देशभर में लोहड़ी की धूम, पर्व को लेकर ये हैं किवदंतियां...

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/13 02:40

नई दिल्ली। लोहड़ी का त्यौहार हिंदु कलैंडर के अनुसार पौष माह की आखिरी रात में मनाया जाता है। सिखों के लिए लोहड़ी खास मायने रखती है। त्यौहारी के कुछ दिन पहले से ही इसकी तैयारी शुरु हो जाती है। विशेष रुप से शरद ऋतु के समापन पर इस पर्व को मनाने का प्रचलन है। 2019 में यह त्यौहार 13 जनवरी यानि आज को मनाया जा रहा है। लोहड़ी के बाद से ही बड़े दिन होने लगते हैं, यानि माघ मास शुरु हो जाता हैयह त्यैहार पूरे विश्व में मनाया जाता है। 

हालांकि, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में ये त्यौहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। लोहड़ी पर घर-घर जाकर दुल्ला-भट्टी और अन्य तरह से गीत गाने की परंपरा है, लेकिन आजकल ऐसा कम ही होता है। बच्चे घर घर लोहड़ी लेने जाते हैं, और उन्हें खाली हाथ नहीं लौटाया जाता...इसलिए उन्हें गुड़, मूंगफली,तिल गजक या रेवड़ी दी जाती है। दिनभर घर-घर से लकड़ियां एकत्र की जाती हैं खरीदकर लाई जाती हैं और शाम को चौगाहे या घरों के आस-पास खुली जगह पर जलाई जाती है। उस अग्नि में तिल, गुड और मक्का को भोग के रुप में चढ़ाया जाता है। आग लगाकर लोहड़ी को सभी में वितरित किया जाता है। नृत्य-संगीत का दौर भी चलता है पुरुष भांगड़ा तो महिलाएं गिद्दा करती हैं। 

दुल्ला भट्टी के बारे में लोक में इस तरह की किवदंती है कि मुगल राजा अकबर के काल में दुल्ला भट्टी नामक लुटेरी पंजाब में रहता था, जो न केवल धनी लोगों को लूटता था,बल्कि बाजार में बेची जाने वाली गरीब लड़कियों को बचाने के साथ उनकी शादी भी करवाता था। लोहड़ी को दुल्ला भट्टी से जोड़ा जाता है। लोहड़ी के कईं गीतों में भी इनके नाम का जिक्र होता है।

इसके अलावा इस पर्व से संबंधित एक और कथा भी लोक में प्रचलित है कि इस कथा के अनुसार मकर संक्रांति के दिन कंस ने कृष्ण को मारने के लिए लोहिता नामक राक्षसी को गोकुल भेजा था,जिसे कृष्ण ने खेल-खेल में मार दिया था। उसी घटना के फलस्वरुप लोहड़ी पर्व मनाया जाता है। 
एक अन्य कथा के मुताबिक राजा दक्ष की पुत्री सती ने अपने पति भगवान शंकर के अपमान से दुखी होकर खुद को अग्नि के हवाले कर दिया था। इसकी याद में ही अग्नि जलाई जाती है। 

पंजाबियों के लिए लोहड़ी का खास महत्व है जिस घर में नई शादी हुई हो, उन्हें लोहड़ी की बधाई दी जाती है। इस दिन विवाहित बहन और बेटियों को घर बुलाया जाता है। यह त्यौहार बहन बेटियों की रक्षा और सम्मान के लिए मनाया जाता है।   
 

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