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राज्य सरकार ने किसानों को दी बड़ी राहत, 30 जून तक मिलेगा 5% ब्याज अनुदान का लाभ

राज्य सरकार ने किसानों को दी बड़ी राहत, 30 जून तक मिलेगा 5% ब्याज अनुदान का लाभ

जयपुर: कोरोना संकट के दौर में राज्य सरकार ने किसानों बड़ी राहत देते हुए दीर्घ कालीन कृषि ऋण लेने वाले काश्तकारों को 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान योजना की अवधि को 31 मार्च, 2020 से बढ़ाकर 30 जून, 2020 कर दिया गया है. अब समय पर ऋण का चुकारा करने वाले काश्तकारों को 6.65 प्रतिशत ब्याज दर से कृषि ऋण मिल पाएगा. 

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योजना की अवधि को 31 मार्च से बढ़ाकर 30 जून तक की अनुमति:
क़ोरोना महामारी के चलते देश भर में लॉकडाउन चल रहा हैं, जिसके कारण किसानों को योजना का पूरा लाभ नही मिल पा रहा था. सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस संबंध में अवगत कराया गया था, जिस पर मुख्यमंत्री  गहलोत ने तुरंत ही योजना की अवधि को 31 मार्च से बढ़ाकर 30 जून तक करने की अनुमति प्रदान कर दी हैं. उन्होंने बताया कि योजना 1 अप्रैल, 2019 से 31 मार्च, 2020 तक की अवधि में ऋण लेने वाले सभी किसानों पर लागू थीं, जिसे अब तीन माह के लिए बढ़ाया गया हैं ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ मिल पाये.

कृषकों को 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान देकर उन्हें राहत प्रदान की गई: 
दीर्घ कालीन कृषि ऋण 11.65 प्रतिशत की ब्याज दर पर देय होता है तथा समय पर ऋण चुकता करने वाले कृषकों को 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान देकर उन्हें राहत प्रदान की गई है. आंजना ने बताया कि यह योजना सहकारी भूमि विकास बैंकों से दीर्घ कालीन अवधि के लिए लेने वाले ऋणों पर लागू होगी. उन्होंने बताया कि यह ब्याज दर किसी भी वाणिज्यिक बैंक द्वारा ली जाने वाली ब्याज दर से सबसे कम है. रजिस्ट्रार नरेश पाल गंगवार ने बताया कि किसानों को कृषि कार्यों के लिए ऋण की सर्वाधिक आवश्यकता होती है, लेकिन ब्याज दर सर्वाधिक होने के कारण किसान को ब्याज चुकाने में परेशानी का सामना करना पड़ता था और कृषि कार्यों में रूकावट भी पैदा होती थी. सरकार के इस निर्णय से 30 जून तक सहकारी भूमि विकास बैंकों से ऋण लेने वाले सभी किसानों को योजना का लाभ मिलेगा.

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दीर्घ कालीन ऋण भी इस योजना में कवर होंगे:
किसान लघु सिंचाई के कार्य जैसे नवकूप/नलकूप, कूप गहरा करने, पम्पसैट, फव्वारा/ड्रिप सिंचाई, विद्युतीकरण, नाली निर्माण, डिग्गी/हौज निर्माण तथा कृषि यंत्रीकरण के कार्य जैसे ट्रेक्टर, कृषि यंत्रादि, थे्रसर, कम्बाईन हार्वेस्टर आदि को क्रय करने के लिए दीर्घ कालीन अवधि के लिए ऋण ले सकते हैं. डेयरी, भूमि सुधार, भूमि समतलीकरण, कृषि भूमि क्रय, अनाज/प्याज गोदाम निर्माण, ग्रीन हाउस, कृषि कार्य हेतु सोलर प्लांट, कृषि योग्य भूमि की तारबंदी/बाउण्ड्रीवाल, पशुपालन, वर्मी कम्पोस्ट, भेड़/बकरी/सुअर/मुर्गी पालन, उद्यानीकरण, ऊंट/बैल गाड़ी क्रय जैसी कृषि संबद्ध गतिविधियों हेतु लिए गए दीर्घ कालीन ऋण भी इस योजना में कवर होंगे. 

