VIDEO: गड़ीसर सरोवर की हालत हुई जर्जर, कहीं इतिहास ही न बन जाए यह ऐतिहासिक विरासत!

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/05/19 01:34

जैसलमेर: रेगिस्तान में नखलिस्तान की प्रतिमूर्ति और जैसलमेर में सैकड़ों साल प्राचीन गड़ीसर सरोवर को लेकर जिम्मेदारों की उपेक्षा का भाव टूटने का नाम नहीं ले रहा. इस ऐतिहासिक विरासत के भीतर और आसपास कलात्मक बंगलियां और अन्य निर्माण कार्य लगातार जर्जर हो रहे हैं तथा साफ-सफाई व्यवस्था का कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं किया जा रहा. एक बार फिर मानसून सिर पर है, उससे पहले गड़ीसर तालाब को नवजीवन देने के लिए जिस गंभीरता की दरकार है, वह कहीं दिखाई नहीं देती. आज से महज चंद दशक पहले तक ऐतिहासिक गड़ीसर सरोवर जैसलमेर शहरवासियों के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत हुआ करता था और आज हालत यह है कि इसका पानी नहाने के काबिल भी नहीं रह गया है. 

जैसलमेर आने वाला प्रत्येक सैलानी गड़ीसर जरूर जाता है
गड़ीसर को निहारने आज भी सालाना लाखों देशी-विदेशी सैलानी पहुंचते हैं और जैसलमेर आने वाला प्रत्येक सैलानी गड़ीसर जरूर जाता है, लेकिन पानी के बीचोबीच और किनारे बनी हुई प्राचीन बंगलियों व झरोखों की जीर्ण अवस्था को सुधारने के लिए कतई काम नहीं हो रहा. ऐसे ही पानी की आवक के रास्ते में होने वाले अतिक्रमणों की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा. गड़ीसर और उसके आसपास धड़ल्ले से अतिक्रमण और अवैध निर्माण का सिलसिला बेधडक़ चल रहा है. यह समस्या अब वर्षों पुरानी हो चुकी है तथा नगरपरिषद से लेकर जिला प्रशासन की ओर से इसके समाधान के प्रयास नहीं किए जा रहे.  

गड़ीसर में प्राचीन स्मारकों के जीर्णोद्धार का जिम्मा पुरातत्व विभाग पर 
जैसलमेर नगरपरिषद की ओर से विगत सालों के दौरान गड़ीसर के आसपास घाट निर्माण तथा दो सुलभ शौचालयों का निर्माण ही करवाया गया है, लाखों रुपए की राशि इन कार्यों पर खर्च हो चुकी है लेकिन प्राचीन और कलात्मक बंगलियों व छतरियों की तरफ जिम्मेदारों का ध्यान नहीं जा रहा. गौतरलब है कि गड़ीसर में प्राचीन स्मारकों के जीर्णोद्धार का जिम्मा पुरातत्व विभाग पर है. वह इन स्मारकों के प्रति उपेक्षापूर्ण बर्ताव करता रहा है. पिछले तीन साल से बंगली पर बनी पत्थर की मयूराकृति नीचे गिरी हुई है, उसे अब तक यथास्थान तक नहीं लगाया गया.

गड़ीसर क्षेत्र में साफ-सफाई के इंतजाम भी पर्याप्त नहीं 
बीच बंगली तो इतनी जर्जर है कि कभी भी भरभरा कर जल समाधि ले सकती है. गड़ीसर क्षेत्र में साफ-सफाई के इंतजाम भी पर्याप्त नहीं हैं. सैलानियों और अन्य लोगों की शिकायत यह रहती है कि कचरा डालने के लिए डस्टबिन तक नहीं लगे. दिन और रात के समय सरोवर के आसपास शराब-बीयर पीने वालों को रोकने वाला कोई नहीं है. बोतलों के कांच बिखरे हुए नजर आते हैं.

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in