VIDEO: सदन में 'संघ' को लेकर हंगामा, विधायक संयम लोढ़ा ने उठाया मीसा बंदियों का मामला

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/08 08:38

जयपुर: राहुल गांधी अक्सर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर हमला करते रहे हैं. आज राजस्थान की विधानसभा में एक निर्दलीय विधायक ने उनके सुर में सुर मिलाया. निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने मीसा बंदियों की पेंशन को बंद करने की मांग की और संघ पर जमकर निशाना साधा. लोढ़ा के आरोपों का बीजेपी ने भारी विरोध किया और सदन में जमकर हंगामा देखने को मिला. मंत्री बीडी कल्ला ने सरकार पेंशन के मसले पर पुर्नविचार करेगी. एक खास रिपोर्ट:

मीसा और डीआईआर बंदियों के पेंशन के औचित्य पर सवाल:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बीजेपी का मातृ संगठन कहा जाता है. आरएसएस और कांग्रेस के बीच हमेशा बैर रहा है, यही बैर आज राजस्थान की विधानसभा में हंगामे का कारण बना. मीसा-डीआईआर बंदियों के मुद्दे के मसले पर कांग्रेस और बीजेपी आमने सामने हो गए. स्थगन प्रस्ताव के जरिये निर्दलीय विधायक, जो कभी कांग्रेसी रह चुके संयम लोढ़ा ने मीसा और डीआईआर बंदियों के पेंशन के औचित्य पर सवाल उठाये. लोढ़ा ने सदन में कहा कि आपातकाल सही नहीं हो सकता, लेकिन इंदिरा गांधी को पानी पानी पी-पी कर गलियां देने वालों को आखिर पेंशन क्यों ! लोढ़ा ने आरएसएस के प्रचारकों पर भी निशाना साधा. गौरतलब है कि बीजेपी राज में मीसा बंदियों की पेंशन तय की गई, लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि नाम दिया गया. 

कौन है मीसा - डीआईआर बंदी:
—जनसंघ और संघ पृष्ठभूमि के वो लोग जिन्होंने आपातकाल का विरोध किया था
—इंदिरा सरकार की ओर से लगाये आपातकाल के खिलाफ जेलों में गये थे
—जेपी मूवमेंट में सक्रिय भागीदारी निभाते हुये हिरासत में रहे
—आपातकाल को लोकतंत्र की हत्या करने वाला कानून करार दिया 

बीजेपी सरकार के प्रावधान:
—राजे सरकार के समय का आकलन
—मीसा व डीआईआर बंदियों की प्रदेश में संख्या-1050
—सीआरपीसी में निरुद्ध बंदियों की संख्या-450-500
—पहले इन लोकतंत्र सेनानियों की पेंशन 12500 थी, जो अब बढ़कर 20 हजार हो गई है
—पहले चिकित्सा भत्ता 1250 मिलता था अब इसे बढ़ाकर 4000 कर दिया

गहलोत सरकार कर सकती है मीसा बंदियों की पेंशन को बंद:
संघ के एंजेडे के अनुसार ही बीजेपी की सरकारों के समय मीसा बंदियों को सम्मान के नजरिये से देखा गया. जबकि कांग्रेस सरकार में इनकी सुविधाओं पर अंकुश लगा दिया. एक बार तो पेंशन रोक भी दी गई थी. संयम लोढ़ा की दलीलों पर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला. जलदाय मंत्री बी डी कल्ला ने कहा कि सरकारी स्तर पर पुर्नविचार किया जाएगा. सदन में घटे इस घटनाक्रम के बाद आसार इस बात के बढ़ गये है कि अगले कुछ महिनों में गहलोत सरकार मीसा बंदियों की पेंशन को बंद करने का फैसला कर सकती है. अगली कैबिनेट बैठक में ऐसे फैसले को अमलीजामा पहनाये जाने की संभावना है. 

... संवाददाता ऋतुराज शर्मा, ऐश्वर्य प्रधान, नरेश शर्मा के साथ योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

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