जयपुर Rajasthan: कोरोना से पहले की स्थिति में नहीं पहुंचा एविएशन, अभी प्रदेश के सभी एयरपोर्ट पर स्थितियां बदहाल

Rajasthan: कोरोना से पहले की स्थिति में नहीं पहुंचा एविएशन, अभी प्रदेश के सभी एयरपोर्ट पर स्थितियां बदहाल

जयपुर: पर्यटन के लिहाज से राजस्थान पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है. केवल जयपुर ही नहीं, जैसलमेर, उदयपुर शहर भी पर्यटकों के बीच खासे लोकप्रिय हैं. लेकिन फिर भी प्रदेश में विमानन क्षेत्र पड़ौसी राज्य गुजरात की तुलना में पिछड़ा हुआ दिखता है. कोरोना की दूसरी लहर के बाद विमानन क्षेत्र उबर रहा है, लेकिन वास्तव में प्रदेश के शहरों में हवाई सेवा की संभावनाएं काफी ज्यादा हैं. 

यूं तो कोरोना महामारी का असर वैश्विक रहा है और लगभग सभी क्षेत्रों में इसकी वजह से मंदी जैसे हालात रहे हैं. लेकिन विमानन क्षेत्र पर इसका काफी नकारात्मक असर रहा है. पिछले साल कोरोना की पहली लहर के बाद इस साल जनवरी, फरवरी में हवाई यात्रा गति पकड़ने लगी थी, लेकिन मार्च आते-आते कोरोना की दूसरी लहर के चलते एक बार फिर यात्रीभार में गिरावट आने लगी. मई माह के दौरान तो फ्लाइट संचालन और यात्रीभार की संख्या अत्यधिक कम हो गई. हालात यह हो गए कोरोना से पहले जिस जयपुर एयरपोर्ट से रोज 63 फ्लाइट चलती थीं, वहां से मई 2021 में रोज मात्र 4 से 5 फ्लाइट ही उड़ान भर रही थीं. 

दूसरी लहर के बाद अब फ्लाइट संचालन की संख्या और यात्रीभार में सुधार देखा जा रहा है. जयपुर एयरपोर्ट के साथ ही प्रदेश के दूसरे एयरपोर्ट पर भी हालात सुधरते दिख रहे हैं. लेकिन कोरोना से पहले की स्थिति के बारे में तुलना करें तो विमानन क्षेत्र काफी पिछड़ा दिखाई देता है. दरअसल कोरोना की वजह से आई आर्थिक मंदी की वजह से न केवल पर्यटन कम हुआ है, बल्कि बिजनेस के लिए यात्रा करने वालों की संख्या में भी गिरावट आई है. आईए अब आपको बताते हैं कि प्रदेश के सभी 6 एयरपोर्ट, जहां से कोरोना से पहले क्या हालात थे और वर्तमान में कितना हवाई सेवाओं का संचालन हो रहा है. साथ ही यह भी कि प्रदेश के इन एयरपोर्ट्स से फ्लाइट संचालन और यात्रीभार की कितनी संभावनाएं हैं. 

जयपुर एयरपोर्ट:- 
कोरोना से पहले फरवरी 2020 में रोज औसत फ्लाइट : 63
फरवरी 2020 में औसत यात्रीभार : 16275
अभी रोज औसत फ्लाइट संचालन : 32
अभी रोज औसत यात्रीभार : 7100
संभावना कितनी- रोज 100 फ्लाइट का संचालन संभव
30 हजार यात्रियों के आवागमन की संभावनाएं
-----------------------------
उदयपुर एयरपोर्ट:-
कोरोना से पहले फरवरी 2020 में रोज औसत फ्लाइट : 20
फरवरी 2020 में औसत यात्रीभार : 4803
अभी रोज औसत फ्लाइट संचालन : 7
अभी रोज औसत यात्रीभार : 1650
संभावना कितनी- रोज 40 फ्लाइट, 12 हजार यात्री
-------------------------------
जोधपुर एयरपोर्ट:- 
कोरोना से पहले फरवरी 2020 में रोज औसत फ्लाइट : 12
फरवरी 2020 में औसत यात्रीभार : 3212
अभी रोज औसत फ्लाइट संचालन : 5
अभी रोज औसत यात्रीभार : 1550
संभावना कितनी- रोज 30 फ्लाइट, 8000 यात्री
------------------------------
जैसलमेर एयरपोर्ट:- 
कोरोना से पहले फरवरी 2020 में रोज औसत फ्लाइट : 6
फरवरी 2020 में औसत यात्रीभार : 948
अभी रोज औसत फ्लाइट संचालन : 1
अभी रोज औसत यात्रीभार : 90
संभावना कितनी- रोज 15 फ्लाइट, 4 हजार यात्री
------------------------------
किशनगढ़ एयरपोर्ट:- 
कोरोना से पहले फरवरी 2020 में रोज औसत फ्लाइट : 3.2
फरवरी 2020 में औसत यात्रीभार : 432
अभी रोज औसत फ्लाइट संचालन : 3.8
अभी रोज औसत यात्रीभार : 440
संभावना कितनी- रोज 12 फ्लाइट, 3500 यात्री
------------------------------
बीकानेर एयरपोर्ट:- 
कोरोना से पहले फरवरी 2020 में रोज औसत फ्लाइट : 1.07
फरवरी 2020 में औसत यात्रीभार : 122
अभी रोज औसत फ्लाइट संचालन : 0.42 (सप्ताह में केवल 3 दिन एक फ्लाइट संचालित)
अभी रोज औसत यात्रीभार : 40
संभावना कितनी- रोज 6 फ्लाइट, 1500 यात्री

