अद्भुत हैं 'बम वाली' देवी, मां के चमत्कार देख झुक गया था पाकिस्तानी ब्रिगेडियर; आपस में ही लड़ने लगे थे पाक रेंजर्स

अद्भुत हैं 'बम वाली' देवी, मां के चमत्कार देख झुक गया था पाकिस्तानी ब्रिगेडियर; आपस में ही लड़ने लगे थे पाक रेंजर्स

अद्भुत हैं 'बम वाली' देवी, मां के चमत्कार देख झुक गया था पाकिस्तानी ब्रिगेडियर; आपस में ही लड़ने लगे थे पाक रेंजर्स

जैसलमेर: भारत-पाक सीमा से सटे व जैसलमेर से 120 किलोमीटर दूर तनोट माता का मंदिर देश भर के श्रद्धालुओं की भी श्रद्धा का भी केन्द्र है. देश भर से श्रद्धालु नतमस्तक होने पहुंचते हैं. नवरात्रि के मौके पर तनोट मंदिर में आस्था का ज्वार उमड़ता है. विख्यात माता तनोट के मंदिर में होने वाली तीनों आरतियों में समूचा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भर जाता है और मंदिर में आरती के बाद परिसर मातारानी के जयकारों से गूंज जाता है. तनोट राय मन्दिर आमजन की आस्था का केन्द्र भी बनता जा रहा है. आज हम आप आपको एक ऐसे देवी मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो 1965 में भारत-पाक युद्ध का गवाह है. यह मंदिर राजस्थान के जैसलमेर में स्थित है. इस मंदिर को तनोट राय माता मंदिर के नाम से जाना जाता है. बताया जाता है कि यहां से पाकिस्तान बॉर्डर मात्र 20 किलोमीटर है. 

Tanot Mata Temple Jaisalmer

माता तनोट राय का मंदिर जैसलमेर से करीब 120 किमी दूर भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थि‍त है. तनोट माता को देवी हिंगलाज माता का एक रूप माना जाता है. हिंगलाज माता शक्तिपीठ वर्तमान में पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के लासवेला जिले में स्थित है. भाटी राजपूत नरेश तणुराव ने तनोट को अपनी राजधानी बनाया था. उन्होंने विक्रम संवत 828 में माता तनोट राय का मंदिर बनाकर मूर्ति को स्थापित किया था. भाटी राजवंशी और जैसलमेर के आसपास के इलाके के लोग पीढ़ी दर पीढ़ी तनोट माता की अगाध श्रद्धा के साथ उपासना करते रहे. कालांतर में भाटी राजपूतों ने अपनी राजधानी तनोट से जैसलमेर ले गए, लेकिन मंदिर वहीं रहा. तनोट माता का य‍ह मंदिर स्थानीय निवासियों का एक पूजनीय स्थान हमेशा से ही रहा है, लेकिन 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान जो चमत्कार देवी ने दिखाए उसके बाद तो भारतीय सैनिकों और सीमा सुरक्षा बल के जवानों की भी गहरी आस्था बन गई.

Tanot Mata Mandir On India Pakistan Border In Rajasthan - देश के इस सीमा पर  पाकिस्तान का हर बम हो जाता है फुस्स, पाक ब्रिगेडियर ने भी झुकाया शीश - Amar  Ujala

1965 के युद्ध के बम आज भी जिंदा, कभी नहीं फटे: 
तनोट माता के मंदिर से भारत-पाकिस्तान युद्ध की कई चमत्कारिक यादें जुड़ी हुई हैं. यह मंदिर भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तानी सेना के फौजियों के लिए भी आस्था का केन्द्र रहा है. कहते हैं कि 1965 के भारत-पाक युद्ध में पाक सेना ने हमारी सीमा में भयानक बमबारी करके लगभग 3 हजार हवाई और जमीनी गोले दागे थे, लेकिन तनोट माता की कृपा से किसी का बाल भी बांका नहीं हुआ. पाकिस्तानी सेना 4 किलोमीटर अंदर तक सीमा में घुस आई थी, पर युद्ध देवी के नाम से प्रसिद्ध इस देवी के प्रकोप से पाक सेना को उल्टे पांव लौटना पड़ा. पाक सेना को अपने 100 से अधिक सैनिकों के शवों को भी छोड़ कर भागना पड़ा. कहा जाता है कि युद्ध के समय माता के प्रभाव ने पाकिस्तानी सेना को इस कदर उलझा दिया था कि रात के अंधेरे में पाक सेना अपने ही सैनिकों को भारतीय समझ कर उन पर गोलाबारी करने लगे. नतीजा ये हुआ कि पाक सेना ने अपने ही सैनिकों का अंत कर दिया. इस घटना के गवाह के तौर पर आज भी मंदिर परिसर में 450 तोप के गोले रखे हुए हैं.

