अयोध्या में फिर 1992 जैसे हालात, अलर्ट पर प्रशासन, सेना बुलाए जाने की मांग

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/24 08:51

अयोध्या। देशभर में चुनावी माहौल से पहले राममंदिर को लेकर सियासत परवान पर है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक नगरी अयोध्या में एक बार फिर से माहौल गर्माया हुआ है। हालात ये हैं कि यहां एक बार ​फिर 1992 जैसे हालात बनते हुए दिखाई दे रहे हैं। दरअसल, रामनगरी अयोध्या में 25 नवंबर को शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे के दौरे और विश्व हिंदू परिषद की धर्मसभा के चलते हलचल काफी तेज हो गई है।

वीचएपी ने अपने कार्यक्रम को युद्ध के लिए बिगुल बजने से पहले का अपना आखिरी कार्यक्रम करार दिया है, जिसके तहत रविवार को आरएसएस के आनुषांगिक संगठन वीएचपी ने राम मंदिर के जल्द निर्माण के लिए दबाव बनाने के मकसद से धर्मसभा का आयोजन किया जाएगा। इस बीच राजनीति भी तेज हो गई है और यूपी के पूर्व सीएम ने अयोध्या में सेना तैनात करने की मांग की है।

अयोध्या में रविवार को होने वाले शिवसेना और वीएचपी के मूवमेंट के चलते सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं। वीएचपी की धर्मसभा और उद्धव ठाकरे के दौरे से पहले प्रशासन सतर्क हो चुका है और भारी संख्या में पुलिस एवं सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है, वहीं हालात को देखते हुए यहां सेना बुलाए जाने की मांग भी की गई है। प्रशासन ने कस्बे को 8 जोन और 16 सेक्टरों में बांटा है। राज्य सरकार ने पीएसी की टुकड़ियों की संख्या बढ़ाकर 20 से 48 कर दी है।

वीएचपी ने यूपी के विभिन्न इलाकों से ट्रेनों, बसों, ट्रैक्टर ट्रॉलियों और टैक्सियों के जरिए लोगों को बुलाना शुरू कर दिया है। यही नहीं, आरएसएस भी अपने तरीके से इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटा है। अयोध्या के 200 किमी तक के दायरे को 1000 खंडों में विभाजित किया गया है और घर-घर जाकर लोगों से इस बाबत संपर्क किया जा रहा है, ताकि हिंदू समाज को मोबिलाइज किया जा सके।

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