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GST में कटौती के बाद नए साल में कदम रखते ही सस्ते हुए ये सामान

GST में कटौती के बाद नए साल में कदम रखते ही सस्ते हुए ये सामान

नई दिल्ली साल 2018 बीत चुका है और अब नए साल यानि 2019 में कदम रखते ही आमजन को कई चीजों में राहत मिलने लगी है। राहत इस चीज को लेकर है कि लोगों को अब कई चीजें खरीदने के लिए पहले की अपेक्षा अब कम दाम चुकाने पड़ रहे हैं। दरअसल, हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स यानि जीएसटी काउंसिल की 31वीं बैठक के दौरान लिए गए फैसलों में जीएसटी की दरों में कटौती की गई थी। ऐसे में अब नए साल में जीएसटी की नई दरें लागू हो गई है और अब कई वस्तुओं के दामों में भी कटौती हुई है।

गौरतलब है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में रोजमर्रा के 33 सामान सस्ते करने पर सहमति बनी थी, वहीं 7 चीजों पर 28% की जगह 18% टैक्स करने पर सहमति हुई। इसके अलावा 33 चीजों को 18% के स्लैब से घटाकर 12% एवं 5% के स्लैब में डाला गया। दूसरी ओर, 100 रुपए से ज्यादा के सिनेमा पर 28% की जगह 18% GST चार्ज लगाए जाने का फैसला लिया गया था। ऐसे में अब नया साल शुरू होने के साथ ही जीएसटी की नई दरें लागू हो गई है और कई चीजें भी सस्ती हुई हैं।

जीएसटी की नई दरें लागू होने के साथ ही अब उपभोक्ताओं को उनकी पसंदीदा चीजों पर कीमतों में कटौती की सौगात मिली है। घर में इस्तेमाल किए जाने वाले एलपीजी गैस से लेकर मनोरंजन के सबसे अहम साधन टेलिविजन तक की कीमतों में कटौती हुई हैं। वीडियो गेम कंसोल और एचएस कोड 9504 के तहत आने वाले गेम से जुड़ी अन्य वस्तुओं पर जीएसटी दर 28 फीसदी से घटकर 18 फीसदी होने से ये अब सस्ती हो गई हैं। नए साल में डिजिटल कैमरा भी सस्ते हो गए हैं। दरअसल, इसपर लगने वाले जीएसटी दर में कमी की वजह से ये सस्ते हुए हैं।

सरकार ने पिछले महीने जीसएटी काउंसिल की बैठक के दौरान टायर पर जीएसटी दर को 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया है, जिससे नए साल में अब टायर भी सस्ते हो गए हैं। साथ ही दिव्यांगों के वाहनों के कल-पुर्जे और छड़ियां भी नए साल में सस्ती हो गई हैं। सब्जियां में कच्ची या उबाली या भाप में पकाई गईं, फ्रोजेन, ब्रांडेड और डिब्बाबंद सब्जियां भी नए साल में सस्ती हो गई हैं। नए साल में पावर बैंक की कीमतों में भी कमी आई है। सरकार ने इनपर लगने वाली जीएसटी दरों में कटौती की है, जिसके कारण नए साल में इनकी कीमतें गिरी हैं।

माल वाहक वाहनों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी दर को 18 से घटाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया, जिसके कारण अब ऐसे वाहनों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस सस्ता हो गया है। सब्सिडी वाला LPG सिलिंडर 5.91 रुपये और गैर-सब्सिडी वाला सिलिंडर 120.50 रु. सस्ता हुआ है। दिल्ली में सब्सिडी वाला सिलिंडर 494.99 रुपये का होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें घटने की वजह से विमानों के ईंधन के दाम में रेकॉर्ड 14.7 फीसदी की गिरावट आई है और यह पेट्रोल-डीजल से भी सस्ता हो गया है। हवाई जहाज को उड़ाने के लिए एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) का इस्तेमाल होता है।

