जम्मू-कश्मीर में पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त- लंबे समय तक धारा 144 नहीं लगा सकते, इंटरनेट अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा

जम्मू-कश्मीर में पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त- लंबे समय तक धारा 144 नहीं लगा सकते, इंटरनेट अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा

जम्मू-कश्मीर में पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त- लंबे समय तक धारा 144 नहीं लगा सकते, इंटरनेट अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में लगी पाबंदियों पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट ने सरकार के फैसलों पर सवाल खड़े किए और धारा 144 के तहत जो भी रोक लगाई हैं, उन्हें सार्वजनिक पब्लिश करने को कहा गया है. इतना ही नहीं कोर्ट ने कहा कि लोगों को असहमति जताने का हक है. 

धारा 144 का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता:
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धारा 144 का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है, बेहद जरूरी हालात में ही इंटरनेट को बंद किया जा सता है. SC ने कहा कि धारा 144 को अनंतकाल के लिए नहीं लगा सकते हैं, इसके लिए जरूरी तर्क होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह तुरंत ई-बैंकिंग और ट्रेड सर्विस को शुरू करे.

सरकार अपने सभी आदेशों को दोबारा देखे:
इतना ही नहीं कोर्ट ने कहा है कि सरकार अपने सभी आदेशों को दोबारा देखे. जो गैरज़रूरी हैं, उन्हें वापस ले. कोर्ट ने कहा कि चिकित्सा जैसी आपातकालीन बुनियादी सेवाओं में कोई बाधा न आए और सरकार सभी तरह के आदेशों की समीक्षा करे और उन्हें प्रकाशित करे. कोई भी आदेश न्यायिक समीक्षा से परे नहीं है. इसके साथ ही 7 दिन के अंदर इन फैसलों का रिव्यू करने का आदेश दे दिया है.

सात दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी कमेटी: 
राज्य सरकार की ओर से जो फैसले सार्वजनिक किए जाएंगे, उसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया है. जो सरकार के फैसलों का रिव्यू करेगी और सात दिन के अंदर अदालत को रिपोर्ट सौपेंगी.
 

और पढ़ें