लॉकडाउन के कारण अन्य उद्योगों की तरह प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र के हालात भी अच्छे नहीं

लॉकडाउन के कारण अन्य उद्योगों की तरह प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र के हालात भी अच्छे नहीं

लॉकडाउन के कारण अन्य उद्योगों की तरह प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र के हालात भी अच्छे नहीं

जयपुर: कोरोना महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के कारण अन्य उद्योगों की तरह प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र के हालात भी अच्छे नहीं हैं. पहले से ही मंदी की मार झेल रहे इस क्षेत्र की मुसीबतें लॉकडाउन ने और बढ़ा दी है. सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मामले में गंभीर है, उन्हीं की पहल पर लॉकडाउन से उपजी समस्याओं और उनके निराकरण को लेकर प्रदेश के विकासकर्ताओं ने खुलकर अपनी बात रखी है. 

प्रतिनिधियों ने सरकार से विभिन्न प्रकार की राहत की मांग की:
कोरोना संकट के कारण देशभर में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन लागू हैं. राजस्थान पूरे देश में पहला राज्य है, जिसने सबसे पहले लॉकडाउन लागू किया. इस लॉकडाउन का भविष्य में भी बढ़ाए जाने की पूरी संभावना है. ऐसे में लॉकडाउन के कारण त्रस्त विभिन्न उद्योगों की समस्याएं और उनके निराकरण जानने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित की गई. इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगों से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. इन प्रतिनिधियों ने सरकार से विभिन्न प्रकार की राहत की मांग की. वीसी के दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निर्देश दिए कि वीसी में शामिल उद्योग संगठन विस्तृत तौर पर अपनी मांगों के संबंध में चाहे तो सरकार को ज्ञापन दे सकते हैं. इसी कड़ी में क्रेडाई राजस्थान ने भी एक विस्तृत ज्ञापन राज्य सरकार को सौंप दिया है. क्रेडाई राजस्थान ने जहां विकासकर्ताओं को विभिन्न प्रकार के भुगतान में छूट मांगी है, वहीं बंद पड़े प्रोजेक्ट्स को दुबारा शुरू करने की वकालत भी की है.

इन भुगतानों से मांगी छूट:
- रियल एस्टेट क्षेत्र के श्रमिकों,कामगारों एव कर्मचारियों का लॉकडाउन के दौरान 50 फीसदी वेतन के भुगतान करने की छूट प्रदान की जाए.
- श्रमिक कल्याण कोष में जमा राशि का पचास प्रतिशत विकासकर्ता को दिया जाए ताकि एक्त राशि का संबंधित कामगारों, श्रमिकों एवं कर्मचारियों को भुगतान किया जाए.
- विकासकर्ताओं ने इस राशि के अग्रिम चैक जो श्रम विभाग को दे रखे हैं, उनके भुगतान को बिना ब्याज के न्यूनतम 6 महीनले के लिए स्थगित रखा जाए.
- जिन श्रमिकों के पास राशन कार्ड नहीं हैं,ऐसे श्रमिकों को राशन की दुकानों से राशन सामग्री उपलब्ध कराई.
- मानक निर्मित क्षेत्र से अधिक निर्माण स्वीकृति के पेटे राशि के जो चेक विकासकर्ता की ओर से दिए गए हैं,उनका भुगतान छह महीने के लिए स्थगित किया जाए.
- नगरीय विकास एवं लीजराशि के भुगतान में मौजूदा वित्तीय वर्ष में पूर्ण छूट दी जाए.

क्रेडाई राजस्थान की ओर से बंद पड़े प्रोजेक्ट्स को दुबारा शुरू करने की भी वकालत की गई है. क्रेडाई राजस्थान ने कहा कि विभिन्न शर्तें लागू करते हुए प्रोजेक्ट्स शुरू करने की स्वीकृति दी जाए.

इन शर्तों पर दी जाए प्रोजेक्ट्स स्वीकृति की स्वीकृति:
- जिन औद्योगिक इकाईयों के परिसरों में श्रमिकों के आवास एवं भोजन की समुचित व्यवस्था हो.
- जिन इकाईयों में श्रमिकों के मेडिकल चेकअप की समुचित व्यवस्था हो.
- जो इकाईयां कोरोना से प्रभावित इलाकों में स्थित नहीं हो.
- व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लेखा शाखा के कर्मचारियों को अपने निवास से कार्य स्थल तक आवागमन के लिए पास उपलब्ध कराए जाएं. 
- ताकि श्रमिकों एवं कर्मचारियों के वेतन-भत्तों का भुगतान किया जा सके. 
- रेरा में पंजीकृत प्रोजेक्ट के निर्माण पूरा करने की अवधि को न्यूनतम एक वर्ष के लिए बढ़ाया जाए. 

क्रेडाई राजस्थान की इन मांगों को लेकर राज्य सरकार में मंथन शुरू हो गया है. इसमें कोई संदेह नही कि रोजगार देने के लिहाज से रियल एस्टेट क्षेत्र का अहम योगदान है. इसलिए यह उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही सरकार की ओर इस क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के उपाय किए जाएंगे.
 

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