एक बार फिर टला राममंदिर की सुनवाई का फैसला, संतों में आक्रोश

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/28 11:04

अयोध्या। लंबे समय से राजनीति में तख्तापलट करने वाले अयोध्या राममंदिर विवाद की सुनवाई का फैसला एक बार फिर टल गया है। इस मामले में 29 जनवरी को सुनवाई होनी थी लेकिन जस्टिस बोबडे की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई एक बार फिर टल गई। मामला एक बार फिर आगे बढ़ने से संत समाज में रोष है। कई संतों का कहना है कि इस प्रकार की देरी से हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा रही है।

मालूम हो, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने राम मंदिर मसले को सुनने के लिए पांच जजों की पीठ का गठन किया था। इसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस अब्दुल नजीर, जस्टिस एस. ए. बोबडे और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल हैं। सुनवाई 29 जनवरी को होनी थी, लेकिन अंतिम समय में जस्टिस बोबडे के छुट्टी पर चले जाने से सुनवाई टल गई।

बतादें,संतों का कहना है कि  जिसपर संतों का आशीर्वाद होगा, वही व्यक्ति ही सत्ता पर विराजमान होगा। संतों के मुताबिक, अब चाणक्य नीति के अनुसार नए राजा का चयन होगा, जो राम मंदिर का निर्माण करेगा। दरअसल, मामले में इससे पहले 10 जनवरी को सुनवाई होनी थी, लेकिन बाबरी मस्जिद के वकील द्वारा पीठ पर सवाल खड़े किए गए। जिसके बाद जस्टिस यूयू ललित ने खुद को मामले से अलग किया और चीफ जस्टिस को नई बेंच का गठन करना पड़ा।
 

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