अरूण जेटली के सम्बोधन की मुख्य बातें :
— जीएसटी काउंसिल की बैठक में रेवेन्यू और रेट घटाने पर हुई चर्चा
— कई राज्यों ने रेवेन्यू के लिहाज से बेहतर प्रदर्शन किया, कुछ राज्यों के रेवेन्यू में सुधार नहीं।
— महाराष्ट्र ,बंगाल जैसे राज्यों में जीएसटी की वसूली अच्छी रही।
— सीमेंट और ऑटो पार्ट्स को छोड़कर कुल 6 वस्तुओं को 28 फीसदी से 18 फीसदी जीएसटी स्लैब में लाया गया।
— सिनेमा टिकट, थर्ड पार्टी इंश्योरेंस आदि पर जीएसटी दरें घटाई गईं।
— टायर, एलईडी टीवी, लीथियम बैटरी, वील चेयर, फुटवियर, फ्रोजन वेजिटेबल बिलियर्ड्स/स्नूकर आदि पर जीएसटी दरें घटाई गईं।
— जीएसटी रिफंड मिलने में दिक्कत हो रही थी, इसलिए जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया को आसाना बनाया जा रहा है।
— 31 मार्च 2019 तक जीएसटी रिटर्न भरने पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।
— कुल 17 वस्तुओं और 6 सर्विसेज पर जीएसटी में कमी की गई।
— जनवरी में होगी जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक। 

किन किन चीजों पर घटाई जीएसटी दर :
— टायर, वीसीआर और लिथियम बैट्री को 28 फीसदी से 18 फीसदी पर लाया गया।
— 32 इंच तक के टीवी पर दरें 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी की गईं।
— 100 रुपये से ऊपर के सिनेमा टिकट पर 18 फीसदी जीएसटी लगेगा।
— 100 रुपये से कम से सिनेमा टिकट पर 12 फीसदी जीएसटी लगेगा। 
— टायर पर जीएसटी 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दी गई है।
— व्हील चेयर पर जीएसटी 28 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी की गई।
— फ्रोजन वेजिटेबल पर जीएसटी पांच फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया गया है।
— फुटवियर पर जीएसटी दर 18 से घटाकर 12 फीसदी और पांच फीसदी की गई।
— बिलयर्डस और स्नूकर पर जीएसटी दर 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी की गई।
— लीथियम बैट्री पर जीसएटी दर 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी की गई।
— थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस पर जीएसटी 18 से घटाकर 12 फीसदी की गई।
— धार्मिक यात्रा पर दरें 18 फीसदी से घटाकर 12 और पांच फीसदी की गईं।

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जयपुर: सालों पहले लगे पेसमेकर में संक्रमण होने के कारण उसे तार समेत हार्ट से निकालने के जटिल केस को शहर के डॉक्टर्स ने सफलतापूर्वक कर दिखाया. प्रदेश में पहली बार इस तरह का केस हुआ है जब मरीज को 27 साल पहले लगे पेसमेकर और तार को इंफेक्शन होने पर बिना ओपन हार्ट सर्जरी के हृदय में से निकाला गया. लीड एक्सट्रैक्शन नामक यह प्रक्रिया इतनी जटिल थी कि तार निकालने में जरा भी चूक होती तो मरीज की उसी समय मृत्यु हो सकती थी. शहर के इटरनल हॉस्पिटल में डॉक्टर्स ने नई तकनीक लीड लॉकिंग डिवाइस और टाइट रेल डिवाइस की सहायता से इसे सफल बनाया.

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मात्र 14 वर्ष की उम्र में पेसमेकर लगाया गया था: 
इटरनल हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल व इलेक्ट्रोफिजीयोलॉजी डायेक्टर डॉ. जितेंद्र सिंह मक्कड़ ने बताया कि जयपुर से ही 41 वर्षीय मरीज को कम धड़कन के चलते मात्र 14 वर्ष की उम्र में पेसमेकर लगाया गया था. अब तक दो बार उनके पेसमेकर की बैटरी बदली गई. कुछ माह पहले पेसमेकर की जगह में सूजन व मवाद निकलने की स्थिति मे उन्हें इटरनल हॉस्पिटल दिखाया गया जहां कुछ टेस्ट होने के बाद यह पता चला कि उनके पेसमेकर और तार में इंफेक्शन हो गया है. डॉ. मक्कड़ ने बताया कि अगर यह समय पर नहीं निकाला जाता तो इंफेक्शन मरीज के पूरे शरीर में फैल जाता, जिससे उसकी जिन्दगी खतरे में पड़ सकती थी. 

