तौर पर दुष्कर्म:
गौरतलब है कि हाथरस जिले के चंदपा क्षेत्र के एक गांव में 19 वर्षीय एक दलित लड़की से कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया था. हालत बिगड़ने पर उसे अलीगढ़ के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से उसे दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था. वहां पिछले मंगलवार को उसकी मौत हो गयी थी.

बाबरी विध्वंस: जज एसके यादव ने कहा- पूर्व नियोजित नहीं थी विवादित ढांचा गिराने की घटना, आरोपी तो भीड़ को रोक रहे थे

बाबरी विध्वंस: जज एसके यादव ने कहा- पूर्व नियोजित नहीं थी विवादित ढांचा गिराने की घटना, आरोपी तो भीड़ को रोक रहे थे

लखनऊ: बाबरी विध्वंस केस में सीबीआई कोर्ट ने सभी 32 आरोपियों को 28 साल बाद बरी करार दिया है. जज एसके यादव ने कहा है कि विवादित ढांचा गिराने की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी. ये घटना अचानक हुई थी. इसके साथ ही कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सिर्फ तस्वीरों से कुछ साबित नहीं होता है. इस मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई, फोटो, वीडियो, फोटोकॉपी को जिस तरह से साबित किया गया वह साक्ष्य में ग्राह्य नहीं है.

कोर्ट ने कहा कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी:
कोर्ट ने कहा कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, संगठन के द्वारा कई बार रोकने का प्रयास किया गया. ये घटना अचानक ही हुई थी, भीड़ ने ढांचे को गिरा दिया. कोर्ट ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख रहे अशोक सिंघल के खिलाफ भी कोई सबूत नहीं हैं.

सिर्फ तस्वीरों के आधार पर ही किसी को दोषी नहीं बना सकते:
अदालत ने कहा कि भीड़ वहां पर अचानक से आई और भीड़ ने ही ढांचे को गिरा दिया. जिन 32 लोगों का नाम शामिल किया गया, उन्होंने भीड़ को काबू करने की कोशिश की. सिर्फ तस्वीरों के आधार पर ही किसी को दोषी नहीं बना सकते हैं. ये घटना अचानक ही हुई थी, भीड़ ने ढांचे को गिरा दिया. 

2 सितंबर से फैसला लिखने का काम शुरू हो गया था:
6 दिसंबर 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले पर आज कोर्ट का फैसला आया है.  मामले में लाल कृष्ण आडवाणी , मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, नृत्य गोपाल दास, कल्याण सिंह समेत 49 आरोपी बनाए गए थे, जिसमें 17 लोगों की मौत हो चुकी है. सीबीआई की अदालत ने 1 सितंबर तक मामले की सुनवाई पूरी कर ली थी और 2 सितंबर से फैसला लिखने का काम शुरू हो गया था. देश की सियासत में बेहद अहम रहे इस मामले पर 28 सालों बाद फैसला सुनाया. 


 

Babri Demolition Case Verdict : ढांचा विध्वंस पर 28 साल बाद फैसला, आडवाणी-जोशी और उमा समेत सभी 32 आरोपी बरी

Babri Demolition Case Verdict : ढांचा विध्वंस पर 28 साल बाद फैसला, आडवाणी-जोशी और उमा समेत सभी 32 आरोपी बरी

लखनऊ: अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को ढहाए गए विवादित ढांचे के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत फैसला सुनाते हुए आडवाणी, जोशी, उमा भारती सहित सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है. अपना फैसला पढ़ते हुए जज एसके यादव ने कहा गया कि ये घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, संगठन के द्वारा कई बार रोकने का प्रयास किया गया. जज ने अपने शुरुआती कमेंट में कहा कि ये घटना अचानक ही हुई थी. 

6 आरोपी कोर्ट से गैरहाजिर रहे:
फैसला सुनाते समय कोर्टरूम में लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, सतीश प्रधान, महंत गोपालदास और उमा भारती मौजूद नहीं रहे. ये सभी लोग अपने अपने कारणों से गैरहाजिर थे. कोर्टरूम में मौजूद 26 आरोपियों की हाजिरी लगी. लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 6 आरोपी कोर्ट से गैरहाजिर रहे.

कोर्ट को चाहिए वह सभी को बरी कर दे:
इससे पहले बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी कहते हैं कि अब इस मुकदमे को समाप्त कर देना चाहिए. कोर्ट को चाहिए वह सभी को बरी कर दे. उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट से फैसला मंदिर के हक में आ चुका है. इसीलिए अब इस मुकदमे को खत्म कर देना चाहिए. ऐसा नहीं होने पर हिंदू-मुस्लिम सौहार्द को खतरा है. उन्होंने कहा कि मामले में आरोपी रहे कई लोगों की मौत हो चुकी है तो वहीं कई अब काफी बुजुर्ग हो गए हैं.