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जयपुर: जिला कलक्टर एवं जिला गौपालन समिति के अध्यक्ष डॉ. जोगाराम ने बताया कि ‘‘कामधेनू डेयरी योजना’’ के अन्तर्गत स्वरोजगार के लिए नवयुवक, महिलाएं, इच्छुक पशुपालक, गौ पालक, कृषक पशुपालन विभाग की प्रजनन नीति अनुसार दूधारू देशी गौवंश का संर्वधन कर देसी उन्नत गौवंशों की डेयरी लगा सकते हैं. डेयरी लगाने के लिए इच्छुक एवं पात्रता रखने वाले अभ्यर्थियों को 30 जून 2020 तक निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना होगा. 

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चयनित अभ्यर्थियों के माध्यम से कामधेनू डेयरियां खोली जाएंगी:
डॉ.जोगाराम ने बताया कि ‘‘कामधेनू डेयरी योजना’’ के अन्तर्गत जिले में पशुपालन विभाग की प्रजनन नीति के अनुरूप वित्तीय वर्ष 2020-21 में सरकार द्वारा चयनित अभ्यर्थियों के माध्यम से कामधेनू डेयरियां खोली जाएंगी. इस डेयरी में उच्च दुग्ध क्षमता वाली एक ही नस्ल के 30 गौवंश होगें.

90 प्रतिशत राशि बैंक लोन के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी: 
उन्होंने बताया कि डेयरी खोलने के लिए लाभार्थी के पास पर्याप्त स्थान एवं हरा चारा उत्पादन करने के लिए कम से कम एक एकड़ भूमि होनी चाहिए. इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 36 लाख रूपये निर्धारित की गई है. इसमें लाभार्थी को 10 प्रतिशत राशि स्वयं द्वारा वहन करनी होगी एवं 90 प्रतिशत राशि बैंक लोन के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी. डेयरी योजना अन्तर्गत लिया गया ऋण चुकाए जाने पर राज्य सरकार द्वारा 30 प्रतिशत सब्सिडी भी दी जाएगी. 

चयनित पशुपालकों को 30 गौवंश के लिए ऋण दिया जाएगा:
जिला कलेक्टर ने बताया कि पशुपालक, गोपालक, कृषकों, नवयुवकों, महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए एवं उन्नत गौवंशों से पशुपालकों की आय बढा़ने के लिए कामधेनू डेयरी योजना में चयनित पशुपालकों को 30 गौवंश के लिए ऋण दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि सफल आवेदक को बैंक के माध्यम से ऋण प्रदान किए जाने के बाद डेयरी प्रबंधन एवं गौ उत्पादों के संबंध में उन्हें प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन भी दिया जायेगा. लाभार्थी को इस क्षेत्र में कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना आवश्यक हैं. साथ ही डेयरी का संचालन स्थानीय निकाय के प्रतिबंधित सीमा क्षेत्र से बाहर किया जायेगा. 

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प्रथम चरण में एक ही नस्ल की 15 गौवंश क्रय करने होंगे:
संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग जयपुर उम्मेद सिंह ने बताया कि कामधेनू डेयरी योजना के अन्तर्गत इच्छुक पशुपालक, गौपालक, कृषक, नवयुवक, महिलाओं को 30 जून 2020 तक निर्धारित प्रपत्र में कार्यालय संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग को आवेदन करना होगा. प्रथम चरण में देशी नस्ल की गायें जिनकी उम्र 5 वर्ष या दो ब्यांत (जो भी कम हो) होनी चाहिए एवं दुग्ध उत्पादन 10-12 लीटर प्रतिदिन होना चाहिए. प्रथम चरण में एक ही नस्ल की 15 दुधारू गाय एवं इसके 6 महीने बाद द्वितीय चरण में 15 देशी गौवंश क्रय करने होंगे. योजना के बारे में अधिक जानकारी एवं आवेदन पत्र विभाग की वेबसाइट https://gopalan.rajasthan.gov.in/ से डाउनलोड कर प्राप्त किए जा सकते हैं. 