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हृदय से तार निकाला बेहद जोखिम भरा काम:

- दरअसल, पेसमेकर और तार इम्प्लांट करने के बाद जैसे-जैसे पुराना होता जाता है, वह शरीर की नसों और टिश्यू के साथ चिपकने लगता है.

- मरीज के पेसमेकर लगे 27 साल हो चुके थे.

- ऐसे में पेसमेकर की तार हृदय की नसों और टिश्यू के साथ अच्छे से चिपक गई थी.

- तार को निकालने में जरा सी लापरवाही होने पर नस या हृदय की झिल्ली फटने का खतरा था.

- नई तकनीक लीड लॉकिंग डिवाइस और टाइट रेल डिवाइस की सहायता से सफल किया केस.

- इस तकनीक में पेसमेकर की तार के साथ चिपकी नसों और दूसरे टिश्यू को निकालने के लिए पहले लीड लॉकिंग डिवाइस से तार को पकड़ा गया. 

- फिर टाइट रेल डिवाइस से धीरे-धीरे नसों और टिश्यू से उसे अलग किया गया.

- डॉ. अजीत बाना ने बताया कि लीड एक्सट्रैकेशन एक कठिन प्रक्रिया है जो आमतौर पर ओपन हार्ट सर्जरी द्वारा की जाती है. 

- इस बार डॉ मक्कड़ के नेतृत्व में कार्डियोलॉजी टीम ने बिना किसी ऑपरेशन के लीड लेकर अभूतपूर्व काम किया है. 

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जयपुर: राज्य राजस्व आसूचना निदेशालय यानी SDRI ने नागौर जिले में खान और परिवहन विभाग के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की है. एसडीआरआई ने दो जगहों पर खानों में रॉयल्टी चोरी और मोटर वाहन कर चोरी के रूप में 5 करोड़ टैक्स चोरी का खुलासा किया है. कार्रवाई नागौर जिले के डीडवाना में भोजास और निम्बीजोधा गावों में की गई है. 

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शिकायत के बाद एसडीआरआई की टीमों ने औचक जांच और कार्रवाई की: 
नागौर जिले में निम्बीजोधा और भोजास गांवों के पास मेसेनरी स्टोन की खानों की जांच में करोड़ों रुपए की खान की रॉयल्टी और परिवहन कर की कर चोरी उजागर हुई है. एसडीआरआई को जानकारी मिली थी कि निम्बीजोधा में खान विभाग द्वारा आवंटित मेसेनरी स्टोन की खानों में अवैध खनन किया जा रहा है. शिकायत के बाद एसडीआरआई की टीमों ने औचक जांच और कार्रवाई की. जांच में दो खानों के मध्य गेप एरिया में खनन कार्य होता पाया गया. गेप एरिया में 30 मीटर चौड़ाई, 77 मीटर लम्बाई और 12 मीटर गहराई में खनन कार्य किया हुआ मिला. इससे निकाले गए मेसेनरी स्टोन की मात्रा 72072 मीट्रिक टन पाई गई. खनिज की पेनेल्टी सहित रॉयल्टी लगभग 2 करोड़ मानी गई है. जुर्माना राशि 2 लाख सहित यह राशि 2 करोड़ 2 लाख बनती है, जिसे खनन पट्टाधारी से वसूल किए जाने का नोटिस खान विभाग द्वारा दिया जा रहा है. इसके अलावा नागौर के ही तांतवास भोजास गांव में 6 खानों के सैम्पल लिए गए. 

