जयपुर VIDEO: राजस्थान विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव, वो पुराने छात्र नेता चर्चा में, जिन्हें नहीं मिला अवसर सांसद- विधायक बनने का

VIDEO: राजस्थान विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव, वो पुराने छात्र नेता चर्चा में, जिन्हें नहीं मिला अवसर सांसद- विधायक बनने का

जयपुर: राजस्थान विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव की राजनीति से निकलकर कई नेता आज सांसद, विधायक और मंत्री है, साथ ही अन्य दलों में प्रमुख पदों पर सियासी तौर पर स्थापित है . इसके बावजूद कई नेता ऐसे भी हैं जिन्होंने छात्र राजनीति से लेकर राजनीति में अपना मुकाम बनाया लेकिन अभी भी लोकसभा और विधानसभा की दहलीज तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं . हम उनके नाम ले रहे जिन्हें उनकी पार्टी ने टिकट ही नहीं दिया .

छात्र संघ चुनाव की सरगर्मियां तेज है इन्हीं सरगर्मियों की सियासत के बीच बरबस वो चेहरे याद आ जाते है जो छात्र राजनीति से चमके ,चमक बिखेरी लेकिन संसद और विधानसभा तक पहुंच नहीं पाए . 90 के दौर की वक्त की बात है राजस्थान विश्वविद्यालय छात्र संघ की राजनीति का एक चमकता चेहरा थे प्रणवेंद्र शर्मा, जिन्हें चुनाव लडाने की उनकी पार्टी बीजेपी ने पूरी तैयारी कर ली थी, चुनावी क्षेत्र भी तलाश लिया गया, विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष पद पर रहते हुए प्रणवेंद्र शर्मा ने अपनी लीडरशिप की चमक और वाणी के ओज के कारण जयपुर से दिल्ली तक पहचान बना ली थी विद्यार्थी परिषद से निकला ये छात्र नेता उस दौर का लोकप्रिय युवा चेहरा हुआ करता था अटल, आडवाणी से लेकर भैरो सिंह तक उन्हें चुनाव लड़ना चाहते थे ,मगर किस्मत ने साथ नहीं दिया और आज तक विधायक या सांसद दोनों का ही चुनाव नहीं लड़ पाए. 

प्रणवेंद्र ही नहीं उनके भाई सोमेंद्र शर्मा के साथ भी ये संयोग रहा ,तेज तर्रार सोमेंद्र भी RU छात्र संघ के अध्यक्ष रहे थे कांग्रेस में आकर टिकट मांगा नहीं मिला ,ये जरूर है कि आज उनकी पत्नी अर्चना शर्मा स्थापित कांग्रेस नेता और चुनाव भी लड़ चुकी.अखिल शुक्ला भी ऐसा ही नाम था RU छात्र संघ के अध्यक्ष के तौर पर चर्चित रहे ,नेताओं के लिए रक्त दान कैंप लगाने की शुरुआत उन्होंने ही की थी ,भैरों सिंह शेखावत जब तक जीए शुक्ला ने उनके लिए रक्त दान शिविर लगवाए ,शेखावत ने भी चाहा शुक्ला चुनाव लडे लेकिन आज तक ऐसा हो नहीं पाया.

कांग्रेस के चेहरे नगेंद्र सिंह शेखावत का भी किस्मत ने साथ नहीं दिया , विश्विद्यालय में मेधावी छात्र की उनकी छवि रही NSUI ने टिकट दिया और वे RU छात्र संघ के अध्यक्ष बन गए.लेकिन कांग्रेस के टिकट से आज तक महरूम. जितेंद्र मीना भी ऐसा ही नाम , RU छात्र संघ अध्यक्ष रहे बीजेपी के बड़े चेहरे लेकिन आज तक बीजेपी ने टिकट नहीं दिया. आपको ऐसे नाम बताते है जिन्होंने चुनाव लडे हारे या जीते लेकिन लोकसभा और विधानसभा का टिकट नहीं मिला.लेकिन लड़ चुके यूनिवर्सिटी का चुनाव ,कुछ ऐसे जो चर्चित रहे छात्र सियासत में.