जैसलमेर में टिड्डी का टेरर, जून-जुलाई और अगस्त में पाक से बड़े टिड्डी हमले की चेतावनी

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जैसलमेर: भारत पाक सीमा से सटे सरहदी जिले में जैसलमेर में एक बार फिर टिड्डी के हमले होने शुरू हो गए जिससे एक बार फिर से टिड्डी को लेकर चिंता सताने लगी है की पिछले साल की भाति इस बार भी कहर ना बरपा दें. एक तरफ इस बार देश में कोरोना के कहर बरपाया हुआ है वहीं दूसरी तरफ टिड्डी दल फिर से अटैक कर रहे हैं. 

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टिड्डी दल के हमले ने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया: 
सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में टिड्डियों की आफत ने एक बार पुनः दस्तक दी है. जैसलमेर सीमा क्षेत्र धनाना की ओर से गत रविवार को आए टिड्डी दल का जैसलमेर एयरपोर्ट मार्ग पर पड़ा उड़ा ले जाने के बाद सफाया किया इसी दल से अलग हुए एक छोटे दल लाणेला गांव के पास पड़ाव किया था वहां भी उन नियंत्रण की कार्रवाई करने का दावा सरकारी तंत्र की ओर से किया है. टिड्डी चेतावनी संगठन के राजेश कुमार ने बताया जैसलमेर एयरपोर्ट मार्ग पर 3 गुना 4 किलोमीटर की लंबाई वाले दल पर नियंत्रण के लिए लगातार प्रयास किए गए , वहीं रामदेवरा ग्राम पंचायत टिड्डी दल के हमले ने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया क्षेत्र में पेड़ पौधे वनस्पति किसानों के खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं फिर की ढाणी के आसपास क्षेत्र में करीब 3 किलोमीटर की परिधि में बताया कि आसमान में उड़ता नजर आया.

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टिड्डी अटैक से सरकार और जिला प्रसाशन चिंतित:
जैसलमेर में लगातार टिड्डी अटैक से सरकार और जिला प्रसाशन चिंतित है. राजस्थान में प्रवेश करने से पहले टिड्डियों के ये दल पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी भारी तबाही मचा चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, चार करोड़ की संख्या वाला टिड्डियों का एक दल 35 हजार लोगों के लिए पर्याप्त खाद्य को समाप्त कर सकता है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जून में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है. इस बार टिड्डी के कहर को खत्म करने के लिए विभाग दवरा पुख्ता इंतजाम किये है.

सहकारिता मंत्री आंजना ने लिखा केंद्रीय मंत्री तोमर को पत्र, समर्थन मूल्य पर होने वाली जींस खरीद का लाभ समस्त किसानों को देने का किया आग्रह

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जयपुर: सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि समर्थन मूल्य पर होने वाली जिंस खरीद का लाभ समस्त किसानों को मिलना चाहिए. केन्द्र सरकार इस सम्बन्ध में नीति बनाये कि समर्थन मूल्य की खरीद में प्रत्येक किसान से एक निश्चित मात्रा में उपज की खरीद हो. 

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किसानों का बहुत बड़ा तबका सरकार की योजना से वंचित:  
सहकारिता मंत्री ने बताया की भारत सरकार द्वारा खरीफ फसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि स्वागत योग्य कदम है और इसका फायदा किसानों को मिलेगा. उन्होनें बताया कि केन्द्र सरकार किसानों की आय दोगुना करना चाहती है वहीं दूसरी तरफ किसानों का बहुत बड़ा तबका सरकार की योजना से वंचित है. ऐसे में समान नीति बनाकर सभी किसानों को लाभांवित किया जाये.