लगभग 1 लाख मीट्रिक टन खनिज प्राप्त हुआ:
खान पर पड़े खनिज का भौतिक सत्यापन किया गया जो कि लगभग 1 लाख मीट्रिक टन प्राप्त हुआ. खनन पट्टाधारी कम्पनी नोखा मिनरल्स एवं कंस्ट्रक्शन के रिकार्ड की जांच करने पर पता चला कि खानों से पूरा खनिज NKC प्रोजेक्ट प्रा. लि. जोधपुर को भेजा जा रहा है. जिसका इस्तेमाल NHAI के सड़क निर्माण कार्य में किया जा रहा है. नियमानुसार सड़क निर्माण कार्य में खनिज का इस्तेमाल शॉर्ट टर्म परमिट जारी होने पर ही किया जा सकता है. खनन कम्पनी सभी जारी किए गए खनिज के परमिट उपलब्ध नहीं करवा सकी. इस पर नोखा मिनरल्स एवं कंस्ट्रक्शन पर लगभग 2 करोड़ 80 लाख रुपए की रॉयल्टी चोरी का अनुमान खान विभाग और एसडीआरआई की टीम ने किया है.

सरहदी जिले का एक अनूठा पुलिस थाना, 27 सालों में बलात्कार का एक भी मुकदमा नहीं हुआ दर्ज 

राशि के वसूली के लिए नोटिस देने की कार्रवाई शुरू कर दी:
खान विभाग नागौर की टीम ने इस राशि के वसूली के लिए नोटिस देने की कार्रवाई शुरू कर दी है. मौके पर ही नागौर डीटीओ की टीम ने एक जेसीबी और 2 डम्परों के दस्तावेज जांचे, जिनका टैक्स जमा नहीं हुआ था. इस पर इनका चालान बनाया गया. यह प्रकरण इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि एक ही व्यक्ति के विरू़द्ध एसडीआरआई की खनन, परिवहन, पंजीयन एवं मुद्रांक एवं वाणिज्यिक कर शाखा की टीमों ने एक साथ मिलकर कार्रवाई की है और एसडीआरआई का गठन भी इन्हीं विभागों की कर चोरी पकड़ने के उद्देश्य से किया गया है. 

...काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

जोधपुर हाईकोर्ट में कोरोना से हड़कंप, जज का निजी सचिव मिला पॉजिटिव

जोधपुर: राजस्थान हाई कोर्ट मुख्य पीठ जोधपुर के एक न्यायाधीश के निजी सचिव के कोरोनावायरस संक्रमित पाए जाने के बाद हाईकोर्ट में हड़कंप मच गया. जिसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने हाई कोर्ट सीजे इंद्रजीत मोहंती के आदेश पर राजस्थान हाईकोर्ट के सभी कार्यों को तुरंत सस्पेंशन करने का आदेश जारी किया.

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कई अन्य कर्मचारियों और न्यायाधीशों से सीधे संपर्क में आया:
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने अपने आदेश में यह बताया कि राजस्थान हाई कोर्ट में कार्यरत कर्मचारी कोरोनावायरस संक्रमित पाया गया है और वह कई अन्य कर्मचारियों और न्यायाधीशों से सीधे संपर्क में आया है. ऐसे में राजस्थान हाई कोर्ट मुख्य पीठ के सभी कार्यों को तुरंत प्रभाव से 9 जुलाई 2020 के दिन सस्पेंड किया जाता है. हाई कोर्ट न्यायाधीश के निजी सचिव की कोरोनावायरस संक्रमित पाए जाने के बाद, चिकित्सा विभाग की टीम को हाईकोर्ट बुलाया गया है.

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हाई कोर्ट में कार्यरत कर्मचारी व न्यायाधीश की कोरोना जांच की जाएगी: 
अब सभी हाई कोर्ट में कार्यरत कर्मचारी व न्यायाधीश की कोरोना जांच की जाएगी. इसके अलावा नगर निगम की दमकलों के माध्यम से राजस्थान हाई कोर्ट के नए परिसर को सोडियम हाइपोक्लोराइट का छिड़काव कर पूरी तरह से संक्रमण रहित किया जाएगा. न्यायाधीश के निजी सचिव के पॉजिटिव पाए जाने के तुरंत बाद सभी अधिवक्ताओं को हाई कोर्ट परिसर से बाहर जाने के आदेश दे दिए गए. 

