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अल्जाइमर की समस्या से बचने के लिए इन 5 आदतों से रहें दूर

अल्जाइमर की समस्या से बचने के लिए इन 5 आदतों से रहें दूर

जयपुर: किसी बात को भूल जाना ऐसे तो आम बात होती है लेकिन जब आप हमेशा जब कुछ न कुछ भूलने लगे तो आपको सावधान हो जाना चाहिए. क्योंकि आजकल की बदलती लाइस्टाइल के चलते अल्जाइमर का खतरा बढ़ता जा रहा है. अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है, जिसके कारण मरीज की याद्दाश्त कमजोर हो जाती है और उसका असर दिमाग के कार्यों पर पड़ता है. ऐसे में हम आपको इससे बचने के लिए कुछ उपाय बता रहे हैं...

- स्ट्रेस फ्री लाइफ जिएं और तनाव बिल्कुल भी न लें. तनावपूर्ण अनुभवों के चलते याददाश्त की कमी और अल्जाइमर्स रोग का जोखिम बढ़ जाती है.
- मोबाइल कॉलिंग के अलावा कई चीजों में काम आने लगा है लेकिन हर बात को याद रखने के लिए मोबाइल पर निर्भर न रहें. 
-उम्र बढ़ने के साथ-साथ दिमाग को खाली न छोड़े बल्कि कुछ नया सीखने, करने की आदत डालते रहें ताकि दिमाग सक्रिय रहे.
- बहुत से लोग रात के समय मोबाइल पर अपना ज्यादातर समय बिताते हैं, जिसका असर हमारी नींद पर पड़ता है इसलिए आपको भरपूर नींद लेनी चाहिए.
- अगर आप लगातार नशा करते हैं, तो इसका असर आपके दिमाग पर पड़ता है. ऐसे में किसी भी तरह के नशे से दूर रहें. 
 

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COVID-19 वायरस शरीर में फैलने के लिए कोशिशाओं की कोलेस्ट्रॉल प्रणाली पर कब्जा कर सकता है : अध्ययन

COVID-19 वायरस शरीर में फैलने के लिए कोशिशाओं की कोलेस्ट्रॉल प्रणाली पर कब्जा कर सकता है : अध्ययन

बीजिंग:कोविड-19 रोग फैलाने वाला सार्स सीओवी-2 वायरस, शरीर में फैलने के लिये हमारी कोशिकाओं की आंतरिक कोलेस्ट्रॉल प्रक्रिया प्रणाली पर कब्जा कर सकता है. एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ जिसमें इस बीमारी के संभावित इलाज की दिशा को लेकर नए संकेत मिले हैं. नेचर मेटाबॉलिज्म नामक जर्नल में प्रकाशित कोशिका संस्कृति अध्ययन में कोलेस्ट्रॉल उपापचय और कोविड-19 के बीच संभावित आणविक संपर्क की पहचान की गई है.

चीन में अकादमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंसेज (एएमएमएस) के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि सार्स सीओवी-2 वायरस मानव कोशिका के एक अनुग्राहक (रिसेप्टर) से चिपक जाता है. यह कोशिका आम तौर पर एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बांधती है जिसे अच्छे कोलेस्ट्रॉल के तौर पर भी जाना जाता है.वैज्ञानिकों ने जब कोशिकाओं में कोलेस्ट्रॉल अनुग्राहकों को बंद कर दिया तो वायरस फिर उन पर नहीं चिपक पाया. उन्होंने कहा कि यह इलाज के नए लक्ष्य को लेकर एक संकेत है, यद्यपि यह शुरुआती चरण का शोध है.

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अध्ययन में सुझाव दिया गया कि सार्स-सीओवी-2 संक्रमण बढ़ाने के लिये कोशिकाओं के आंतरिक कोलेस्ट्रॉल तंत्र का इस्तेमाल कर सकता है. सार्स-सीओवी-2 संक्रमण के दौरान वायरस पर कंटीले प्रोटीन मेजबान कोशिका अनुग्राहक, जिसे एंजियोटेनसिन-कन्वर्टिंग एंजाइन2 (एसीई2) कहते हैं, को बांधते हैं. शोधकर्ताओं ने एक अन्य अनुग्राहक की भूमिका पर प्रकाश डाला है जिसे एचडीएल स्कावेंजर अनुग्राहक बी टाइप 1 (एसआर-बी1) कहते हैं, जो इंसानों के फेफड़ों की कोशिकाओं समेत कई उत्तकों में प्रकट होता है. यह अनुग्राहक आम तौर पर उच्च-घनत्व लीपोप्रोटीन (एचडीएल) को बांधता है.  (भाषा) 

