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राज्य सरकार चाहे तो आपको भेज सकती है दक्षिण अफ्रीका भी, राजस्थान हाई कोर्ट ने कृषि पर्यवेक्षकों के तबादले पर रोक लगाने से किया इंकार

राज्य सरकार चाहे तो आपको भेज सकती है दक्षिण अफ्रीका भी, राजस्थान हाई कोर्ट ने कृषि पर्यवेक्षकों के तबादले पर रोक लगाने से किया इंकार

जयपुर: प्रदेश में टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव के लिए सरकार द्वारा किये गये 50 से ज्यादा कृषि पर्यवेक्षकों के तबादले पर राजस्थान हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इंकार किया है. कृषि पर्यवेक्षको की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पंकज भण्डारी ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदेश में टिड्डी दल का हमले से किसानो की फसलों को बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है ऐसे में राज्य सरकार चाहे तो आपको दक्षिण अफ्रीका भी भेज सकती है. 

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रामवतार मेघवाल व अन्य कृषि पर्यवेक्षकों ने याचिका दायर कर अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के साथ ही 50 कृषि पर्यवेक्षकों के तबादले कुचामन नागौर से जैसलमेर मुख्यालय कर दिया गया है जबकि नियमानुसार उनके तबादले से पूर्व पंचायती राज विभाग से अनुमति लेना आवश्यक है. वहीं एक जिले से दूसरे जिले में इतने दूरस्थ स्थान पर तबादला नहीं किया जा सकता. वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश महर्षि ने अदालत को बताया कि प्रदेश में टिड्डी दलों का 30 साल में पहली बार बड़े स्तर पर प्रकोप हुआ है.

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पाकिस्तान से आने वाली टिड्डी दल जैसलमेर क्षेत्र से प्रवेश कर रही है. ऐसे में टिड्डी दल पर नियंत्रण के लिए जैसलमेर में अधिक कर्मचारियों की जरूरत होने के चलते तबादले किेये गये है. दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार के तर्क से सहमत होते हुए याचिकाकर्ताओं के तबादला आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया. 

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जयपुर: कोरोना और सियासी संकट के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजकाज निपटाते हुए आज तीन अहम फैसले किए. सीएम गहलोत ने बिड सिक्योरिटी एवं परफॉमेर्ंस सिक्योरिटी की राशि 50 प्रतिशत कम दी है, वहीं पुलिस विभाग में चतुर्थ श्रेणी के 326 पदों पर सीधी भर्ती करने की फाइल पर मुहर लगा दी. एक अन्य अहम फैसले में मुख्यमंत्री ने चार साल से लंबित गृह विभाग में अभियोजन सेवा के विभिन्न पदों पर प्रमोशन को हरी झंडी दे दी.

गुड गवर्नेंस से जुड़े फैसले:
प्रदेश में भले ही कोरोना व सियासी संकट चल रहा हो, लेकिन मुख्यमंत्री गहलोत ने गुड गवर्नेंस से जुड़े फैसले लेने में किसी संकट को आड़े नहीं आने दिया. गहलोत ने आज अहम फैसला करते हुए वित्तीय वर्ष 2020-21 की शेष अवधि के लिए माल, सेवाओं एवं संकर्मों के उपापन पर राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियमों के तहत बिड सिक्योरिटी एवं परफॉर्मेंस सिक्योरिटी की राशि को 50 प्रतिशत कम करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है. इस निर्णय से सार्वजनिक निर्माण की परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी. साथ ही इन परियोजनाओं की निविदाओं में आने वाली परेशानी दूर होगी. उल्लेखनीय है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं की टास्क फोर्स ने माल, सेवाओं एवं संकर्मों के उपापन पर बिड सिक्योरिटी एवं परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के लिए राजस्थान लोक उपापन के पारदर्शिता नियमों में अंकित प्रावधान राशि को 50 प्रतिशत कम करने का सुझाव दिया था.

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इन पदों पर भर्ती की मंजूरी:
मुख्यमंत्री ने दूसरा फैसला भर्ती को लेकर किया. गहलोत ने पुलिस विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 326 रिक्त पदों को सीधी भर्ती से भरे जाने के प्रस्ताव को वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति दी है. आरएसी बटालियनों की कंपनियों, प्लाटूनों एवं सैक्शन के मोबलाइज रहने के दौरान बटालियन एवं कंपनी मुख्यालय पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों, स्वीपर, धोबी, कुक, मोची आदि तथा नवगठित मेवाड भील कोर बांसवाड़ा, महाराणा प्रताप आरएसी इंडिया रिजर्व बटालियन, आरएसी की चौदहवीं बटालियन तथा जिला पुलिस भिवाड़ी के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के विभिन्न संवर्गों के इन पदों पर भर्ती की मंजूरी दी है.