सरहदी जिले का एक अनूठा पुलिस थाना, 27 सालों में बलात्कार का एक भी मुकदमा नहीं हुआ दर्ज

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जैसलमेर: जिले में एक थाना ऐसा भी है जहां 27 वर्ष में महज 60 मुकदमे दर्ज हुए हैं और जहां पुलिस कर्मियों के पास कोई काम ही नहीं है. कई बार पूरे साल में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं होता. इस थाने को 27 साल तक हेड कांस्टेबल ही संभालता रहा है. शाहगढ़ का यह थाना जैसलमेर में पाकिस्तान सीमा से सटा है, जहां 27 वर्ष में महज 60 मुकदमे दर्ज हुए हैं. थाना वीरान मरुस्थल क्षेत्र में है, जहां आसपास कोई मनुष्य मुश्किल से ही नजर आता है. आइए बताते है ऐसे थाने की कहानी... 

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यह थाना अपने आप में मिसाल बना हुआ:  
देश के अमूमन लगभग हर थाना क्षेत्र में प्रतिदिन हत्या, बलात्कार और चोरी-डकैती के मामले बड़ी संख्या में दर्ज होते रहते हैं. वहीं, राजस्थान के जैसलमेर से लगती अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर एक ऐसा पुलिस थाना मौजूद है जो अपने आपमें काफी अनूठा है. जी हां, इस पुलिस थाने में पूरे साल एक भी मुकदमा दर्ज नहीं होता है. अगर कभी एक दो मामले दर्ज होते भी हैं तो वो भी छोटी-मोटी चोरी का. पिछले 27 सालों में 1993 में पुलिस थाना शुरू होने के बाद यानी अभी तक एक भी बलात्कार का मामला दर्ज नहीं हुआ है. हत्या तो बहुत दूर की बात है. यह थाना अपने आप में मिसाल बना हुआ है. इस थाने का नाम शाहगढ़ बल्ज है. यह थाना राजस्थान के जैसलमेर से लगती अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के मात्र 15 किलोमीटर पर बना हुआ है. इस थाने में 27 सालों से धारा 302 यानी हत्या का मुकदमा व 307 यानी हत्या के प्रयास का एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है. इस थाने के आसपास ढांणियों में रहने वाले ग्रामीण इतने प्रेम व भाई चारे के साथ यहां रहते हैं कि 27 सालों में मात्र यहां करीब 60 मुकदमे ही दर्ज हुए हैं. इस वर्ष 6 महीनों में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है. न ही कभी किसी महिला और पुरुष कैदी को थाने की जेल में कैद रखा गया. 

महिला और पुरुष बैरक भी अपराधियों के लिए तरस रही: 
भारत-पाक सीमा के निकट शाहगढ़ बल्ज पर बना हुआ थाना सचमुच एक ऐसी मिसाल बना हुआ है. जहां अपराध का दूर-दूर तक वास्ता नहीं है. इस थाने की सबसे बड़ी दिलचस्प बात यह है कि शाहगढ़ क्षेत्र में इस थाने की एक मात्र बिल्डिंग बनी हुई है. आसपास कई गांव, कई कस्बे हैं, जहां करीब 4000 की आबादी वाले इस क्षेत्र में ग्रामीण दूर-दूर ढांणियों में रहते हैं. इस थाने की बिल्डिंग में बने हुए महिला और पुरुष बैरक भी अपराधियों के लिए तरस रही है. जानकारी के मुताबिक, महिला बैरक में आज तक किसी महिला कैदी को नहीं रखा गया है क्योंकि किसी महिला-पुरुष पर गंभीर अपराध का मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है. यही स्थिति पुरुष बैरक की भी बनी हुई है. हालांकि, इस थाने की एक समस्या है कि यहां आवागमन के साधन नहीं हैं. जैसलमेर शहर जाना हो तो वहां से गुजरने वाले बी.एस.एफ के वाहनों में लिफ्ट लेकर ही आगे जाया जा सकता है.