हृदयरोगों से पीड़ित बच्चों के नि:शुल्क उपचार के लिए ओडिशा ने किया एमओयू का विस्तार

हृदयरोगों से पीड़ित बच्चों के नि:शुल्क उपचार के लिए ओडिशा ने किया एमओयू का विस्तार

भुवनेश्वर: हृदय रोगों से पीड़ित गरीब बच्चों के नि:शुल्क उपचार संबंधी सेवाओं का विस्तार करने की खातिर ओडिशा सरकार ने प्रासंती मेडिकल सर्विसेस ऐंड रिसर्च फाउंडेशन (पीएमएसआरएफ) के साथ एक समझौता पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं. आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि यह समझौता अहमदाबाद के सत्य साईं हार्ट हॉस्पिटल के लिए अगले दो वर्ष तक प्रभावी रहेगा तथा गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों को इससे बहुत लाभ मिलेगा. एमओयू पर बृहस्पतिवार को हस्ताक्षर हुए. इस अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनीत शरण, राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री एन.के. दास समेत अन्य लोग मौजूद थे.

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समझौते के मुताबिक बीमार बच्चों के आने जाने का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी. एक अधिकारी ने बताया कि सभी सुविधाएं नि:शुल्क मुहैया करवाई जाएंगी. उन्होंने बताया कि अब तक 1,019
बच्चों की हृदय की शल्यक्रिया हो चुकी है.

ओडिशा के रहने वाले दिल के रोगों के मरीज बच्चों के मुफ्त उपचार के लिए समझौता 18 नवंबर 2018 को किया गया था जिसका नए एमओयू के जरिए अब विस्तार हुआ है. पटनायक ने कहा कि सरकार एमओयू का नवीकरण कर रही है ताकि राज्य के गरीब लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मिलना सुनिश्चित हो सके.(भाषा) 

अगर आप भी करते हैं ये गलती तो हो जाइए सावधान, आपकी सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक

अगर आप भी करते हैं ये गलती तो हो जाइए सावधान, आपकी सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक

नई दिल्ली: कागज के बने एक बार इस्तेमाल करने योग्य कपों से चाय पीना सेहत के लिए हानिकारक है और यदि कोई व्यक्ति उनमें दिन में तीन बार चाय पीता है तो उसके शरीर में प्लास्टिक के 75,000 सूक्ष्म कण चले जाते हैं. आईआईटी खड़गपुर के एक अध्ययन में यह बात सामने आई है.

इन कपो पर चढ़ाई जाती है हाइड्रोफोबिक फिल्म की एक परतः
अनुसंधान का नेतृत्व करने वाली आईआईटी खड़गपुर में एसोसिएट प्रोफेसर सुधा गोयल ने कहा कि एक बार इस्तेमाल करने योग्य कागज के कपों में पेय पदार्थ पीना आम बात हो गई है. उन्होंने कहा कि हमारे अनुसंधान में इस बात की पुष्टि हुई है कि इन कपों में प्लास्टिक और अन्य हानिकारक तत्वों के कारण गर्म तरल वस्तु संदूषित हो जाती है. इन कपों को बनाने के लिए आमतौर पर हाइड्रोफोबिक फिल्म की एक परत चढ़ाई जाती है, जो मुख्तय: प्लास्टिक की बनी होती है. इसकी मदद से कप में तरल पदार्थ टिका रहता है. यह परत गर्म पानी डालने पर 15 मिनट के भीतर गलने लगती है.

15 मिनट में घुल जाते हैं 25,000 माइक्रोन आकार के प्लास्टिक के सूक्ष्म कणः 
गोयल ने कहा कि हमारे अध्ययन के अनुसार एक कप में 15 मिनट के लिए 100 मिली. गर्म तरल रखने से उसमें 25,000 माइक्रोन आकार के प्लास्टिक के सूक्ष्म कण घुलने लगते हैं. यानी रोजाना तीन कप चाय या कॉफी पीने वाले व्यक्ति के शरीर में प्लास्टिक के 75,000 सूक्ष्म कण चले जाते हैं, जो आंखों से दिखाई नहीं देते.  इसके स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम हो सकते है.