प्रदेश में हवाई सेवाओं की स्थिति इसलिए भी बदहाल है, क्योंकि यहां के जनप्रतिनिधि आमजन की आवाज को केन्द्र सरकार के समक्ष नहीं उठाते. प्रदेश में कोटा एयरपोर्ट के संचालन के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला प्रयासरत हैं और वे पूर्व केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी और मौजूदा केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात करते हैं और इसकी प्रगति को लेकर सावचेत रहते हैं. लेकिन अन्य एयरपोर्ट्स पर इस तरह के सार्थक प्रयास नजर नहीं आते. हालात तो यह हैं कि जैसलमेर एयरपोर्ट से जब स्पाइसजेट ने कम यात्रीभार के चलते फ्लाइट बंद करने की बात कही तो वहां के व्यापारियों व अन्य सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर एयरलाइन के खर्चे की मासिक पूर्ति करने का आश्वासन दिया. एक समझौते के आधार पर जैसलमेर से दिल्ली के लिए फ्लाइट का संचालन चलता रहा. प्रदेश के जोधपुर और किशनगढ़ जैसे एयरपोर्ट तो कुछ बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए भी जनप्रतिनिधियों का मुंह ताक रहे हैं.

किस तरह की समस्याएं आ रहीं एयरपोर्ट्स पर:-
- जोधपुर एयरपोर्ट के फ्लाइट विस्तार में अड़चन 
- एक समय पर केवल 2 फ्लाइट्स का ही संचालन संभव
- एयरपोर्ट पर फिलहाल बड़े विमानों के लिए केवल 2 पार्किंग वे
- 4 नए बने पार्किंग वे लाइट की मंजूरी के इंतजार में अटके
- इसी कारण एयरलाइन्स भी अक्सर पीछे हट जाती फ्लाइट शुरू करने से
----------------
- किशनगढ़ एयरपोर्ट रनवे का विस्तार नहीं हो पाने से समस्या
- रनवे संख्या 23 के दोनों तरफ ऊंची पहाड़ी हैं, जो खतरा हैं
- पहाड़ियों से होकर 150 मीटर का कटाव कर विस्तार हो सकेगा
- दूसरी तरफ के रनवे 05 की तरफ प्रसार भारती का टॉवर बना हुआ है
- ये टॉवर निर्धारित ऊंचाई से करीब 71 मीटर ज्यादा है
- रनवे के विस्तार के लिए दोनों तरफ की बाधाओं को दूर करना जरूरी
- तभी किशनगढ़ एयरपोर्ट पर 180 सीटर एयरबस 320 या बोइंग विमान उतर सकेंगे
- अभी केवल 90 सीट क्षमता तक के क्यू-400 या एटीआर-72 विमान उतर पाते हैं

कुलमिलाकर जरूरत इस बात की है कि प्रदेश के सांसद और राज्य सरकार इन एयरपोर्ट्स के विकास पर फोकस करें. एयरपोर्ट्स से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने के साथ ही एयरलाइंस के साथ मीटिंग कर उन्हें प्रदेश के शहरों के लिए हवाई सेवा शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करें. व्यापारियों व सामाजिक संगठनों से वार्ता कर हवाई यात्रा के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है. साथ ही रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम यानी उडान योजना के तहत नई फ्लाइट लाने के लिए भी केन्द्र सरकार के समक्ष पहल की जा सकती है.

...काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

और पढ़ें