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10 से 20 प्रतिशत किसान ही अपनी उपज एमएसपी पर बेच पाते हैं:
आंजना ने बताया कि समर्थन मूल्य खरीद में किसी भी राज्य की उपज का 25 प्रतिशत ही खरीदा जाता है. केन्द्र सरकार द्वारा इस नियम से 10 से 20 प्रतिशत किसान ही अपनी उपज एमएसपी पर बेच पाते हैं. ऐसे में किसानों का बड़ा वर्ग बाजार में ओने-पोने दाम पर फसल बेचने को मजबूर होता है, और उसकी आय में बढ़ोतरी नही हो पाती है. अतः कोरोना महामारी देखते हुए एमएसपी का लाभ सभी किसानों को मिले इसके लिए केन्द्र सरकार को शीघ्र कदम उठाने चाहियें. 

जैसलमेर: 2 ग्राम टिड्डी का टेरर जारी, विभाग ने रात-भर चलाया अभियान

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जैसलमेर: भारत पाक सीमा से सटे सरहदी जिले में जैसलमेर में एक बार फिर टिड्डी के छोटे छोटे हमले होने शुरू हो गए जिससे एक बार फिर से टिड्डी को लेकर चिंता सताने लगी है की पिछले साल की भाति इस बार भी कहर ना बरपा दें. एक तरफ इस बार देश में कोरोना के कहर बरपाया हुआ है. वहीं दूसरी तरफ टिड्डी दल फिर से अटैक कर रहे हैं. सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में टिड्डियों की आफत ने एक बार पुनः दस्तक दी है. सोमवार शाम जैसलमेर में टिड्डी के बड़े दल ने धावा बोल दिया जिस पर जिला कलक्टर की गंभीरता से रात भर टिड्डियों को नियतंत्राण की कार्रवाई को अंजाम दिया गया. 

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लाखों की संख्या में टिड्डियों को नष्ट किया गया: 
जैसलमेर के एयरपोर्ट रोड के आस पास क्षेत्र इलाके में टिड्डी ने पड़ाव डाला जिस पर टिड्डी नियंत्रण विभाग और कृषि विभाग ने रात-भर रेस्क्यू अभियान चलाया गया, जिस पर लाखों की संख्या में टिड्डियों को नष्ट किया गया. जैसलमेर जिले में टिड्डियों पर नियंत्रण के लिए युद्धस्तर पर प्रयास जारी हैं. टिड्डियों पर नियंत्रण की दृष्टि से जिला प्रशासन के निर्देशों पर टिड्डी नियंत्रण सहित संबंधित विभागों की ओर से टिड्डी प्रभावित क्षेत्रों में कीटनाशकों के व्यापक स्प्रे की वजह से टिड्डियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है. फिर भी जैसलमेर के आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र में टिड्डी के दल देखें गए. 

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आज से किसानों के लिए उपज रहन ऋण वितरण योजना का शुभारंभ, 25 हजार किसानों को मिलेगा लाभ

आज से किसानों के लिए उपज रहन ऋण वितरण योजना का शुभारंभ, 25 हजार किसानों को मिलेगा लाभ

जयपुर: सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने बताया कि 1 जून को सभी जिलों में ग्राम सेवा सहकारी समितियां किसानों को रहन ऋण वितरण कर उपज रहन ऋण योजना का शुभारंभ करेगी. कोविड-19 महामारी के दौर में किसानों को कम दामों पर फसल नहीं बेचनी पड़े इसके लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 3 प्रतिशत ब्याज दर पर उपज रहन ऋण देने का फैसला किया है. इसे अमलीजामा देते हुए जून माह में 25 हजार किसानों को योजना के तहत लाभ प्रदान करने का लक्ष्य रखा हैं.

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किसान को अपनी उपज का 70 प्रतिशत ऋण मिलेगा:
आंजना ने बताया कि ग्राम सेवा सहकारी समितियों के सदस्य लघु एवं सीमान्त किसानों को 1.50 लाख रूपये तथा बड़े किसानों को 3 लाख रूपये रहन ऋण के रूप में मिलेंगे. किसान को अपनी उपज का 70 प्रतिशत ऋण मिलेगा. इससे किसान की तात्कालिक वित्तीय आवश्यकताएं पूरी होगी. बाजार में अच्छे भाव आने पर किसान अपनी फसल को बेच सकेगा. उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष कृषक कल्याण कोष से 50 करोड रूपये का अनुदान इस योजना के लिए किसानों को मिलेगा. प्रमुख सचिव सहकारिता एवं कृषि नरेश पाल गंगवार ने बताया कि योजना में पात्र समितियों का दायरा बढ़ाकर इसे 5500 से अधिक किया गया है. 