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खतरनाक जैव-उत्पादों और पर्यावरण प्रदूषकों के स्थान पर इनके इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करने की आवश्यकताः 
एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट पढ़ रहे अनुसंधानकर्ता अनुजा जोसेफ और वेद प्रकाश रंजन ने इस अनुसंधान में गोयल की मदद की. आईआईटी खड़गपुर के निदेशक वीरेंद्र के तिवारी ने कहा कि यह अध्ययन दर्शाता है कि खतरनाक जैव-उत्पादों और पर्यावरण प्रदूषकों के स्थान पर इनके इस्तेमाल को बढ़ावा देने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करने की आवश्यकता है. हमने प्लास्टिक के कपों एवं गिलासों की जगह एक बार इस्तेमाल योग्य कागज के कपों का इस्तेमाल तेजी से शुरू कर दिया है.
सोर्स भाषा

ये मास्क ऐसा, जो कर सकता है कोरोना वायरस को निष्क्रिय, एक अध्ययन में बात आई सामने

ये मास्क ऐसा, जो कर सकता है कोरोना वायरस को निष्क्रिय, एक अध्ययन में बात आई सामने

वाशिंगटन: वैज्ञानिकों ने एंटीवायरल परत वाला एक ऐसा नया मास्क डिजाइन किया है, जो कोरोना वायरस को निष्क्रिय कर देगा और इसे पहनने वाला व्यक्ति संक्रमण के प्रसार को कम करने में अहम भूमिका अदा कर सकेगा. अमेरिका में नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार , मास्क के कपड़े में एंटी वायरल रसायन की परत होगी जो मास्क के बावजूद सांस के जरिए बाहर निकली छोटी बूंदों को संक्रमण मुक्त करेगी.

प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों ने सांस लेने-छोड़ने, छींक, खांसी के अनुकरणों के जरिए यह पाया कि ज्यादातर मास्क में इस्तेमाल होने वाले नॉन-वोवेन कपड़े (लचीले, एक या अधिक कपड़े की परत वाले कपड़े) इस तरह के मास्क निर्माण के विचार के लिए सही हैं. यह अध्ययन जर्नल मैटर में बृहस्पतिवार को प्रकाशित हुआ. अध्ययन में पाया गया कि 19 फीसदी फाइबर घनत्व वाला एक लिंट फ्री वाइप (एक प्रकार की सफाई वाला कपड़ा) सांस के जरिए बाहर निकली बूंदों को 82 फीसदी तक संक्रमण मुक्त कर सकता है। ऐसे कपड़े से सांस लेने में कठिनाई नहीं होती है और प्रयोग के दौरान यह भी सामने आया कि इस दौरान मास्क पर लगा रसायन भी नहीं हटा.

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नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शियाजिंग हुआंग ने बताया कि महामारी से लड़ने के लिए मास्क बेहद महत्वपूर्ण है. मास्क की डिजाइन पर काम कर रही टीम का लक्ष्य मास्क पहनने के बाद भी सांस के जरिए बाहर निकली बूंदों में मौजूद वायरस को तेजी से निष्क्रिय करना है. इस संबंध में कई प्रयोगों के बाद अनुसंधनाकर्ताओं ने इसके लिए एंटीवायरल रसायन फॉस्फोरिक एसिड और कॉपर सॉल्ट का सहारा लिया. ये दोनों रसायन ऐसे हैं, जो वायरस के लिए प्रतिकूल माहौल तैयार करते हैं. (भाषा)

RESEARCH में दावा- भारतीय और पाकिस्तानी महिलाओं को कम उम्र में अधिक घातक स्तन कैंसर का खतरा

RESEARCH में दावा- भारतीय और पाकिस्तानी महिलाओं को कम उम्र में अधिक घातक स्तन कैंसर का खतरा

ह्यूस्टन (अमेरिका): स्तन कैंसर के जोखिम वाले कारकों को समझने के लिए किये गये एक अध्ययन के अनुसार भारतीय और पाकिस्तानी महिलाओं में कम उम्र में ही घातक स्तन कैंसर होने का खतरा रहता है.