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स्पेशल जज सुरेंद्र कुमार यादव के कार्यकाल का आज आखिरी दिन:
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का शुभारंभ होने के बाद अब बाबरी विध्वंस केस में फैसला आ गया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के स्पेशल जज सुरेंद्र कुमार यादव आज इस मामले में फैसला सुनाने के साथ ही रिटायर हो जाएंगे. स्पेशल जज सुरेंद्र कुमार यादव के कार्यकाल का आज आखिरी दिन है. फैसला सुनाने के साथ ही वह शाम 5:00 बजे रिटायर हो जाएंगे. 

2 सितंबर से फैसला लिखने का काम शुरू हो गया था:
6 दिसंबर 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले पर आज कोर्ट का फैसला आया है.  मामले में लाल कृष्ण आडवाणी , मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, नृत्य गोपाल दास, कल्याण सिंह समेत 49 आरोपी बनाए गए थे, जिसमें 17 लोगों की मौत हो चुकी है. सीबीआई की अदालत ने 1 सितंबर तक मामले की सुनवाई पूरी कर ली थी और 2 सितंबर से फैसला लिखने का काम शुरू हो गया था. देश की सियासत में बेहद अहम रहे इस मामले पर 28 सालों बाद फैसला सुनाया. 


 

योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला, अब संस्कृत में भी जारी होगी सरकार की विज्ञप्ति

योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला, अब संस्कृत में भी जारी होगी सरकार की विज्ञप्ति

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला किया है. योगी सरकार ने हिंदी के साथ ही सभी सरकारी सूचनाएं संस्कृत भाषा में जारी करने का फैसला किया है. इसी क्रम में रविवार को कोविड-19 की समीक्षा बैठक का प्रेस नोट हिंदी के साथ ही संस्कृत भाषा में जारी किया गया. 

चार भाषाओं में प्रकाशित होगा कामकाज: 
ऐसे में अब योगी सरकार का सूचना विभाग अब चार भाषाओं में अपने कामकाज को प्रकाशित करेगा. उत्तर प्रदेश में सरकार सूचना विभाग के कामकाज को हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषा के अलावा संस्कृत में भी प्रकाशित करेगी.

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संस्कृत की एक टीम ने काम करना शुरू भी कर दिया:
इसकी शुरुआत करते हुए संस्कृत की एक टीम ने काम करना शुरू भी कर दिया है. सरकार के मुताबिक यह फैसला संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है. साथ ही संस्कृत प्रेमियों की मांग को देखते हुए ये कदम उठाया गया है.

संस्कृत भाषा के उत्थान लिए कई बार सार्वजनिक रूप से बोल चुके: 
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संस्कृत भाषा के लिए उत्थान और विकास के लिए कई बार सार्वजनिक रूप से बोल चुके हैं. अब सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस बारे में फैसला लिया है. सीएम योगी आदित्यनाथ का संस्कृत प्रेम किसी से छिपा नहीं है. 


 

संसद में विपक्षी नेताओं के व्यवहार पर मायावती ने जताई नाराजगी, कहा - यह लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने पिछले दिनों किसान बिल पारित होने के दौरान संसद खासकर राज्यसभा में विपक्षी नेताओं के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई है. मायावती ने ट्वीट करते हुए लिखा कि वैसे तो संसद लोकतंत्र का मंदिर ही कहलाता है फिर भी इसकी मर्यादा अनेकों बार तार-तार हुई है. वर्तमान संसद सत्र के दौरान भी सदन में सरकार की कार्यशैली व विपक्ष का जो व्यवहार देखने को मिला है वह संसद की मर्यादा, संविधान की गरिमा व लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला है. अति-दुःखद.

विपक्षी सांसदों ने काफी हंगामा खड़ा किया था: 
गौरतलब है कि रविवार को राज्यसभा में किसान बिल पारित कराने के दौरान विपक्षी सांसदों ने काफी हंगामा खड़ा किया था. टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने तो उप सभापति के आसान के पास जाकर रूल बुक तक फाड़ दी थी. 

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मंगलवार को सरकार ने सात विधेयक उच्च सदन से पास करा लिए:
रविवार की घटना के बाद हालांकि मंगलवार को सरकार ने सात विधेयक उच्च सदन से पास करा लिए. इस पर विपक्ष ने अपनी मांगे नहीं मानने पर संयुक्त रूप से सत्र का बहिष्कार किया. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि जब तक हमारे सांसदों के बहिष्कार को वापस नहीं लिया जाता और किसान के विधेयकों से संबंधित हमारी मांगों को नहीं माना जाता, विपक्ष सत्र का बहिष्कार करेगा.