यहां नियम-कायदे नहीं, अधिकारियों की मर्जी से होते हैं फैसले

Naresh Sharma Published Date 2018/09/29 02:34

जयपुर (नरेश शर्मा)। भ्रष्टाचार के लिए बदनाम रहे जलदाय विभाग में चहेतों को ठेका देने के नाम पर फिर से खेल होने लगे हैं। राजधानी जयपुर में ही अधिकारी मनमर्जी से टेंडर पर शर्त लगा रहे हैं या छूट दे रहे हैं। सारा खेल छोटे ठेकेदारों को दूर करके बड़े ठेकेदारों को काम देने का है। दूसरी तरफ जिम्मेदारी अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। हालात यह है कि ठेकेदारों ने अब टेंडर का बहिष्कार शुरू कर दिया है।

जलदाय मंत्री सुरेंद्र गोयल राज्य की जनता को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नई नई योजनाएं लाते हैं, लेकिन विभाग के अधिकारी कुछ अलग ही खेल करने में लगे हुए हैं। बड़े ठेकेदारों को काम मिले, इसके लिए नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं। लेकिन उसके बाद भी हालत यह है कि राजधानी के किसी रीजन में नई शर्त लगाई जा रही है, तो किसी में नहीं। शर्त भी मनमर्जी से तय होती है। सब कुछ विभाग के आला अफसरों की नाके नीचे हो रहा है, लेकिन कार्रवाई कोई नहीं कर रहा, क्योंकि यह गठजोड़ का मामला है, जो तोड़ना नहीं चाहते।

जल प्रदाय योजनाओं के नए नियम :
— 2 की बजाय 5 वर्ष के लिए निविदा
— ऐसे में बड़े ठेकेदार ही बन सकते हैं योग्य
—5 साल का बजट हो जाता है ज्यादा
— कांट्रेक्ट वेल्यू को लेकर भी बना दी शर्त
— अनुमानित लागत का एक तिहाई जरूरी
— इस नियम को भी मनमर्जी से करते हैं लागू

ये हैं टेंडर की कहानियां :
किस्सा नंबर एक : झोटवाड़ा में नॉर्थ डिवीजन 4 का मामला

— 59.57 लाख का था टेंडर
— कुल अनुमानित राशि का एक तिहाई नियम लगाया
— एक वर्ष का एक तिहाई राशि का नियम लगाया
— इसी इलाके के लिए 29.77 लाख का टेंडर जारी हुआ
— इस टेंडर में कोई शर्त नहीं लगाई गई
— यानी एक ही इलाके में कभी शर्त लगाई, कभी हटाई

किस्सा नंबर दो : नॉर्थ डिवीजन 4 का ही एक और मामला
— 29.77 लाख रुपए के टेंडर में शर्त लगा दी
— यहां पर 11 लाख के टेंडर में शर्त नहीं लगाई
— साउथ डिवीजन 2 व 4 में भी अलग-अलग नियम
— किसी टेंडर में नई शर्त लागू, किसी में नहीं

अतिरिक्त मुख्य अभियंता दिनेश कुमार सैनी को पूरे मामले की जानकारी दे दी गई, लेकिन वे इसके अलावा कुछ नहीं कहते कि 'मामला दिखाता हूं।' तब तक तो ठेके में कार्य आदेश जारी हो जाते हैं। अब हालत बिगड़नी लगी है। जयपुर में शहर में ठेकेदारों ने कार्य बहिष्कार कर दिया है। सांगानेर में एनआईटी नंबर 25, निर्माण नगर में एनआईटी नंबर 23, मानसरोवर में एनआईटी नंबर 22, सूर्य नगर में एनआईटी नंबर 27 का बहिष्कार कर दिया गया है और कोई भी ठेकेदार आगे नहीं आ रहा।

अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि बीएसआर रेट भी तय नहीं हो रही। कुछ जगह संचालन व संधारण का ठेका पूरा होने को है, लेकिन अभी तक टेंडर ही नहीं किए गए हैं। ऐसे में अब पानी सप्लाई की समस्या बढ़ सकती है। अब देखना है कि सचिवालय में बैठे आला अफसर इस पूरे मामले पर ध्यान देते हैं या फिर डिवीजन में बैठे अफसर चहेते ठेकेदारों पर मेहरबान रहेंगे।

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