1990 से 2014 के बीच भारतीय और पाकिस्तानी महिलाओं से संबंधित आंकड़ों का किया अध्ययनः
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित अध्ययन में भारतीय तथा पाकिस्तानी-अमेरिकी महिलाओं एवं अमेरिका में गैर-लातिन अमेरिकी श्वेत महिलाओं में स्तन कैंसर के लक्षणों का अध्ययन किया गया. इसके लिए नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के सर्विलांस, एपिडेमियोलॉजी एंड ऐंड रिजल्ट्स प्रोग्राम के आंकड़ों का उपयोग किया गया. अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार भारतीय और पाकिस्तानी महिलाओं में कम उम्र में अधिक घातक कैंसर होने का खतरा होता है. उन्होंने 1990 से 2014 के बीच भारतीय और पाकिस्तानी महिलाओं से संबंधित आंकड़ों का अध्ययन किया.

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4,900 भारतीय और पाकिस्तानी महिलाओं की कैंसर के लक्षणों, उपचार और बीमारी से उबरने के आंकड़ों की समीक्षा कीः
प्रमुख अनुसंधानकर्ता जया एम सतगोपन ने कहा कि हमारे अध्ययन के परिणाम भारतीय और पाकिस्तानी महिलाओं में स्तन कैंसर को लेकर जानकारी प्रदान करते हैं जो कैंसर के जोखिम वाले कारकों को बेहतर तरीके से समझने के लिए भविष्य के वैज्ञानिक अध्ययनों को दिशा-निर्देशित करने वाली अनेक अवधारणाएं सुझाते हैं. अध्ययनकर्ताओं ने 4,900 भारतीय और पाकिस्तानी महिलाओं के 2000 से 2016 के बीच के कैंसर के लक्षणों, उपचार और बीमारी से उबरने के आंकड़ों की भी समीक्षा की. पूर्व के अध्ययनों में भारतीय और पाकिस्तानी महिलाओं की कम भागीदारी रही थी और यह भी पता चला कि विभिन्न कारणों से उनके स्वास्थ्य सेवाएं हासिल करने में भी देरी हुई.
सोर्स भाषा

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: कोरोना के भय ने बढ़ाए मनोरोगी, कोरोना को हरा चुके 25 फीसदी मरीजों में अब ये दिक्कतें

जयपुर: देश-दुनिया में मौत का दूसरा नाम बनकर सामने आई महामारी कोरोना के कई पोस्ट"साइड इफेक्ट" भी सामने आ रहे है.लाखों की तादाद में लोग भले ही कोरोना को मात दे चुके है,लेकिन इस बीमारी ने काफी संख्या में मनोरोगी बढ़ा दिए है.जी हां ये कोई हमारा दावा नहीं, बल्कि राजस्थान समेत देशभर में कोरोना के मामलों को लेकर जारी अध्ययन की बानगी है.एक्सपर्ट की माने तो कोरोना का हर दूसरा गंभीर मरीज बीमारी से ठीक होने के बाद भी अवसाद की दिक्कतें झेल रहा है.आखिर कोरोना में क्यों बढ़े मानसिक रोग और चिकित्सकों मुताबिक कैसे तनाव किया जाए कम.विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर देखिए फर्स्ट इंडिया की एक्सक्लुसिव रिपोर्ट. कोविड 19 महामारी ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य से व्यापक रूप से असर दिखाया है.लोगों में डर, चिंता, अनिश्चितता, असुरक्षा की भावना, हताशा और यहां तक कि कई मामलों में तो अवसाद जैसे गंभीर बीमारी के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं.ऐसे पेशंट्स जो कोरोना संक्रमण को हराकर ठीक हो गए हैं, वे अब भी इस वायरस द्वारा दी गई दिक्कतों को झेलने पर मजबूर हैं.इसमें सबसे अधिक है मानसिक रोग.ऐसा नहीं है कि कोरोना से संक्रमित होने के बाद सभी पेशंट्स को मानसिक परेशानियां हो रही हैं लेकिन जिन लोगों को यह संक्रमण होकर ठीक हो चुका है, उनमें आधे से अधिक मरीजों में मानसिक बीमारियां देखने को मिल रही हैं.

