Rajasthan: आधे साल में आधे लोगों को भी नहीं 'कोविड सुरक्षा डोज', वैक्सीन की कमी के चलते अभियान नहीं पकड़ पा रहा तेजी

Rajasthan: आधे साल में आधे लोगों को भी नहीं 'कोविड सुरक्षा डोज', वैक्सीन की कमी के चलते अभियान नहीं पकड़ पा रहा तेजी

जयपुर: राजस्थान समेत देशभर में एक तरफ जहां कोरोना की थर्ड लहर की आशंका बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर कोविड के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच मानी जा रही "वैक्सीनेशन" की प्रक्रिया कछुआ चाल चल रही है. वैक्सीन की कमी के चलते अभी तक राजस्थान में तय लक्ष्य के मुकाबले आधे लोगों को भी कोरोना की पहली डोज नहीं लगी है. जबकि विशेषज्ञों की माने तो जब तक 80 से 90 फीसदी लोग वेक्सीनेट नहीं होंगे, संक्रमण का खतरा बरकरार रहेगा. ऐसे में चर्चा ये शुरू हो गई है कि ये ही हालात रहे तो वैक्सीनेट हो चुके लोगों को बूस्टर डोज कैसे लगेगी.

राजस्थान समेत देशभर में जनवरी से कोरोना वैक्सीनेशन महाअभियान की शुरूआत हुई, तो सभी राज्यों ने अपने-अपने हिसाब से बेनिफिशरी चिन्हित की. राजस्थान में 18 वर्ष के अधिक उम्र के 5 करोड़ 14 लाख लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया है. लेकिन अभी तक 2 करोड़ 56 लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन की पहली डोज लग पायी है. जबकि 78 लाख 16 हजार लोगों को कोरोना की दोनों डोज लग चुकी है. चिकित्सा विभाग के आंकड़ों को देखे तो राज्य में अभी करीब 30 लाख लोगों को अपनी सेकंड डोज का इंतजार है. लेकिन पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन नहीं मिलने के चलते लोगों को अभी तक दूसरी डोज नहीं लग पा रही है. 

- रूटीन डोज का इंतजार, फिर कैसे लगेगी बूस्टर डोज ?
- कोरोना वैक्सीन के टोटे का साइड इफेक्ट !
- राजस्थान में 5.19 करोड़ लोग है कोविड वैक्सीन के बेनीफिशरी
- हेल्थ केयर श्रेणी में 5,88,779 लाभार्थी, इसमें से 94 फीसदी को पहली डोज, जबकि 77 फीसदी को दोनों डोज लगी
- फ्रंट लाइन श्रेणी में 5,89,908 लाभार्थी, इसमें से 118 फीसदी को पहली डोज, जबकि 71 फीसदी को दोनों डोज लगी
- 18 से 44 साल श्रेणी में 3,41,44,400 लाभार्थी, इसमें से 30 फीसदी को पहली डोज, जबकि 7 फीसदी को दोनों डोज लगी
- 45 से 59 साल  श्रेणी में 1,05,18,002 लाभार्थी, इसमें से 65 फीसदी को पहली डोज, जबकि 38 फीसदी को दोनों डोज लगी
- 60+ श्रेणी में 68,33,000 लाभार्थी, इसमें से 88 फीसदी को पहली डोज, जबकि 47 फीसदी को दोनों डोज लगी

आश्चर्य की बात ये है कि राजस्थान में एक दिन में 15 लाख लोगों को वैक्सीन डोज लगाने की क्षमता उपलब्ध है लेकिन वैक्सीन की खेप ही बहुत कम राज्य को मिल रही है. यही वजह है कि अभी तक पहली डोज के लिए 50 फीसदी का लक्ष्य भी हासिल नहीं किया गया है. उधर, इस धीमी रफ्तार के बीच सबसे बड़ी चिंता ये है कि ICMR कह चुका है कि जिन लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है उन्हें 9 महीने या 1 साल के बाद बूस्टर डोज लगवानी पड़ सकती है. नहीं तो शरीर में बनने वाले एंटीबॉडी खत्म हो सकते है. लेकिन राजस्थान में मौजदा हालात की बात करें तो ऐसी उम्मीद कम ही नजर आ रही है. क्योंकि जिस मात्रा में केंद्र से राज्य को वैक्सीन मिल रही है उस हिसाब से बूस्टर डोज की संभावना भी नजर नहीं आ रही. 

अशोक गहलोत कोरोना की थर्ड लहर को लेकर काफी चिंतित:
सूबे के सीएम अशोक गहलोत कोरोना की थर्ड लहर को लेकर काफी चिंतित है. गहलोत के निर्देशन में चिकित्सा विभाग ने दूसरी लहर के कटूअनुभवों को देखते हुए थर्ड लहर से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है. लेकिन खुद गहलोत वैक्सीन की किल्लत को लेकर चिंता में है. उन्होंने केन्द्र को कई पत्र लिखकर राजस्थान की तैयारियों के बारे में बताया है कि हमारे यहां प्रतिदिन 15 लाख टीके लगाने की व्यवस्था है लेकिन दो से तीन लाख वैक्सीन ही केंद्र की ओर से उपलब्ध करवाई जा रही है. अगर केंद्र की ओर से पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध करा दी जाए तो जल्द से जल्द राजस्थान को शत प्रतिशत वैक्सीनेशन कर दिया जाए. ऐसे में उम्मीद है कि राजस्थान के बेनिफिशरी की संख्या और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए वैक्सीन आवंटन में केन्द्र प्राथमिकता देगा.

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