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25 मार्च से मरुधरा की जीवनदायिनी इंदिरा गांधी नहर में नहीं आएगा पानी, इस साल 70 दिन के लिए नहरबंदी

25 मार्च से मरुधरा की जीवनदायिनी इंदिरा गांधी नहर में नहीं आएगा पानी, इस साल 70 दिन के लिए नहरबंदी

जैसलमेर: मरुधरा की जीवनदायनी कहे जाने वाली इंदिरा गांधी कुछ दिनों के सूखने वाली है. जी हां, जैसलमेर मे हर साल की भाति गर्मियों में नहरबंदी होने वाली है. नहरबंदी को लेकर अभी से हाहाकार मच गया है. इस बार 70 दिन की नहरबंदी को सुनकर हर कोई परेशान है. चाहे जलदाय विभाग हो या फिर आमजनता. पंजाब के फीडर से लगाकर राजस्थान में एंट्री तक इस बार नहर में मेंटिनेंस किया जाना है. इस बार 70 दिनों तक नहर बंद रखी जाएगी. नहरबंदी तो 70 दिन है, लेकिन शुरुआत के 40 दिन तक पीने का पानी मिलता रहेगा. सिंचाई के लिए पानी बंद रहेगा. शेष 30 दिन पूरी तरह से नहर बंद रहेगी. 

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जलदाय विभाग को कंटिंजेंसी प्लान भी बनाने के निर्देश दिए: 
नहरबंदी को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है. स्थानीय स्तर के साथ जयपुर में भी बैठकें हो रही है. पानी के स्टोरेज के लिए दिशानिर्देश दिए गए हैं साथ ही जलदाय विभाग को कंटिंजेंसी प्लान भी बनाने के निर्देश दिए गए हैं. नहरबंदी के चलते पेयजल संकट हर बार रहता है. वही जिला कलक्टर नमित मेहता ने आमजन से अपील की है की अपने आस पास हेंड पम्प खराब है या पानी की परेशानी है जिसकी सुचना देवे. जिला कलक्टर ने कहा की नहरबंदी के पहले पानी का स्टोरेज कर देवे वही व्यर्थ पानी न बहावे. किसानों से अपील कर नहरों में पीने के लिए दिए जाने वाले पानी का उपयोग केवल पीने के लिए ही करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने नहर में पीने के पानी का सिंचाई के लिए उपयोग नहीं करने तथा नहरबंदी से पहले पीने के पानी की व्यवस्था के लिए अपनी डिग्गियों व कुंड में पर्याप्त भंडारण करने की बात भी कही है. इसके साथ ही उन्होंने जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग से अपील की है कि वे आगामी नहरबंदी से पहले पीने के पानी की समुचित व्यवस्था जल भंडारण करें, ताकि पीने के पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़े. 

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हर बार नहरबंदी में पेयजल संकट गहरा जाता है:
जलदाय विभाग स्टोरेज के बड़े बड़े दावे तो करता है लेकिन पर्याप्त स्टोरेज नहीं होने से हर बार नहरबंदी में पेयजल संकट गहरा जाता है. शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों व पशुओं के लिए नहरबंदी मुश्किल खड़ी कर सकती है. इस बार भी यही हालात है, नए सिरे से कोई योजना नहीं है और लगभग तय माना जा रहा है कि पेयजल से जूझना ही पड़ेगा. अब इस मामले में अधिकारियों के समक्ष दिक्कत यह रहेगी कि शुरुआती 40 दिन मिलने वाली पीने के पानी की सिंचाई के लिए चोरी हो सकती है. आमतौर पर नहर में पानी चोरी के मामले बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे में विभाग के सामने नहरबंदी के दौरान आने वाले पीने के पानी की चोरी रोकने की चुनौती रहेगी.  
 

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