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किसान को रहन ऋण देने की राजस्थान की यह विशेष पहल:
भारत में सबसे कम ब्याज दर 3 प्रतिशत पर किसान को रहन ऋण देने की राजस्थान की यह विशेष पहल है. जो किसानों एवं समितियों की आय में वृद्धि करेगी. अधिक से अधिक पात्र किसानों को उपज रहन ऋण देकर उनकी तात्कालिक आवश्यकता को पूरा करने में सहकारी समितियां मदद करेगी. गंगवार ने बताया कि सरकार की मंशा है कि प्रतिवर्ष 2 हजार करोड़ रूपये रहन ऋण के रूप में किसानों की मदद की जाए. जिसे मूर्त रूप दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस कार्य में लगे कार्मिकों के लिए भी प्रोत्साहन योजना लाई जाएगी. जिलों के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिए गए है कि  रहन ऋण वितरण कर किसानों को लाभान्वित किया जाए.

नहरी किसानों के लिए राहत की खबर, आज से 30 जुलाई तक मिलेगा खरीफ का पानी

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जैसलमेर: भारत पाक सीमा से सटे सरहदी जिले जैसलमेर के नहरी किसानों के लिए अच्छी खबर है कि अब उन्हें आगामी एक महीने तक खरीफ की फसलों के लिए पानी दिया जाएगा. हालांकि पहले सरकार द्वारा रेगुलेशन के तहत 26 अप्रैल से 30 मई तक पानी दिया जाना था, लेकिन रेगुलेशन में संशोधन करते हुए सरकार ने 30 मई से आगामी 30 जुलाई तक किसानों को खरीफ की फसल व पेयजल के लिए पानी उपलब्ध करवाया जाएगा. 

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सिंचाई के लिए 30 मई से 30 जुलाई तक पानी दिया जाएगा:
इंदिरा गांधी नहर परियोजना की नहरों को खरीफ फसलों के दौरान सिंचाई के लिए 30 मई से 30 जुलाई तक पानी दिया जाएगा. नहरों के 4 समूह में से इन अवधि में दो समूह चलाएं जाएंगे. जिसमें जैसलमेर व पोकरण भी शामिल है. इसके साथ ही बाड़मेर लिफ्ट परियोजना के लिए भी पानी छोड़ा जाएगा. विभाग ने काश्तकारों से अपील की है कि सिंचाई पानी की मात्रा को ध्यान में रखते हुए कम पानी के उपयोग वाली फसलों की सिंचाई करे. इंदिरा गांधी नहर परियोजना जैसलमेर संभाग में बुर्जी 1254 मुख्य नहर के नीचे बारी प्रणाली, द्वितीय चरण के रेगुलेशन के लिए जल नहरों में सिंचाई के लिए दिया जाएगा. नहरबंदी के बाद अब किसानों को सिंचाई के लिए पानी रविवार से नियमित रूप से मिलेगा.

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किसानों ने भी खरीफ की बुआई की तैयारियां शुरू कर दी:
अब सिंचाई के लिए इंदिरा गांधी मुख्य नहर से जुड़ी नहरों के चार में दो समूह में पानी चलाया जाएगा ताकि खरीफ फसल की बुआई की जा सके. नहरों में दो समूह में चलने वाला पानी एक समूह में साढ़े आठ दिन तक चलता है. इसके बाद दूसरा समूह शुरू होता है. इसी क्रम से नहरी पानी का शिड्यूल 34 दिनों तक निर्धारित होता है. उधर सिंचाई पानी का बेसब्री से इंतजार कर रहे किसानों ने भी खरीफ की बुआई की तैयारियां शुरू कर दी है. पंजाब के साथ अब राजस्थान सीमा में भी नहर की मरम्मत नहीं होगी क्योंकि 4 समूह में पानी देने के लिए नहर में हरिके से 11 हजार 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाना है. इतने पानी में नहर का जलस्तर ज्यादा रहेगा, जिससे किसी भी प्रकार की मरम्मत संभव नहीं है.  

