रियायती दर पर जमीन आवंटित मामलाः 67 प्रकरणों में आवंटन निरस्त करने की लटकी तलवार

रियायती दर पर जमीन आवंटित मामलाः 67 प्रकरणों में आवंटन निरस्त करने की लटकी तलवार

जयपुरः कौड़ियों के भाव संस्थाओं को आवंटित जमीन के मामले में 67 प्रकरण ऐसे हैं जिनमें संबंधित संस्था पर आवंटन निरस्त होने की तलवार लटक गई है, क्या है पूरा मामला जानने के लिए पढ़िए फर्स्ट इंडिया न्यूज़ की खास रिपोर्ट...

आवंटन की शर्तों की पालना नहीं करने के 67 प्रकरण आए सामनेः
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी शहरी निकायों को पिछले दिनों निर्देश दिए थे कि रियायती दर पर संस्थाओं को आवंटन के प्रकरणों की रिपोर्ट भेजी जाए. इसके लिए निकायों को हर प्रकरण का मौका मुआयना करने और आवंटित भूमि का उपयोग आवंटन के उद्देश्य के मुताबिक हो रहा है या नहीं, आदि के बारे में जानकारी भेजने के निर्देश दिए गए थे. इसके तहत कुल 193 निकायों ने स्वायत शासन विभाग को प्रकरणों की रिपोर्ट भेजी है. इसमें 67 प्रकरण  ऐसे सामने आए हैं, जिनमें आवंटन की शर्तों की पालना नहीं होने के कारण निकायों की ओर से आवंटन निरस्त किया जा सकता है.

इस रिपोर्ट में ये तथ्य आए सामनेः 
- 83 निकायों ने संस्थाओं को रियायती दर पर भूमि आवंटित की है.

-42 प्रकरण ऐसे हैं जिसमें कौड़ियों के भाव ली गई भूमि का जिस उद्देश्य के लिए आवंटन हुआ था, उसके अनुसार उपयोग नहीं किया जा रहा है.

-इनमें डूंगरपुर में .1, बांसवाड़ा में 4, अनूपगढ़ में 2, पीलीबंगा में 3, सूरतगढ़ में 4, राजगढ़ में 1, फलौदी में 1.

-जैसलमेर में 2, सिरोही में 6, नवलगढ़ में 1 और भीलवाड़ा में 17 प्रकरण शामिल हैं.

-25 प्रकरण ऐसे हैं जिनमें भूमि पर निर्माण करने की अवधि खत्म हो चुकी है, इसके बावजूद या तो भूमि खाली पड़ी है या निर्माण पूरा नहीं किया गया है.

-इनमें फतहनगर में 1, डूंगरपुर में 2, छोटी सादड़ी में 6, फलौदी में 2, जैसलमेर में 5, बाड़मेर में 1, झालरापाटन में 1.

-खैरथल में 1, किशनगढ़ में 1, गुलाबपुरा में 1 शाहपुरा भीलवाड़ा में 4 प्रकरण शामिल हैं.

25 प्रकरण ऐसे हैं जिनमें अवधि में निर्माण नहीं किया गयाः
निकायों की ओर से भेजी रिपोर्ट में 42 प्रकरण ऐसे सामने आए हैं जिनमें जिस उद्देश्य के लिए भूमि आवंटित की थी संस्था ने उसके विपरीत भूमि का उपयोग किया है. इसी तरह 25 प्रकरण ऐसे हैं जिनमें अवधि में निर्माण नहीं किया गया है. यह दोनों ही मामले आवंटन की शर्तों की अवहेलना में आते हैं. ऐसे में इन प्रकरणों में आवंटन निरस्त करने की तलवार लटक गई है. प्रदेश के बड़े शहरों के चार नगर निगम ऐसे हैं जिन पर सरकार की शक्ति का कोई असर नहीं है. स्वायत्त शासन विभाग की ओर से 4 दिसंबर को आदेश जारी करने, इसके बाद 16 दिसंबर को दोबारा आदेश जारी करने और फिर चेतावनी जारी करने का भी इन निगमों के अधिकारियों पर कोई असर नहीं हुआ है.

इन निगमों के अधिकारियों पर नहीं हुआ कोई असरः 
-जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और अजमेर के 4 नगर निगमों ने संस्थाओं को आवंटन के मामले में कोई जानकारी नहीं भिजवाई है

-110 निकाय ऐसे हैं जिन्होंने सरकार को बताया है कि इन निकायों ने किसी भी संस्था को रियायती दर पर भूमि आवंटित नहीं की है

-इन निकायों में बीकानेर नगर निगम और कोटा नगर निगम भी शामिल हैं

-चार प्रकरण ऐसे हैं जो न्यायालय में विचाराधीन है

शांति धारीवाल ने दे रखे हैं आवंटन की शर्तों की पालना नहीं करने वाले आवंटन निरस्त करने के आदेशः
स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल की ओर से पहले से ही आदेश जारी किया हुआ है कि जिन मामलों में आवंटन की शर्तों की पालना नहीं हो रही है उनका आवंटन निरस्त कर 3 दिन में जमीन का भौतिक कब्जा लिया जाए. ऐसे कई मामलों में निकायों ने आवंटन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
फर्स्ट इंडिया न्यूज़ से अभिषेक श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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