कोरोना से हुए ठीक, लेकिन अब ये दिक्कतें:
- कोरोना फाइटर्स ने कोरोना को तो हरा दिया, लेकिन वे अभी भी तनावग्रस्त है. 
- इन मानसिक बीमारियों में ऐंग्जाइटी (Anxiety),इंसोमनिया (Insomnia),
- डिप्रेशन (Depression) पोस्ट ट्रोमेटिक स्ट्रेस डिस्ऑर्डर (PTSD) जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं.
-इनमें भी ज्यादातर रोगियों में नींद ना आने की समस्या सबसे अधिक देखी जा रही है.
-इस स्थिति में ये लोग हर समय बेचैनी का अनुभव करते हैं.

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 भारत में 19 करोड़ लोग किसी न किसी मानसिक विकास से ग्रसित:
-ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत में मानसिक रोगियों की संख्या काफी अधिक है
-तकरीबन 19 करोड़ 73 लाख लोग किसी ना किसी प्रकार की मानसिक बीमारी से ग्रसित हैं.
-यह आंकड़ा देश की कुल जनसंख्या का लगभग 14.3 प्रतिशत हैं.
-आंकड़े ये भी बताते हैं कि प्रत्येक बीस में से एक व्यक्ति अपने जीवन काल के दौरान जरूर अवसाद का शिकार होता है.
-यही हालात पूरी दुनिया का है, जिसका परिणाम आत्महत्या के रूप में सामने आता है
-दुनिया भर में में हर चालीस सेकंड में एक आत्महत्या की घटना होती है.

कोरोना से पीडित मरीजों में मानसिक विकार आने के पीछे चिकित्सकों के अलग अलग मत है.चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना में आइसोलेशन के दौरान मरीज अकेले में रहता है, जिसके चलते उसमें बीमारी के नेगेटिव आउटकम इफेक्ट ज्यादा रहते है.मरीज मल्टीपल मेडिकल कंसल्टेंसी लेता है, जिसके चलते कई बार भ्रम की स्थिति बन जाती है.इसके अलावा एक संभावित वजह ये भी बताई जा रही है कि कोविड-19 के कारण हमारे फेफड़ों में सूजन आती है.धीरे-धीरे यह शरीर के अन्य अंगों की तरफ भी बढ़ने लगती है.जिन रोगियों में यह सूजन दिमाग तक पहुंच जाती है, उनके ब्रेन की कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न होती है और उन्हें अलग-अलग तरह की मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

कुछ बातों का ध्यान रख हम मानसिक रोग की परेशानियों से बच सकते हैं:
डॉ अखिलेश जैन,विभागाध्यक्ष, मनोरोग ईएसआई मॉडल हॉस्पिटल भारत सरकार ने बताया कि कुछ बातों का ध्यान रख हम मानसिक रोग की परेशानियों से बच सकते हैं.