Tanot Mata Mandir Jaisalmer History In Hindi - तनोट माता का मंदिर:  पाकिस्तान ने यहां गिराए थे सैकड़ों बम, लेकिन एक भी नहीं फटा | Patrika News

पाकिस्तानी ब्रिगेडियर ने चढ़ाया था चांदी का छत्र: 
बताया जाता है कि 1965 के युद्ध के दौरान माता के चमत्कारों को देखकर पाकिस्तानी ब्रिगेडियर शाहनवाज खान नतमस्तक हो गया था. युद्ध हारने के बाद शाहनवाज ने भारत सरकार से मंदिर में दर्शन की परमिशन मांगी थी. करीब ढाई साल में उन्हें अनुमति मिली. बताया जाता है तब शाहनवाज खान की ओर से माता की प्रतिमा पर चांदी का छत्र भी चढ़ाया गया था.

1971 युद्ध के बाद BSF ही संभालती है मंदिर की व्यवस्था की जिम्मेदारी:
करीब 1200 साल पुराने तनोट माता के मंदिर के महत्व को देखते हुए बीएसएफ ने यहां अपनी चौकी बनाई. बीएसएफ जवान ही अब मंदिर की पूरी देखरेख करते हैं. मंदिर की सफाई, पूजा अर्चना और यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं जुटाने तक का सारा काम बीएसएफ बखूबी निभा रही है. साल भर यहां आने वाले श्रद्धालुओं की जितनी आस्था इस मंदिर के प्रति है, उतनी ही आस्था देश के इन जवानों की भी है.

मंदिर परिसर में घूमते हैं बकरे: 
पहले देवी मंदिरों में पशु बलि दी जाती थी, लेकिन भारत सरकार ने पशु बलि पर रोक लगा दी. इसके बाद से यहां मंदिर में मन्नत पूरी होने के बाद लोग जिंदा बकरे मंदिर को भेंट करके लौट जाते हैं. फिलहाल मंदिर में 2 हजार से भी ज्यादा जीवित बकरे हैं, जो आस-पास के इलाकों में विचरण करते नजर आ जाते हैं.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान के बंधे हैं रूमाल:
साल 1965 और 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध का साक्षी जैसलमेर का तनोट माता मंदिर आज जन-जन की आस्था का केंद्र बन गया है. यह मंदिर भारत की पहली रक्षा पंक्ति सीमा सुरक्षा बल (BSF) की आस्था का भी सबसे बड़ा स्थल है. इस अनूठे चमत्कारिक मंदिर में लोग मन्नत मांगने के लिए रूमाल बांधते हैं. मंदिर में 50 हजार से भी ज्यादा रूमाल बांधने वालों में कई मंत्री भी शामिल हैं. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी यहां माता से मन्नत मांग चुके हैं.

तनोट माता मंदिर,जैसलमेर | श्रद्धालु रुमाल बांधकर मन्नत मांगते हैं |  भारत-पाकिस्तान बॉर्डर - YouTube

मंदिर में आम आदमी के साथ-साथ कई बड़े नेताओं के भी रूमाल बंधे:
इस विख्यात मंदिर में आम आदमी के साथ-साथ कई बड़े नेताओं के भी रूमाल बंधे हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जब भी जैसलमेर का दौरा करते हैं, तब तनोट माता मंदिर जरूर आते हैं. एक बार अपनी धर्मपत्नी के साथ आकर वे भी यहां मन्नत का रूमाल बांध चुके हैं. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की भी तनोट माता में बड़ी आस्था है. उनकी भी मन्नत का रूमाल इस मंदिर में बंधा है. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जैसलमेर यात्रा के दौरान अपनी धर्मपत्नी के साथ आए थे. तब इसी मंदिर में पूजा-अर्चना कर मनोकामना पूर्ती के लिए मन्नत का रूमाल यहां बांधकर गए थे.

और पढ़ें