देवेंद्र सिंह मामले में राहुल गांधी ने फिर बोला मोदी सरकार पर हमला, कहा- केस दबाने की कोशिश

FirstIndia Correspondent Published Date 2020/01/17 12:26

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर से आतंकियों के साथ गिरफ्तार किए गए डीएसपी देविंदर सिंह को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज ट्वीट कर इस मसले पर मोदी सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है. राहुल गांधी ने लिखा कि देवेंद्र सिंह को चुप करने का सबसे बेहतरीन तरीका यही है कि उसे नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के हवाले कर दें. राहुल ने ट्वीट में एनआई मुखिया पर भी सवाल खड़े किए हैं.

NIA की अगुवाई भी एक और मोदी ही कर रहा: 
अपने ट्वीट में राहुल गांधी ने लिखा कि NIA की अगुवाई भी एक और मोदी ही कर रहा है. वाईके मोदी जिसने गुजरात दंगे और हरेन पंड्या मामले की जांच की थी. वाईके की अगुवाई में ये केस उसी तरह है मानो पूरी तरह से दब गया है. वाई के की देखरेख में भी इस केस में कोई नतीजा आने की उम्मीद नहीं है. साथ ही राहुल गांधी ने पूछा है कि डीएसपी दविंदर सिंह का मुंह कौन बंद करना चाहता है?

पीएम मोदी और अमित शाह चुप क्यों?
वहीं इस मामले में कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल की कथित ‘‘खामोशी’’ को लेकर राहुल गांधी ने सवाल किया और कहा कि दविंदर सिंह के खिलाफ त्वरित अदालत में मुकदमा चलना चाहिए और दोषी पाए जाने पर उसे कड़ी सजा दी जानी चाहिए.

राहुल गांधी ने यह सवाल भी किया कि दविंदर सिंह की पुलवामा हमले में क्या भूमिका थी और उसे किसका संरक्षण मिल रहा था? उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘डीएसपी दविंदर सिंह ने अपने घर पर तीन ऐसे आतंकवादियों को अपने घर पर पनाह दी और उन्हें दिल्ली ले जाते हुए पकड़ा गया जिनके हाथ में भारतीय नागरिकों का खून लगा है.’’

दो आतंकियों के साथ किया था गिरफ्तार:
बता दें कि बीते दिनों जम्मू-कश्मीर के कुलगाम से डीएसपी देवेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया था. उसके साथ दो आतंकी भी गिरफ्तार किए गए थे, जो कि नई दिल्ली में बड़े धमाका करने की साजिश रच रहे थे. देवेंद्र सिंह की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा पर कई तरीके के सवाल खड़े हुए, बाद में एक्शन लेते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने देवेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर दिया. इसके अलावा पूर्व पुलिसकर्मी को जो अवॉर्ड दिए गए थे, उन पुरस्कारों को भी वापस ले लिया गया था.


 

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