अब तक करीब 60 मुकदमे ही इस थाने में दर्ज हुए:
इस थाने पर इंस्पेक्टर सहित कुल 15 पुलिसकर्मियों की स्ट्रेन्थ हैं लेकिन यहां वर्तमान में एक सब इंस्पेक्टर सहित 9 पुलिसकर्मी तैनात है. 1995 में तारबंदी से पूर्व सीमा पार होने वाली तस्करी व सीमाई अपराध घटित होते रहते थे लेकिन तारबंदी के बाद से तस्करी और अन्य अवांछनीय गतिविधियों में विराम लग गया है. 1993 में इस थाने की स्थापना हुई थी तब से लेकर अब तक करीब 60 मुकदमे ही इस थाने में दर्ज हुए हैं. पिछले कुछ सालों का आंकड़ा देखे तो इस थाने में 2005 में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ. 2006 में एक, 2007 में दो, 2008 में एक 2009 में जीरो, 2010 में जीरो, 2011 में एक, 2012 में चार, 2013 में दो, 2014 में दो, 2015 में तीन मुकदमे दर्ज हुए जबकि 2016 में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ. 2019 में 2 मुकदमे दर्ज हुए थे जबकि इस साल अभी तक एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है. ये अपराध रहित थाना पूरे देश में एक मिसाल बना हुआ है. 

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कई साल बीत जाने के बावजूद भी मुकदमे दर्ज नहीं होते:
शाहगढ़ का यह थाना जैसलमेर में पाकिस्तान सीमा से सटा है. सबसे बड़ी बात है कि 60 मुकदमे में एक भी केस दुष्कर्म का नहीं है. थाना वीरान मरस्थल क्षेत्र में है, जहां आसपास कोई आदमी मुश्किल से ही नजर आता है. यहां रिपोर्ट दर्ज कराना भी मुश्किल काम है, क्योंकि थाने तक पहुंचने में करीब एक डेढ़ घंटा लगता है. वहीं इस थाने में तैनात पुलिसकर्मी और थाने के आसपास रहने वाले ग्रामीण बताते हैं कि यहां पर कई साल बीत जाने के बावजूद भी मुकदमे दर्ज नहीं होते. छोटे-मोटे मामले मिल बैठ कर निपटा लेते हैं. 

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जयपुर: 5 दिन पहले प्रदेश सरकार ने राजस्थान में उच्च शिक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्रमोट करने का फैसला लिया, लेकिन उसके 2 दिन बाद ही यूजीसी ने पूरे देश में उच्च शिक्षा के अंतिम वर्ष की परीक्षाएं अनिवार्य रूप से आयोजित करवाने की गाइड लाइन जारी की. यूजीसी की गाइडलाइन जारी होने के बाद ही उच्च शिक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थी असमंजस में पड़ गए. 

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एनएसयूआई यूजीसी की गाइड लाइन के विरोध में उतर चुकी: 
यूजीसी की गाइडलाइन के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने जहां यूजीसी की गाइडलाइन का अध्ययन करने के बाद कोई फैसला लेने का निर्णय लिया, तो वहीं छात्र संगठन एनएसयूआई यूजीसी की गाइड लाइन के विरोध में उतर चुकी है. एनएसयूआई छात्र संगठन की ओर से आज राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर विरोध प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शन के दौरान यूजीसी और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. प्रदर्शन कर रहे छात्र नेताओं ने यूजीसी की गाइडलाइन की प्रतियां भी जलाई.

