SPECIAL : हर 2 मिनट में 3 लोग हार रहे जिंदगी की जंग, सोशल मीडिया बड़ा कारण

Vikas Sharma Published Date 2018/09/10 07:47

जयपुर। क्या आपको पता है कि हर 40 सैंकड में एक शख्स अपनी जीवनलीला समाप्त कर रहा है। यानी दो मिनट में तीन लोग जिंदगी की जंग हार रहे हैं। जी हां, ये कोई हमारा दावा नहीं, बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के रिपोर्ट कार्ड की बानगी है। चौकाने वाली बात है कि इसमें सर्वाधिक लोग युवा वर्ग के हैं। आखिर क्यों यंग ब्लड खुदखुशी जैसा कदम उठा रहे हैं।

जिस मौत का नाम सुनते ही रूह कांप जाती है, उसी मौत को देश का युवा खुद गले लगा रहा है। ​दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही घर में 11 लोगों के आत्महत्या की घटना देशभर में आज भी चर्चाओं में है। कुछ ऐसी ही घटना राजस्थान के गंगापुर सिटी में भी देखने को मिली, जहां भगवान से मिलने के अंधविश्वास में पांच लोगों ने हंसते—हंसते जहर के लड्डू खा लिए। राजस्थान समेत देशभर में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं को लेकर ये दोनों उदाहरण तो मात्र बानगी है। अब इसे अंधविश्वास कहें या फिर जिन्दगी नहीं जीने की हताशा कि लोग खुद ही अपनी सांसों की डोर तोड़ रहे हैं।

आत्महत्या रोकथाम दिवस के मौके पर आज राजधानी में कई जगहों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सालय में भी विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां वरिष्ठ चिकित्सकों ने मरीजों के साथ संवाद बनाया। साथ ही आत्महत्या रोकथाम के लिए अलग से कार्य योजना बनाकर काम करना तय किया।

किन वजहों से और किस उम्र के लोग उठा रहे सुसाइड जैसे कदम :
— 15 से 19 साल की उम्र में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है सुसाइड।
— हर उम्र के डेटा पर गौर करें तो मौत का नौवां कारण है सुसाइड।
— 2000 से 2015 के बीच आत्महत्या के कारणों में 23 फीसदी तक बढ़ोतरी।
— अकेले राजस्थान में पिछले दस सालों में 48000 लोगों ने जीवनलीला समाप्त की।
— आत्महत्या के मामलों में विश्व में भारत का 43वां नम्बर।
— महिलाओं की तुलना में पुरूषों में आत्महत्या की प्रवृति ज्यादा होती है।

सुसाइड की सबसे बड़ी वजह :
- सोशल मीडिया, इंटरनेट बना सबसे बड़ा कारण।
- तनावभरी जिन्दगी।
- लव अफेयर का लफड़ा।
- नशे की लत के बाद जीवन से मोहभंग।
- जीवन में बढ़ती प्रतिस्पर्दा एवं अवसाद।
- हार्मोंस का बदलाव।
- एकाकी परिवार की सोच।

सुसाइड को यूं रोका जाए :
- तनावग्रस्त व्यक्ति से संवाद बनाए रखे।
- पॉजिटिव सोच के लिए मॉटिवेट करें।
- संयुक्त परिवार की अवधारण को बरकरार रखें।
- किसी व्यक्ति ने अगर सुसाइड का पहले प्रयास किया है, तो उस पर विशेष ध्यान रखा जाए।

इंसानी जिन्दगी ऊपर वाले की नेमत होती है और कहा जाता है कि जिन्दगी संघर्ष का नाम है। जब सब कुछ बनाने वाले की इच्छा पर निर्भर है। सुख हो या फिर दुख की बेला तो फिर उस हंसी—खुशी जिन्दगी के साथ खिलवाड़ क्यों। इस रिपोर्ट के पीछे हमारा मकसद भी यही है कि आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं एक सभ्य समाज के लिए कतई शुभ संकेत नहीं है। इसलिए जिएं और दूसरों को भी जीने का जज्बा सिखाएं।

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