1. चिंता या भय महसूस होने पर विचलित नहीं हों. कोरोना जैसी परिस्थितियों में शुरुआत में इस तरह की भावनाएं आना स्वाभाविक हैं. खुद को ये समझाकर शांत रखने की कोशिश करें कि इस बीमारी में रिकवरी की रेट काफी अच्छी है. ये सिर्फ कुछ समय की बात है.
2. कभी भी ऐसा सोचकर तिरस्कृत महसूस न करें कि आपको अलग-थलग रहना है. आइसोलेशन कोई सजा नहीं है बल्कि ये एक अवसर है कि आप खुद को फिर से स्वस्थ करें और दूसरों को भी संक्रमित होने से बचाएं.
3. अनावश्यक एक साथ कई परामर्शों से बचें. विषय विशेषज्ञ डॉक्टर की ही सलाह सुनिए और उन पर विश्वास रखिए. अन्य किसी से सलाह तब ही लें जबकि तमाम कोशिशों को बावजूद स्थिति सुधर नहीं रही हो या और ज्यादा बिगड़ रही हो, वो भी इलाज कर रहे अपने डॉक्टर के संज्ञान में लाने के बाद.
4. सोशल मीडिया पर कई तरह के घरेलू नुस्खे आपस में शेयर किए जा रहे हैं. इन्हें अमल में लाने से पहले अपने विवेक का इस्तेमाल करें.
5. याद कीजिए अब से पहले कब आपके पास इतना खाली समय था ? अब तो आपके पास बहुतायत में वक्त ही वक्त है, तो अगर आपकी शारीरिक स्थिति अनुकूल है और डॉक्टर की अनुमति है तो अपनी दिनचर्या सुधारिए और दिन की शुरुआत हल्के व्यायाम, ध्यान और श्वास संबंधी व्यायाम से करें.
6. पर्याप्त पोषण और तरल पदार्थ का सेवन सुनिश्चित करें, चाहे आपको खाने की इच्छा नहीं हो तब भी. भरपूर पोषण इस संक्रमण से जंग में सबसे अधिक भरोसेमंद संसाधन है जो आपकी प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाकर संक्रमण घटाने में सबसे बड़ा हथियार है.
7. इस समय सोशल मीडिया का उपयोग एक वरदान या अभिशाप हो सकता है, ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसका उपयोग कैसे करते हैं. दोस्तों, परिवार और प्रियजनों के साथ जुड़ें, अपने नवाचारों को शेयर करें. लेकिन ध्यान रहे भ्रामक सूचनाओं से प्रभावित ना हों.
8. थोड़े- थोड़े अंतराल में पर्याप्त आराम करें क्योंकि यह आपको शारीरिक रूप से तरोताजा कर देगा और इससे आपका दिमाग भी सकारात्मक सोचने के लिए तैयार होगा.
9. धूम्रपान, मदिरा या किसी भी अन्य मादक पदार्थों के सेवन से पूरी तरह बचें। नशा आपकी स्थिति को और खराब करता है.
10.  अपने परिवार के निरंतर संपर्क में रहें और अपनी स्थिति के बारे में उन्हें अवगत कराते रहें। कभी भी अपनी भावनाएं न छुपाएं, खुले मन से सबकुछ शेयर करें.

कोरोना वायरस का मानसिक स्थिति पर इस तरह हावी होना और मानसिक रोगों को बढ़ाने वाली स्थिति देखकर हेल्थ एक्सपर्टस लोगों से हर वो संभव प्रयास करने की अपील कर रहे, जिससे कोरोना उन्हें संक्रमित ना कर सके. यानी हाइजीन का ध्यान रखें, खान-पान संबंधी सतर्कता बनाए रखें. पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें. मास्क और हैंडसैनिटाइजर का उपयोग करें.उम्मीद है कि लोग भी इस सुझाव पर ध्यान देंगे, जिससे न सिर्फ कोरोना पर जीत हासिल की जा सकेगी,बल्कि मानसिक रोग की दिक्कतें भी दूर होगी.

अगर घंटों कंप्यूटर के सामने बैठकर करते हो काम, तो कीजिए इन आहार का सेवन, नहीं होगी कोई परेशानी!

 अगर घंटों कंप्यूटर के सामने बैठकर करते हो काम, तो कीजिए इन आहार का सेवन, नहीं होगी कोई परेशानी!

जयपुर: आज की जीवनशैली बिल्कुल बदल गई है, जिसकी वजह से हमारे शरीर में कई तरह की बीमारियां घर कर लेती है. इन बीमारियों का पता तब चलता है, जब हमारे शरीर के किसी भी अंग में परेशानी होने लगती है.फिर हम डॉक्टरों के चक्कर लगाते लगाते परेशान हो जाते है. इसलिए बदलती जीवनशैली के साथ-साथ हमें शरीर का भी ध्यान रखना जरूरी है. आपको बता दें कि आज के इस डिजिटल युग में ज़्यादातर काम कंप्यूटर पर ही हो रहा है. लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने की वजह से आँखों में जलन, खुजली, आंखों से पानी गिरना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा कुछ समय बाद धुँधला दिखाई देने लगता है. साथ ही कई घंटों तक लगातार कंप्यूटर पर बैठ कर काम करने से बहुत थकावट हो जाती है. इससे पीठ दर्द की परेशानी भी होने लगती है. इसके लिए अपने खान-पान का खास ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है. आप भी घंटों कंप्यूटर पर काम करते हैं तो अपने आहार में ये चीजें जरूर शामिल कीजिए...