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यूजीसी को छात्रों के स्वास्थ्य से कोई लेना देना नहीं:
विरोध प्रदर्शन में एनएसयूआई प्रदेशाध्यक्ष अभिमन्यु पूनिया सहित बड़ी संख्या में छात्र नेता मौजूद रहे. अभिमन्यु पूनिया ने कहा कि "परीक्षाएं रद्द करवाने की मांग को लेकर 2 महीने से एनएसयूआई का पूरे प्रदेश में आंदोलन चल रहा था. जिसके बाद सरकार ने छात्र हित में बड़ा फैसला लेते हुए छात्रों को प्रमोट करने का फैसला लिया, लेकिन केंद्र सरकार और यूजीसी को छात्रों के स्वास्थ्य से कोई लेना देना नहीं है. वर्तमान दौर में कोरोना का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है, ऐसे में यूजीसी द्वारा परीक्षाओं के आयोजन को लेकर लिया गया फैसला छात्र हित में नहीं है. अगर यूजीसी अपने इस फैसले को नहीं बदलती है तो एनएसयूआई की ओर से पूरे देश में एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा. 

गाय के पैर बांधकर फांसी देने की अमानवीय हरकत, ग्रामीणों में रोष

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रेवदर(सिरोही): लोग इंसान के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, ये समझ आता है, लेकिन जो लोग बेजुबानों के साथ अमानवीय हरकत करते हैं वो समझ से परे हैं. कुछ दिनों से गुलाबगंज पालडी गांव में गाय के पैर बांधकर फांसी देने की घटना ने सबको झकझोर दिया है. रेवदर तहसील के गुलाबगंज गांव मे कुछ असामाजिक तत्वों ने गाय के पैर बांधकर गले में फंदा डाल उसे पेड़ की डाली से बांध मौत के घाट उतार दिया. जिसकी सूचना सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद ग्रामीण और हिन्दू वादी संगठन के नेता और प्रतिनिधि गुलाबगंज गांव पहुंचे.

भाई की मौत से आक्रोशित मृतक का भाई चढ़ा टावर पर, पुलिस की कार्यशैली पर उठाए सवाल 

थानाधिकारी ने ली मामले की जानकारी: 
उधर गाय की निर्मम हत्या से आक्रोशित जन भावना को शांत करने और मामले की बात को लेकर पुलिस उपाधीक्षक नरेंद्र सिंह देवड़ा, थानाधिकारी हमीरसिंह भाटी भी मौके पर पहुंचे और घटनाक्रम की जानकारी ली,, और आक्रोशित लोगों को समझाइश करते हुए इस इस निंदनीय कृत्य की नींदा‌ की. वहीं इस कृत्य में लिप्त लोगों की जानकारी या सुराग मिलने पर पुलिस प्रशासन को इत्तेला देने की बात की.

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गाय का पोस्टमार्टम कर समाधि दी: 
पुलिस प्रशासन ने इस प्रकरण को गंभीरता से अनुसंधान कर रही है और दोषी पकड़ में आएंगे और कानून इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा. साथ ही इस निंदनीय घटना के आरोपी को तुरंत पकड़ने की सांत्वना दी. उसके बाद गाय का पोस्टमार्टम कर समाधि दी गई. गौरतलब है कि जिले में पशु क्रूरता की वारदातें नित रोज बढ़ती जा रही है. लेकिन पशु क्रूरता निवारण के लिए कार्यरत संस्थाओं और आम जन भी ऐसे मामलों में पुलिस में मुकदमे दर्ज करने से कतराता है. 

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भीलवाड़ा: गंगापुर थाना क्षेत्र में उम्मेदपुरा गांव में 5 माह पूर्व संदिग्ध परिस्थितियों में एक युवक की मौत के मामले का पुलिस द्वारा खुलासा नहीं करने पर आक्रोशित मृतक का भाई आज गंगापुर में टावर पर चढ़ गया. टावर पर चढ़े रमेश गाडरी का आरोप है कि पुलिस इस मामले में हाथ पर हाथ धरे बैठी है, प्रेम प्रसंग के मामले में उसके भाई की हत्या की गई है जबकि पुलिस 5 माह से कुछ भी नहीं कर रही है.

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युवक को देखने तमाशबीन लोगों की भीड़ जमा हो गई: 
युवक के टावर पर चढ़ने की खबर मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे और फोन पर वार्ता कर नीचे उतरने को लेकर समझाइश करते रहे. उधर टावर पर चढ़े युवक को देखने तमाशबीन लोगों की भीड़ जमा हो गई. उधर, गंगापुर डीएसपी बुद्धराज टांक का कहना है कि इस मामले में थाने में मृग दर्ज है. जांच अधिकारी के 28 अप्रैल से गैर हाजिर चलने के कारण मामला लम्बित चल रहा है. लॉक डाउन की वजह से भी कार्रवाई नही हो पाई. जल्द ही खुलासा करेंगे. 