326 रिक्त पदों को सीधी भर्ती से भरे जाने की स्वीकृति:
उल्लेखनीय है कि इन पदों पर भर्ती नहीं होने के कारण उक्त बटालियन और प्रशिक्षण संस्थानों में स्थित पुलिस लाइन एवं कार्यालय परिसरों में सफाई तथा अन्य विविध कार्यों के संपादन में परेशानी हो रही थी. साथ ही कानून-व्यवस्था में ड्यूटी के दौरान कंपनी, प्लाटून एवं सैक्शन के मूवमेंट में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था. इन पदों पर भर्ती से जवानों को स्वच्छ वातावरण एवं उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाएं मिल सकेंगी. गहलोत ने कुक के 72, स्वीपर के 58, धोबी के 51, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 31, जलधारी-जलवाहक के 30, नाई के 26, दर्जी एवं सईस के 10-10, मोची के 8, खाती के 7, कैनल बॉय के 6, फिटर के 2 तथा बागवान एवं फर्राश के एक-एक पद तथा वर्ष 2020-21 में पदोन्नति से रिक्त होने वाले 13 और पदों सहित कुल 326 रिक्त पदों को सीधी भर्ती से भरे जाने की स्वीकृति दी है.

अधिकारियों को मिल सकेगा पदोन्नति का लाभ:
एक अन्य महत्वपूर्ण फैसला करते हुए मुख्यमंत्री ने गृह विभाग में उप निदेशक अभियोजन के 4, सहायक निदेशक अभियोजन के 17 तथा अभियोजन अधिकारी के एक रिक्त पदों पर पदोन्नति देने के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक की अनुशंसाओं का अनुमोदन किया है. उल्लेखनीय है कि विभिन्न कारणों से इन पदों पर करीब 4 वर्ष से पदोन्नति नहीं हो पाई थी. मुख्यमंत्री के इस निर्णय से अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ मिल सकेगा.

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आयुर्वेद चिकित्सकों के 450 रिक्त पदों पर जल्द होगी भर्ती, राज्य सरकार ने दी मंजूरी

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जयपुर: आयुर्वेद विभाग में लम्बे समय से नौकरी का ख्वाब देख रहे चिकित्सकों के लिए बड़ी राहत की खबर है.चिकित्सा विभाग ने जल्द ही आयुर्वेद चिकित्साधिकारियों के 450 रिक्त पदों पर भर्ती की जायेगी.भर्ती पदों को गहलोत सरकार ने मंजूरी दे दी है.आयुर्वेद मंत्री डॉ रघु शर्मा ने बताया कि सरकार बेरोजगारों के प्रति गंभीर है.आयुर्वेद विभाग में 450 चिकित्सा अधिकारियों के पद खाली चल रहे थे, जिन्हें भरने के लिए मंजूरी दे दी गई है.

नई शिक्षा नीति पर बोले मंत्री सुभाष गर्ग, कहा,केन्द्र सरकार ने नई पॉलिसी में कई असमंजस को दूर नहीं किया

18 लाख 75 हजार रुपये की जारी की गई वित्तीय स्वीकृत:
इसके साथ ही चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा ने ये भी बताया कि 125 आयुष औषधालयों में बिजली एवं पानी के कनेक्शन की दिक्कत भी दूर होगी.इन सभी औषधालयों में कनेक्शन के लिए 18 लाख 75 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गयी है. 

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जयपुर: नई शिक्षा नीति के में उच्च शिक्षा में सुधारों पर देशभर में चर्चा की जा रही हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल तक ने नई शिक्षा नीति से बड़े बदलाव और खूबियां बताई हैं. लेकिन प्रदेश में तकनीकी शिक्षा मंत्री सुभाष गर्ग ने नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर चिंता जताई हैं.

शिक्षा में संसाधनों के अभाव पर केन्द्र सरकार का ध्यान क्यों नहीं?:
बतौर शिक्षाविद भी डॉक्टर गर्ग ने कई सवाल उठाते हुए कहा है कि नई शिक्षा नीति में उच्च शैक्षणिक संस्थाओं को मल्टी फैकल्टी के तौर पर डवलप करने की बात कही गई हैं. जो संसाधनों के अभाव में कैसे हो सकेगा. इसे लेकर कोई स्पष्ट नहीं हैं. 

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GDP का 6 फीसदी खर्च शिक्षा पर क्यों नहीं?:
देश में आईआईटी और आईआईएम अपनी अलग पहचान रखते है यदि उनमें इसे लागू करेंगे तो किस तरह का असर पड़ेगा. जब प्राथमिक शिक्षा में तीन तरह की भाषाओं की बात कही है तो फिर उच्च शिक्षा के लिए भाषा क्यों स्पष्ट नहीं की गई हैं. साथ ही जीडीपी का कितना प्रतिशत एजुकेशन पर खर्च किया जाएगा केन्द्र सरकार ने इसे लेकर भी कोई साफ जिक्र नहीं किया हैं. जबकि जरूरत जीडीपी के छह फीसदी खर्च की हैं.