-कंप्यूटर पर काम करने से आंखों पर भी असर पड़ता है. इसके लिए अपने खाने में हरा धनिया शामिल कीजिए. धनिए में कैरोटेनॉइड होता है जो आंखों के लिए बहुत लाभदायक है.

-आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए विटामिन ए बहुत मददगार है. अंड़े में ये विटामिन भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इस लिए खाने में इसे जरूर शामिल कीजिए.

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-ग्रीन टी हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती है. ग्रीन टी पीने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है जो मोटापा कम करने में मददगार है.

-दूध में प्रोटीन होता है जो शरीर के लिए बहुत जरूरी है. 

-डार्क चॉकलेट इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक है. कंप्यूटर पर लगातार बैठे रहने से कमर में दर्द की शिकायत भी हो जाती है.  डार्क चॉकलेट के सेवन से दर्द को राहत मिलती है लेकिन इसका जरूरत से अधिक सेवन करने से नुकसान भी हो सकता है. 

-ओट्स में प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इससे वजन भी कंट्रोल रहता है और शरीर को एनर्जी भी मिलती है. 

-दही में प्रोबायोटिक्स बैक्टीरिया पाए जाते हैं जो पाचन प्रक्रिया को ठीक करने में मददगार है. इसे अपने आहार में जरूर शामिल करे. इससे पेट की गैस की समस्या नहीं होती.

-केले हमारी सेहत के लिए गुणकारी होता है. क्यों​कि इसमें पोटेशियम होता है जो बॉडी को एनर्जी प्रदान करता है. अगर आप इसका सेवन करेंगे तो इससे थकावट नहीं होगी.

इम्यूनिटी पावर बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक काढ़े का वितरण, 29 जड़ी बूटियों से तैयार हैं काढ़ा

इम्यूनिटी पावर बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक काढ़े का वितरण, 29 जड़ी बूटियों से तैयार हैं काढ़ा

बूंदी: बूंदी जिला आयुर्वेद अस्पताल द्वारा लगातार 150 दिनों से इम्यूनिटी पावर बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय के निर्देशानुसार तैयार आयुर्वेदिक काढ़े का वितरण किया जा रहा है. लगभग 29 जड़ी बूटी से तैयार इस काढ़े को अब कोविड-19 संक्रमित रोगियों पर भी इस्तेमाल किया जा रहा है. जिला कलक्टर से अनुमति के बाद जिला आयुर्वेद अस्पताल की ओर से इस कार्य के लिए टीम गठित की गई है.

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने में काफी मददगार:
शनिवार से कोविड-19 केयर सेंटर में भर्ती रोगियों को आयुर्वेदिक काढा पिलाया गया. आयुर्वेदिक चिकित्सकों की माने तो यह काढा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने में काफी मददगार है. अब संक्रमित मरीजों पर काढे के सार्थक परिणाम का इंतजार आयुर्वेद विभाग को भी होगा. जिला कलक्टर आशीष गुप्ता ने बताया कि किसान भवन स्थित कोविड केयर सेंटर में भर्ती मरीजों के लिए आयुर्वेद विभाग द्वारा काढ़ा तैयार कर पिलाया जा रहा है.

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29 जड़ी बूटियों से तैयार किया गया काढ़ा: 
जिससे की उनकी इम्युनिटी पावर मजबूत हो सके. वहीं कोरोना संक्रमण और अन्य बीमारियों से मरीजों का जीवन बचाया जा सके. जिला आयुर्वेदिक अस्पताल के प्रभारी डाॅ. सुनील कुशवाहा ने बताया कि वर्तमान में सेंटर में 28 मरीज भर्ती है, जिन्हें आज से काढ़ा पिलाना शुरू किया गया है. वहीं होम आइसोलेट एसिंप्टोमेटिक कोरोना संक्रमित को भी चिन्हित कर काढ़ा पिलाया जा रहा है. घर-घर जाकर टीम द्वारा इम्यूनिटी पावर बूस्टर के रूप में काम करने वाले 29 जड़ी बूटियों से तैयार इस काढ़े का वितरण किया जाएगा. पिछले 150 दिनों से आयुर्वेदिक काढा वितरण किया जा रहा है. अब तक 60 हजार से अधिक को यह काढा पिलाया जा चुका है.

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