पटरी पर लौट रही रेल ! राजस्थान की 550 में से 440 ट्रेनें अब दौड़ने लगी

पटरी पर लौट रही रेल ! राजस्थान की 550 में से 440 ट्रेनें अब दौड़ने लगी

पटरी पर लौट रही रेल ! राजस्थान की 550 में से 440 ट्रेनें अब दौड़ने लगी

जयपुर: देश में कोरोना की दूसरी लहर का असर अब धीरे-धीरे कम होने लगा है. लगातार कोरोना के मामले घट रहे हैं और देश के अधिकांश राज्य अनलॉक हो रहे हैं. ऐसे में रेलवे भी कोरोना के चलते बंद की गई ट्रेनों को फिर से शुरू कर रहा है. जानिए, राजस्थान से जुड़ी ट्रेनों की क्या है स्थिति और कोविड से बचाव के लिए क्या हैं रेलवे के इंतजाम, एक खास रिपोर्ट...

कोरोना की दूसरी लहर से पहले करीब 7100 स्टेशनों के लिए दौड़ रहीं 12 हजार से अधिक ट्रेनों में से 70 फीसदी ट्रेनें शुरू कर दी गई हैं. उत्तर-पश्चिम रेलवे के जयपुर, अजमेर, बीकानेर और जोधपुर मंडलों के विभिन्न शहरों से गुजरने वाली 550 ट्रेनों में से 80 फीसदी यानी 440 ट्रेनें फिर से शुरू कर दी गई हैं. जयपुर की 130 में से भी 92 ट्रेनें अब फिर से पटरियों पर दौड़ने लगी हैं. हालांकि इस बार लोगों की यात्रा का उद्देश्य बदल गया है. अब लोग जरूरी होने पर ही लंबी दूरी की यात्रा कर रहे हैं. पहले पर्यटन स्थलों की सैर करने के लिए लोग ट्रेनों का रुख करते थे. लेकिन अब लोग निजी वाहनों से सफर करना ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. जयपुर से जुड़ी लंबी दूरी की ट्रेनों में नजदीकी शहरों की यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या अधिक है. जयपुर से प्रयागराज स्पेशल, बॉम्बे सुपर जैसी ट्रेनों में एक तरफ जहां एसी क्लास में औसतन 30 फीसदी यात्रीभार आ रहा है. वहीं स्लीपर और सैकंड सिटिंग में यह आंकड़ा 135 से 165 फीसदी तक है. इसी के चलते अपर क्लास में यात्रीभार पहले से तो बढ़ा आता है, लेकिन कुल आय कम होती है. 

ट्रेनों में कोरोना से बचाव कैसे ?
- रेलवे कोच के अंदर टॉयलेट और गैलरी में बने नल, सोप डिस्पेंसर और फ्लश अब पैर से ऑपरेट होंगे.
- इन्हें काम में लेने के लिए यात्री को हाथ का उपयोग नहीं करना होगा.
- यानी टॉयलेट का उपयोग करने के बाद पैर से फ्लश दबाकर उसे साफ किया जा सकता है.
- वहीं गेट पर बने हैंडल पर कॉपर की कोटिंग की जा रही.
- कॉपर सरफेस पर वायरस अधिक देर तक सरवाइव नहीं करता.
- जल्द ही एसी कोच में लगे एसी डक्ट में प्लाज्मा एयर इक्यूपमेंट लगाया गया.
- यह हवा को सैनेटाइज करके कोच को ठंडा करेगा.
- कोच के अंदर और बर्थ पर टाइटेनियम डाइऑक्साइड की कोटिंग की गई.
- वायरस को खत्म करने के लिए अल्ट्रा वॉयलेट सैनेटाइजर मशीन का प्रोटोटाइप डिजाइन किया गया.
- इससे कोच की सफाई होने के बाद बचे हुए वायरस को खत्म किया जाएगा.
- UV रेज इंसान के लिए हानिकारक, इसलिए रोबोटिक तकनीक से ऑपरेट किया जाएगा.

विशेषज्ञों के मुताबिक रेलवे बोर्ड अब एसी कोच का उत्पादन बढ़ाने को लेकर पॉलिसी बना रहा है. इसके साथ ही नॉन एसी कोच का उत्पादन भी कम किया जाएगा. आने वाले करीब 5 साल बाद एसी कोच का पर्याप्त संख्या में उत्पादन होने के बाद ट्रेनों से स्लीपर, सैकंड सीटिंग और सामान्य कोच काफी कम किए जाएंगे. रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2023 तक 109 रूट पर प्रस्तावित करीब 150 निजी ट्रेनों में नॉन एसी कोच लगाए ही नहीं जाएंगे. यानी पूरी ट्रेन एसी कोच से ही संचालित की जाएगी. दूसरी लहर के बाद एसी कोच में सफर कर रहे यात्री कोच की सफाई होने बाद भी सीट पर बैठने से पहले उसे अच्छे से सैनेटाइज कर ही उस पर बैठते हैं. कुलमिलाकर आने वाले समय में जब ट्रेन संचालन पूरी तरह सामान्य होने लगेगा, तब भी कोरोना से बचाव के लिए रेलवे के उपाय और अधिक बेहतर हो सकेंगे.

...काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

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