सपा-बसपा गठबंधन का The END! मायावती के बाद अखिलेश ने तोड़ी चुप्पी

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/04 10:04

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन का भविष्य सोमवार को अनिश्चित हो गया जब बसपा ने संकेत दिया कि वह आगामी विधानसभा उपचुनावों में 11 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने के मूड में है. चूंकि बसपा नेता मायावती पार्टी में पहला और आखिरी शब्द हैं, इसलिए उनकी आधिकारिक चुप्पी ने अटकलों को जोड़ा. 

दिल्ली में माया ने की समीक्षा बैठक
सोमवार को, उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव के परिणाम का विश्लेषण करने के लिए उत्तर प्रदेश के समन्वयकों और पदाधिकारियों के साथ दिल्ली में एक समीक्षा बैठक की. जिसमें पार्टी ने जिन 38 सीटों पर चुनाव लड़ा उनमें से 10 पर जीत हासिल की.

गठबंधन का नहीं हुआ फायदा
हालांकि गठबंधन के भविष्य पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई थी, सूत्रों ने कहा कि  मायावती ने मूल्यांकन रिपोर्ट पेश की थी कि सपा के साथ गठबंधन से पार्टी को बहुत फायदा नहीं हुआ क्योंकि वोटों का हस्तांतरण खराब था, विशेषकर यादव समुदाय के, जो मूल रुप से सपा के वोटर थे, उन्होंने सपा को ही वोट नहीं दिया. अगर ऐसा होता तो पार्टी हारती नहीं.वहीं एक सूत्र ने कहा कि गठबंधन को खारिज करना जल्दबाजी होगी। सूत्र ने कहा, "जब तक दोनों नेता इसे सार्वजनिक रूप से नहीं कहते, तब तक यह कहना जल्दबाजी होगी।"

अखिलेश ने दिए संकेत
जहां एक तरफ दिल्ली में मायावती गठबंधन तोड़ने के संकेत दे रही थीं और वहीं आजमगढ़ में अखिलेश जीत के लिए वोटरों को धन्यवाद दे रहे थे. लेकिन चुनाव नतीजों के बाद पहली बार कैमरे पर आए अखिलेश यादव ने आगे की लड़ाई के लिए नए प्लान पर काम करने की बात कही. उन्होंने कहा कि अब अपना साधन और अपने संसाधन से हम चुनाव लड़ेंगे. हालांकि यादवों का वोट ट्रांसफर नहीं होने की मायावती की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया देने से अखिलेश यादव बचते हुए नजर आए.

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