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विकास दुबे का मध्य प्रदेश से रहा पुराना कनेक्शन, 20 साल पहले दोस्त की बहन से गन पॉइंट पर की थी शादी

विकास दुबे का मध्य प्रदेश से रहा पुराना कनेक्शन, 20 साल पहले दोस्त की बहन से गन पॉइंट पर की थी शादी

कानपुर: कानपुर शूटआउट के मोस्टवॉन्टेड विकास दुबे ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की पर्ची कटाई और इसके बाद खुद ही सरेंडर कर दिया. फिलहाल, स्थानीय पुलिस ने उसे कस्टडी में ले लिया है. यूपी पुलिस ने विकास दुबे की गिरफ्तारी की पुष्टि की है. यूपी पुलिस उसे सात दिन से खोज रही थी. मध्यप्रदेश से गिरफ्तार विकास दुबे का यहां से जबरदस्त कनेक्शन रहा है. 

मध्यप्रदेश: उज्जैन से गैंगस्टर विकास दुबे गिरफ्तार 

राजू खुल्लर की बहन रिचा को विकास दुबे पंसद करने लगा: 
विकास दुबे की दोस्ती शास्त्री नगर के मशहूर अपराधी राजू खुल्लर से हुई थी. विकास का राजू खुल्लर के घर आना जाना शुरू हो गया था. यहीं से विकास की लव स्टोरी की शुरूआत होती है. राजू खुल्लर की बहन रिचा को विकास दुबे पंसद करने लगा. रिचा और विकास दुबे दोनों एक दूसरे का पंसद करने लगे. बहन के प्रेम संबंधों की भनक रिचा के भाई राजू खुल्लर को लगी तो विकास दुबे उसकी आंखों में खटकने लगा. 

विकास ने गन पॉइंट पर रिचा से शादी की थी: 
विकास दुबे ने मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के बुढ़ार कस्बे की रिचा निगम उर्फ सोनू से करीब 20 साल पहले कानपुर में लव मैरिज की थी. इस शादी से रिचा के घरवाले घिलाफ थे. उनके विरोध करने पर विकास ने गन पॉइंट पर रिचा से शादी की थी. इन दिनों विकास के काम रिचा खुद देख रही थी. विकास दुबे और राजू खुल्लर ने मिलकर कई बड़े अपराधों को अंजाम दिया था.

फिल्म अर्जुन पंडित ने विकास को सबसे ज्याद प्रभावित किया:
सन् 1999 में रिलीज हुई फिल्म अर्जुन पंडित ने विकास को सबसे ज्याद प्रभावित किया था. अर्जुन पंडित मूवी देखने के बाद विकास दुबे की जिद थी कि अब वो रिचा से शादी कर के रहेगा. विकास दुबे की धमकी से राजू खल्लर डर गया और रिचा और विकास से दूरी बना ली थी. इसके बाद विकास ने रिचा से शादी कर ली थी. अर्जुन पंडित फिल्म देखने के बाद विकास दुबे का सर नेम बदल गया और विकास पंडित बन गया. अर्जुन पंडित मूवी में सनी देओल ने गैंगस्टर का रोल किया था. 

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दुबे की सारी सत्ता काफी हद तक सोनू के पास रही: 
वर्ष 2000 में ताराचंद्र इंटर कालेज के सेवानिवृत्त प्रिंसिपल सिद्धेश्वर पांडेय और वर्ष 2001 में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री की हत्या के बाद विकास कभी जेल में रहा तो कभी फरार रहा. अगले पांच वर्ष इसी लुकाछिपी में बीते. इस दौरान विकास दुबे की सारी सत्ता काफी हद तक राजू खुल्लर और उसकी बहन सोनू के पास रही.  


 

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