जून माह में 25 हजार किसानों को उपज रहन ऋण योजना से जोड़ने का लक्ष्य, फसल रहन ऋण के लिए 5500 ग्राम सेवा सहकारी समितियां को दी पात्रता

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जयपुर: 1 जून से शुरू हो रही उपज रहन ऋण योजना के तहत जून माह में राज्य के 25 हजार किसानों को जोड़कर लाभ प्रदान किया जायेगा. राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से किसानों के उपज बेचान से जुड़े हितों की सुरक्षा सम्भव हो सके. उन्होंने कहा कि योजना में पात्र समितियों का दायरा बढ़ाकर इसे 5500 से अधिक किया गया है ताकि अधिक से अधिक किसान लाभान्वित हो सके. 

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किसान को उसकी उपज का 70 प्रतिशत ऋण मिलेगा:
आज सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव और रजिस्ट्रार नरेश पाल गंगवार पंत कृषि भवन में उपज रहन ऋण योजना, फसली ऋण वितरण एवं अन्य संबंधित बिन्दुओं पर जिलों में पदस्थापित सहकारिता के अधिकारियों एवं व्यवस्थापकों को विडियों काफ्रेंसिंग के माध्यम से सम्बोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि लघु एवं सीमान्त किसानों को 1.50 लाख रूपये एवं बड़े किसानों को 3 लाख रूपये रहन ऋण के रूप में देने के लिए योजना जारी की है. इसमें किसान को उसकी उपज का 70 प्रतिशत ऋण मिलेगा. किसान बाजार में अच्छे भाव आने पर अपनी फसल को बेच सकता है. यह योजना किसान की तात्कालिक वित्तीय आवश्यकता को पूरी करने तथा कम दामों में फसल बेचने की मजबूरी में मददगार साबित होगी. 

कार्मिकों के लिए आयेगी प्रोत्साहन स्कीम:
प्रमुख सचिव ने कहा कि राजस्थान की यह योजना भारत में सबसे कम ब्याज दर 3 प्रतिशत पर किसान को रहन ऋण देने की विशेष पहल है. जो किसानों एवं समितियों की आय में वृद्धि करेगी. उन्होंने निर्देश दिये कि सहकारी समितियां अपने आस-पास के गोदामों को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक किसानों को उपज रहन ऋण देकर उनकी तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करें. योजना में अच्छे कार्य करने वाली समितियों के कार्मिकों के लिए शीघ्र ही एपेक्स बैंक द्वारा प्रोत्साहन स्कीम जारी की जायेगी. 

4.44 लाख मै.टन सरसों एवं चना की हुई खरीद: 
गंगवार ने कहा कि कोविड-19 महामारी में केवीएसएस एवं जीएसएस घोषित गौण मण्डियां बहुत अच्छे से कार्य कर रही है और 427 गौण मण्डियां ओपरेशनल होकर किसानों को अपने खेत के नजदीक ही उपज बेचान की सुविधा दे रही है. उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर खरीद में जीएसएस को जोड़ने से किसानों को अपने नजदीकी उपज बेचान की सुविधा मिलने से खरीद कार्य में गति आयी है. जो खरीद पहले 58 दिन में होती थी, आज वह 26 दिन में ही पूरी हो रही है तथा किसानों के खाते में तीन से चार दिन में भुगतान भी हो रहा है. 27 मई तक 1 लाख 76 हजार 434 किसानों से 4 लाख 44 हजार 628 मै.टन सरसों एवं चना की खरीद हो चुकी है, जिसकी राशि 2 हजार 64 करोड़ रूपये है. इसमें से 1 हजार 723 करोड़ रूपये का भुगतान किसानों को हो चुका है. 