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नई शिक्षा नीति में किसी से भेदभाव नहीं, ये नीति नए भारत की नींव रखेगी- पीएम मोदी

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर देशवासियों को संबोधित किया. इस कार्यक्रम का नाम कॉन्क्लेव ऑन ट्रांसफोरमेशनल रिफॉर्म्स इन हायर एजुकेशन अंडर नेशनल एजुकेशन पॉलिसी है. पीएम ने शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित किए जा रहे कॉन्क्लेव में उच्च शिक्षा पर मंथन किया. कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल भी मौजूद रहे. 

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इस नीति का कोई विरोध नहीं कर रहा:  
इस दौरान अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि तीन-चार साल के विचार-मंथन के बाद नई शिक्षा नीति को मंजूरी मिली है. आज हर विचारधारा के लोग इस मामले पर मंथन कर रहे हैं. इस नीति का कोई विरोध नहीं कर रहा है, क्योंकि इसमें कुछ भी एक तरफा नहीं है. लेकिन लोग सोच रहे हैं कि इतने बड़े रिफॉर्म को जमीन पर कैसे उतारा जाएगा.

लंबे मंथन के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति को स्वीकृत किया गया: 
उन्होंने कहा कि 3-4 साल के व्यापक विचार-विमर्श के बाद, लाखों सुझावों पर लंबे मंथन के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति को स्वीकृत किया गया है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में आज का ये कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है. इस कॉन्क्लेव से भारत के एजुकेशन वर्ल्ड को राष्ट्रीय शिक्षा नीति- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी.

कई दशकों से शिक्षा नीति में बदलाव नहीं हुआ था:
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब नर्सरी का बच्चा भी नई तकनीक के बारे में पढ़ेगा, तो उसे भविष्य की तैयारी करने में आसानी मिलेगी. कई दशकों से शिक्षा नीति में बदलाव नहीं हुआ था, इसलिए समाज में भेड़चाल को प्रोत्साहन मिल रहा था. कभी डॉक्टर-इंजीनियर-वकील बनाने की होड़ लगी हुई थी. अब युवा क्रिएटिव विचारों को आगे बढ़ा सकेगा, अब सिर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि वर्किंग कल्चर को डेवलेप किया गया है.

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आप सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के इंप्लीमेंटेशन से सीधे तौर पर जुड़े:
पीएम मोदी बोले कि हर देश, अपनी शिक्षा व्यवस्था को अपनी नेशनल वैल्यूज के साथ जोड़ते हुए, अपने नेशनल गोल्स के अनुसार रिफॉर्म करते हुए चलता है. मकसद ये होता है कि देश का एजुकेशन सिस्टम, अपनी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को फ्यूचर रेडी रखे, फ्यूचर रेडी करें. उन्होंने कहा कि आप सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के इंप्लीमेंटेशन से सीधे तौर पर जुड़े हैं और इसलिए आपकी भूमिका बहुत ज्यादा अहम है.

रीको में सीधी भर्ती के करीब 238 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी- उद्योग मंत्री

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जयपुर: उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा ने बताया है कि राज्य सरकार के उपक्रम रीको में विभिन्न श्रेणी के करीब 238 पदों को सीधी भर्ती से भरा जाएगा. उन्होंने सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरु करने के रीको की पत्रावली पर आदेश जारी कर दिए हैं. 

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युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह निर्णय लिया:
उद्योग मंत्री ने बताया कि रीको में उप प्रबंधक से अधीनस्थ सहायक श्रेणी तक के करीब 238 पद लंबें समय से रिक्त चल रहे हैं. उन्होंने बताया कि रीको में पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता व बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह निर्णय लिया गया है. 

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लंबे समय से रिक्त चल रहे ये पद: 
उन्होंने बताया कि रीको में उपमहाप्रबंधक आईटी/टेक के 8, उपप्रबंधक एचआरडी/जीएडी/इन्फ्रा के 2, प्रोगामर कम ऑपरेटर के 2, सहायक स्थल अभियंता सिविल के 43, सहायक लेखाधिकारी द्धितीय के 23, कनिष्ठ विधि अधिकारी के 12, कनिष्ठ अभियंता पॉवर के 3, कम्प्यूटर ऑपरेटर कम सीनियर असिसटेंट के 2, आशुलिपिक के 9, ड्राफ्ट्समैन कम ट्रेसर के 13, कनिष्ठ सहायक के 74, वाहन चालक प्रथम के 9 और अधीनस्थ सहायक के 38 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे थे. उन्होंने बताया कि इन सभी पदों की सीधी भर्ती की प्रक्रिया रीको द्वारा जल्दी ही शुरु करने के निर्देश दे दिए गए हैं. 

सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी, जयपुर के शिशिर गुप्ता ने हासिल की 50वीं रैंक

 सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी, जयपुर के शिशिर गुप्ता ने हासिल की 50वीं रैंक

जयपुर: सिविल सेवा परीक्षा का मंगलवार को अंतिम परिणाम जारी किया गया. परिणाम में राजधानी जयपुर के शिशिर गुप्ता ने 50वीं रैंक हासिल कर ना सिर्फ जयपुर का साथ ही अपने माता-पिता और गुरुजनों का भी मान बढाया. बचपन से ही आईएएस बनने के सपना देखने वाले शिशिर गुप्ता का ये चौथा प्रयास था और दूसरे प्रयास में साक्षात्कार तक पहुंचे शिशिर को सफलता नहीं मिली थी,लेकिन शिशिर ने हिम्मत नहीं हारी.

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ट्विटर ने दिया पढ़ाई में बहुत सहयोग:
चौथे प्रयास में शिशिर गुप्ता ने 50वीं रैंक हासिल की.सफलता के बाद शिशिर गुप्ता ने बताया की बचपन से ही आईएएस बनने का सपना देखा. तीन बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी थी. जिसका परिणाम है कि आज सफलता प्राप्त हुई है.सफलता में माता-पिता और गुरुजन के साथ ही मेरे दोस्तों का भी बड़ा सहयोग रहा है. जब तैयारी कर रहा था तब फेसबुक को तो डिलीट कर दिया था, लेकिन ट्विटर ने पढ़ाई में बहुत सहयोग दिया.

आईएएस बनना गर्व की बात:
इसके साथ ही प्रतिदिन न्यूज देखने और पढ़ने का भी काफी लाभ मिला.बेटे की सफलता के बाद फूले नहीं समा रहे शिशिर के माता-पिता जो पेशे से शिक्षक हैं का कहना है कि शिशिर पढ़ाई में बचपन से ही होशियार था. साथ ही पढ़ाई को लेकर कभी कोई समझौता नहीं किया.इसके साथ ही हमारे पूरे परिवार में कोई आईएएस बना है जो गर्व की बात है

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नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2019 के नतीजे घोषित कर दिया. इन नतीजों में प्रदीप सिंह ने टॉप किया है. यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन ने UPSC 2019 की परीक्षा में प्रदीप सिंह ने टॉप किया है वहीं दूसरे स्थान पर जतिन किशोर रहे हैं. 

तीसरे नंबर पर जमाया प्रतिभा वर्मा ने कब्जा:
UPSC ने मंगलवार को 2019 की सिविल सेवा परीक्षा का जो फाइनल रिजल्ट जारी किया उसमें तीसरे नंबर पर प्रतिभा वर्मा ने कब्जा जमाया है और वो महिलाओं के नाम के मामले में प्रथम स्थान पर आई हैं.

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UPSC की वेबसाइट चेक करे परिणाम: 
UPSC 2019 का रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट www.upsc.gov.in पर चेक किया जा सकता है. कैंडीडेट्स अपने अंक रिजल्ट जारी होने के 15 दिन बाद वेबसाइट पर चेक कर सकेंगे. आपको बता दें कि वर्ष 2019 के लिए यूपीएससी परीक्षा के लिए 2,304 उम्मीदवार सफल हुए थे. इन छात्रों के लिए इंटरव्यू की परीक्षा 17 फरवरी 2020 से शुरू हुई थी लेकिन कोरोना की वजह से मार्च में इंटरव्यू रोकना पड़ा था. जिसके बाद 20-30 जुलाई के बीच इंटरव्यू रखे गए.

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जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुर्जरों सहित अति पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को राजस्थान न्यायिक सेवा में आरक्षण के लिए बड़ा फैसला किया है. एमबीसी को एक प्रतिशत के स्थान पर 5 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए राजस्थान न्यायिक सेवा नियम, 2010 में संशोधन को राज्य कैबिनेट के माध्यम से मंजूरी मिल गई है. 

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अति पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को इस संशोधन के जरिए राजस्थान न्यायिक सेवा में एक प्रतिशत के स्थान पर 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना प्रस्तावित है. गौरतलब है कि अति पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थी लम्बे समय से न्यायिक सेवा नियमों में संशोधन की मांग कर रहे थे, ताकि उन्हें राज्य न्यायिक सेवा में एक प्रतिशत के स्थान पर 5 प्रतिशत आरक्षण मिल सकें.

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मुख्यमंत्री की इस पहल से गुर्जर, रायका-रैबारी, गाडिया-लुहार, बंजारा, गडरिया आदि अति पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को राजस्थान न्यायिक सेवा में नियुक्ति के अधिक अवसर मिलना संभव होगा. 

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