सरकार को क्लीन चिट मिलने के बावजूद फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा राफेल मामला

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/02 12:27

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए चुनावों में कांग्रेस की ओर से सबसे ज्वलंत मुद्दा बनाया गया राफेल डील मामला एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले को लेकर अब कोर्ट में ए​क पुनर्विचार याचिका दायर की गई है, जिसमें कोर्ट से राफेल केस पर अपने फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध किया गया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 14 दिसंबर को अपने फैसले में साफ कहा था कि राफेल डील में उसे कोई अनियमितता नजर नहीं आई है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा था कि देश की सुरक्षा के लिए यह प्लेन जरूरी हैं।

राफेल डील मामले में सरकार को सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्रियों ने इस मामले को लेकर एक बार फिर से कोर्ट का रुख किया है। इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने वकील प्रशांत भूषण के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका दायर की है। याचिका में इन्होंने कोर्ट से अपने फैसले पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया गया है। इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील मामले में सरकार को क्लीच चिट देते हुए राफेल को देश की जरूरत बताते हुए इसके खिलाफ दायर की गई सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

गौरतलब है कि कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने यूपीए की तुलना में तीन गुना अधिक कीमत देकर राफेल विमान का सौदा किया है, जो कि मोदी सरकार में हुए भ्रष्टाचार को दर्शाता है। राफेल मामले में अब एक बार फिर से याचिकाकर्ताओं ने पुनर्विचार अर्जी के लिए खुली अदालत में मौखिक सुनवाई करने का अनुरोध किया है। याचिका में कहा गया है कि राफेल पर हाल के फैसले में कई त्रुटियां हैं। यह फैसला सरकार द्वारा किए गए गलत दावों पर आधारित है, जो सरकार ने बिना हस्ताक्षर के सीलबंद लिफाफे में दिया था और इस तरह से स्वाभाविक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है।

ये है राफेल डील मामले से जुड़ी पूरी कहानी : 
30 दिसंबर, 2002 : खरीद प्रक्रिया को दुरुस्त करने के लिए रक्षा खरीदी प्रक्रिया (डीपीपी) अपनाई गई। 
28 अगस्त, 2007 : रक्षा मंत्रालय ने 126 एमएमआरसीए लड़ाकू विमान खरीदने के लिए प्रस्ताव अनुरोध जारी किया। 
4 सितंबर, 2008 : रिलायंस समूह ने रिलायंस ऐरोस्पेस टेक्नॉलजीज लिमिटेड (आरएटीएल) का गठन किया। 
मई 2011 : भारतीय वायुसेना ने राफेल और यूरो लड़ाकू विमानों को शॉर्टलिस्ट किया। 
30 जनवरी, 2012 : दसॉ ऐविएशंस के राफेल विमानों ने सबसे कम मूल्य का टेंडर पेश किया। 
13 मार्च, 2014 : हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और दसॉ ऐविएशन के बीच 108 विमानों को बनाने को लेकर समझौता हुआ। इसके तहत दोनों कंपनियां क्रमश: 70 प्रतिशत और 30 प्रतिशत काम के लिए जिम्मेदार होंगी। 
8 अगस्त, 2014 : तत्कालीन रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने संसद को बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के 3-4 साल के भीतर प्रयोग के लिए पूरी तरह से तैयार 18 विमान प्राप्त हो जाएंगे। बाकि के 108 विमान अगले 7 साल में मिलने की संभावना है। 
8 अप्रैल, 2015 : तत्कालीन विदेश सचिव ने कहा कि दसॉ, रक्षा मंत्रालय और HAL के बीच विस्तृत बातचीत चल रही है। 
10 अप्रेल, 2015 : फ्रांस ने प्रयोग के लिए पूरी तरह से तैयार 36 विमानों के नए सौदे की घोषणा की। 
26 जनवरी, 2016 : भारत और फ्रांस ने 36 लड़ाकू विमानों के लिए अग्रीमेंट पर साइन किए। 
23 सितंबर, 2016 : भारत-फ्रांस की सरकारों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर। 
18 नवंबर, 2016 : सरकार ने संसद को बताया कि प्रत्येक राफेल विमान की कीमत करीब 670 करोड़ रुपये होगी और सभी विमान अप्रैल 2022 तक प्राप्त हो जाएंगे। 
31 दिसंबर, 2016 : दसॉ ऐविएशन की अनुअल रिपोर्ट से पता चला कि 36 राफेल विमानों की वास्तविक कीमत करीब 60,000 करोड़ रुपये है। यह सरकार द्वारा संसद में बताई गई कीमत से दोगुने से ज्यादा है। 
13 मार्च, 2018 : फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीदी संबंधी केन्द्र के फैसले की स्वतंत्र जांच और संसद के समक्ष सौदे की कीमत का खुलासा करने का अनुरोध करते हुए एक पीआईएल सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई। 
5 सितंबर, 2018 : राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर दायर पीआईएल पर सुनवाई के लिए न्यायालय ने हामी भरी। 
18 सितंबर, 2018 : सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 10 अक्टूबर तक स्थगित की। 
8 अक्टूबर, 2018 : सुप्रीम कोर्ट ने 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के समझौते से जुड़ी जानकारियां ‘सीलबंद लिफाफे’ में मुहैया कराने का निर्देश केन्द्र को देने संबंधी नई पीआईएल पर भी 10 अक्टूबर को सुनवाई करने की बात कही। 
10 अक्टूबर, 2018 : सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से कहा कि वह राफेल सौदे पर निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी सीलबंद लिफाफे में मुहैया कराए। 
24 अक्टूबर, 2018 : पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा,अरुण शौरी और वकील प्रशांत भूषण भी न्यायालय पहुंचे, राफेल लड़ाकू विमान सौदा मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई। 
31 अक्टूबर, 2018 : सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से कहा कि वह 36 राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत से जुड़ी जानकारी उसे सीलबंद लिफाफे में सौंपे। 
12 नवंबर, 2018 : केंद्र ने 36 राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत से जुड़ी जानकारी सीलबंद लिफाफे में न्यायालय को सौंपी। उसने राफेल सौदे की प्रक्रिया संबंधी जानकारी भी सौंपी। 
14 नवंबर, 2018 : न्यायालय ने राफेल सौदे की जांच अदालत की निगरानी में कराने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी की। 
14 दिसंबर, 2018 : राफेल सौदा पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को क्लीन चिट दी। सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीदी के मामले में नरेंद्र मोदी सरकार को शुक्रवार को क्लीन चिट देते हुए सौदे में कथित अनियमितताओं के लिए सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।

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