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4295 करोड़ रूपये फसली ऋण का हुआ वितरण: 
राज्य के 13 लाख 18 हजार 177 किसानों को 4 हजार 295 करोड़ रूपये का सहकारी फसली ऋण का वितरण हो चुका है. उन्होंने भरतपुर, जैसलमेर, हनुमानगढ़, बारां एवं जालौर जिलों में ऋण वितरण की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि संबंधित जिले इस कार्य में गति लाये और शीघ्र फसली ऋण वितरण करे. गंगवार ने कहा कि हमारी मंशा है कि ग्राम सेवा सहकारी समिति को किसान की समस्या समाधान एवं सुविधाओं के लिए सिंगल विड़ों के रूप में विकसित किया जाये. 
 

टिड्डी पर काबू करने में विफल रही राज्य और केन्द्र सरकार, हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर 8 जून तक जवाब पेश करने के दिये आदेश

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जयपुर: राज्य में टिडडी दल के अब तक के सबसे भयावह प्रकोप से बचने और काबू पाने के लिए तय गाईड लाईंस के अनुसार काम नहीं होने और टिड्डी दल पर काबू नहीं पाने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने केन्द्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस सबीना और जस्टिस सी के सोनगरा ने एडवोकेट विजय पूनिया की ओर से दायर जनहित याचिका पर ये आदेश दिये है. 

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राज्य में टिड्डी दल का कई दशक बाद इतना जबरदस्त हमला हुआ: 
एडवोकेट विजय पूनियां ने जनहित याचिका दायर कर अदालत को बताया कि पिछले कई दिनों से राज्य में टिड्डी दल का कई दशक बाद इतना जबरदस्त हमला हुआ है. राज्य में टिडडी हमले से करीब 5 लाख हैक्टेयर में फसल और हरियाली नष्ट हो गई है. इसके बावजूद अभी तक केन्द्र और राज्य सरकार ने टिडडी नियंत्रण के लिए अब तक कोई ठोस काम नहीं किया है. याचिका में केन्द्र और राज्य सरकार को टिडडी नियंत्रण की योजना और गाईड लाईंस की पालना के निर्देश देने की गुहार लगायी गयी है. 

याचिका में कहा सरकार ने नही कि गाईडलाइन की पालना:
लेकिन अभी तक केन्द्र और राज्य सरकारे इस पर काबू पाने में पुरी तरह से विफल रही है. टिड्डी दल की समस्या एक निरंतर समस्या बनी हुई है. यूनाईटेड नेशन के फूड व एग्रीकल्चर संगठन ने रेगिस्तानी टिडडी पर काबू पाने के लिए गाईड लाईंस और आकस्मिक योजना जारी कर रखी हैं, लेकिन सरकारों द्वारा इस योजना की कोई पालना नही कि गयी. याचिका में कहा गया टिडडी दल के हमला होने पर नियंत्रण के लिए कृषि मंत्रालय के साथ गृह, रक्षा, विदेश, सिविल एविऐशन, दूरसंचार सहित राज्य सरकारों की भूमिका भी स्पष्ट तौर पर गाईड लाईंस और योजना में बतायी गयी है.

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प्राथमिक जिम्मेदारी कृषि मंत्रालय और विभाग की:
टिडडी नियंत्रण की योजना में मंत्रालयों के साथ ही कीटनाशक निर्माताओं और एयरक्राफ्ट कंपनियों सहायता लेना भी बताया है. टिडडी दल के हमले व उत्पत्ति के स्थान का पता लगाने और किसानों तथा आमजन को चेतावनी देने के साथ ही सभी ऐजेंसियों को एकजुट कर नियंत्रण की योजना पर काम करने की प्राथमिक जिम्मेदारी कृषि मंत्रालय और विभाग की है. राज्य सरकारों को नियंत्रण के लिए कीटनाशक,वाहन और मानवसंसाधन उपलब्ध करवाना होता है. केन्द्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय तथा राज्य सरकार टिडडी नियंत्रण करने में विफल रहे हैं. 

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