छात्र राजनीति के वो चेहरे जो बीजेपी के अंदर टिकट के लिए संघर्षरत:
- अखिल शुक्ला - सांगानेर
-- पुनीत कर्णावट , उप महापौर जयपुर ग्रेटर -
मालवीयनगर से टिकट चाह रहे
--जितेंद्र श्रीमाली रह चुके RU छात्र संघ अध्यक्ष
अभी जयपुर ग्रेटर में बीजेपी के पार्षद,मालवीयनगर से दावा
-जितेन्द्र मीणा - बस्सी
- मनीष पारीक - किशनपोल
- श्रवण सिंह बगड़ी ,प्रदेश मंत्री बीजेपी  - झोटवाड़ा
- महेंद्र सिंह शेखावत- विराटनगर
-एकता अग्रवाल - मालवीय नगर
-कानाराम जाट - मालपुरा
-अमित शर्मा - सांगानेर
-अंकित धायल - झुंझुनू
-पवन यादव - मुंडावर
-अखिलेश पारीक - हवामहल
-अमित शर्मा - सांगानेर
-अजय मीणा - बस्सी
-जितेन्द्र मीणा - बस्सी
-राजेश मीणा - जमवारमगढ़
-पूजा कपिल - अलवर
-शंकर गोरा - चौमूं
- डीडी कुमावत - फुलेरा
-हिमांशु शर्मा - सांगानेर
- जेपी यादव - शाहपुरा
-अमित बड़बड़वाल - शाहपुरा
-राजेश गुर्जर - नसीराबाद
-विमल अग्रवाल - हवामहल
-मिथलेश गौतम - केकड़ी
- अजय पारीक - आदर्श नगर
- भारत शर्मा - किशनपोल

छात्र राजनीति के वो चेहरे जो कांग्रेस के अंदर टिकट के लिए संघर्षरत:
खानू खान बुधवाली - चूरू
जसवंत गुर्जर,पीसीसी सचिव - विराटनगर
नगेंद्र सिंह शेखावत - विद्याधरनगर
सतवीर चौधरी - मालपूरा
अनिल चोपड़ा - सांगानेर
सीताराम लांबा - दातारामगढ़
अभिषेक चौधरी - फलोदी
राजपाल शर्मा - मालवीय नगर
पवन गोदारा - हनुमानगढ़
नरेश मीणा - किशनगंज
राकेश मीणा - बस्सी
ललित यादव - मुंडावर
नरसी किराड़ -कठूमर 
बालेंदु सिंह शेखावत - श्री माधोपुर
कुलदीप सिंह राजावत -देवली उनियारा

राजस्थान विश्वविद्यालय छात्र संघ की राजनीति में वो चेहरे हमेशा चर्चा में रहे हैं जिन्होंने जन प्रतिनिधि के तौर पर अपना मुकाम बना लिया . लेकिन इसी विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति की कोख से निकले कई ऐसे चेहरे भी रहे जिन्होंने छात्र संघ की राजनीति में वर्चस्व स्थापित , छात्र संघ के अध्यक्ष और महासचिव रहे मगर अभी उन्हें इंतजार है सांसद और विधायक बनने का इनमें कुछ ऐसे भी हैं. जो चुनाव लड़ कर छात्र संघ के पदाधिकारी बन गए कुछ ऐसे भी हैं जो चुनाव हार कर भी विभिन्न राजनीतिक दलों में सक्रिय है और कुछ ऐसे भी हैं जो चुनाव नहीं लड़ पाए लेकिन राजनीति में अपना वजूद रखते है. ये जरूर है कि इनमें कई चेहरे ऐसे भी है जिन्हें अपनों दलों की सरकारों में विभिन्न बोर्ड निगम अध्यक्ष और अन्य पदों पर आने का अवसर मिला,इनमे प्रमुख वक्फ बोर्ड चेयरमैन खानू खान बुधवाली,सीताराम लांबा आज यूथ बोर्ड अध्यक्ष,RU छात्र संघ महासचिव रह चुके पवन गोदारा को ओबीसी आयोग अध्यक्ष,मनीष कुमार शर्मा को अहिंसा निदेशालय का चेयरमैन जैसे पद प्राप्त हुए . विश्वविद्यालय कैंपस में चमके यह सितारे अब इंतजार में है कि कब उनकी वो राजनीतिक मुराद पूरी हो जिसकी वर्षों से तलाश है.

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