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पिछले चुनावों से विपरीत है इस बार बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र की स्थिति

पिछले चुनावों से विपरीत है इस बार बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र की स्थिति

बाड़मेर। लोकसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई चुकी है। यहां तक की जैसे जैसे लोकसभा चुनाव की तिथि नजदीक आ रही हैं वैसे वैसे दोनो प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस ने अपनी दौड तेज कर दी हैं। लेकिन पिछले लोकसभा चुनावों से इस बार बाडमेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र की स्थिति उल्टी हैं, पिछली बार मोदी लहर के साथ बाडमेर-जैसलमेर के 9 विधानसभा सीट में से 8 पर भाजपा का कब्जा था वहीं 1 पर कांग्रेस काबिज थी लेकिन इस बार 8 पर कांग्रेस और सिर्फ 1 पर भाजपा का विधायक हैं। ऐसे में लोकसभा का चुनाव बडा ही रोचक होने वाला हैं। 

देश के बड़े लोकसभा क्षेत्रों में सुमार बाड़मेर-जैसलमेर का इतिहास बडा ही रोचक रहा हैं, यहां पर स्थानीय के साथ बाहरी प्रत्याशी भी भारी मतो से जीत कर संसद तक पहुंचे हैं। इस संसदीय क्षेत्र के आंकडों को देखा जाये तो 9 बार कांग्रेस, 2 बार भाजपा, 1 जनता पार्टी, 1 बार रामराज्य परिषद, 1 बार जनता दल, 2 बार निर्दलीय प्रत्याशी भी जीतने में कामयाब रहे हैं। दरअसल पहला लोकसभा चुनाव 1952 में निर्दलीय प्रत्याशी भवानीसिंह विजय रहे। 

-1957-1962 में भी निर्दलीय प्रत्याशी रघुनाथसिंह विजयी रहे इन्होने गोवर्धनदास बिनानी को हराया

-1962-1967 के आम चुनावों में पहली बार बतौर पार्टी का सांसद चुना
इन चुनावों में तनसिंह रामराज्य परिषद से चुनाव लडे इन्होने ओकारसिंह को हराया।

-1967-1971 के चुनावों में पहली बार इस संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस जीतने में सफल हुई
कांग्रेस के अमृत नाहटा ने उस समय के सांसद तनसिंह को हराया।

-1971-1977 में पांचवे आम चुनावों में अमृत नाहटा को फिर से कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया और बताया जा रहा हैं के उस चुनावों में अमृत नाहटा ने बाडमेर-जैसलमेर जैसे रेगिस्तान में अंगुरों की बैल लगाने जैसे भाषण दिये थे और वे चुनाव जीतने में सफल हो गये और भैरोंसिह शेखावत को हराया। 

-1977-1980 में लोकसभा के छठे आम चुनावों में जनता पार्टी की ओर से तनसिंह चुनाव मैदान में उतरे उनके सामने खेतसिंह ने चुनाव लडा लेकिन उनको हार का सामना करना पडा तनसिंह चुनाव जीत गये।

-1980-1984  में कांग्रेस आई ने पहली बार वृद्धीचंद जैन को अपना प्रत्याशी बनाया उनके सामने चन्द्रवीरसिंह ने चुनाव लडा लेकिन उनकों हार का सामना करना पडा। कांग्रेस आई से वृद्धीचंद जैन सांसद चुने गये। 

-1984-1989 इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनावों में कांग्रेस ने फिर से वृद्धिचंद जैन को चुनाव में उतारा उनके सामने जाट नेता गंगाराम चौधरी ने चुनाव लडा लेकिन उनको वृद्धिचंद जैन के सामने हार का सामना करना पडा और जैन दूसरी बार सांसद चुने गये।

-1989-1991 नवे आम चुनावों में बाडमेर-जैसलमेर की जनता ने बाहरी नेता को अपना सांसद चुना। जनता दल से कल्याणसिंह कालवी सांसद चुने गये, कालवी ने दो बार लगातार सांसद रहे वृद्धिचंद जैन को हराया।

-1991-1996 के चुनावों में भी नागौर से आकर यहां चुनाव लडे रामनिवास मिर्धा ने कांग्रेस पार्टी से सांसद चुनाव जीत गये। मिर्धा ने कमल विजय हो हराया।

-1996-1998 में कांग्रेस ने रामनिवास मिर्धा की सिफारिश पर सैना में अफसर रहे कर्नल सोनाराम चौधरी को कांग्रेस से टिकट मिली और वे चुनाव जीत गये। कर्नल सोनाराम भाजपा के जोगराजसिंह को हराया। 

-1998-1999 केन्द्र में अटल बिहारी सरकार गिरने के बाद मध्यावधि चुनावों में कांग्रेस ने फिर से कर्नल सोनाराम चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा उनके सामने कल्याणसिंह कालवी के पुत्र लोकेन्द्रसिंह कालवी को चुनाव मैदान में उतारा गया लेकिन कालवी को चुनाव में हार का सामना करना पडा।

-1999-2004 तेहरवे आम चुनावों में कांग्रेस से कर्नल सोनाराम चौधरी फिर से टिकट लाने में कामयाब हो गये। उनके सामने भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे जसंवंतसिंह के पुत्र मानवेन्द्रसिंह को मैदान में उतारा लेकिन मानवेन्द्र सिंह यह चुनाव हार गये और कर्नला सोनाराम चौधरी लगातार तीसरी बार सांसद चुनाव जीत कर लोकसभा पहुंच गये।

-2004-2009 यह चुनाव रोचक चुनाव कहा जा सकता हैं इन चुनावों में मानवेन्द्रसिंह को भाजपा ने फिर से मैदान में उतारा और इस बार मानवेन्द्रसिंह ने कांग्रेस के कर्नल सोनाराम चौधरी को हरा दिया। और पहली बार बाडमेर-जैसलमेर से भाजपा का सांसद चुना गया।

-2009-2014 इस चुनावों से पहले कांग्रेस के लगातार तीन बार सांसद रहे कर्नल सोनाराम चौधरी विधानसभा चुनाव लड कर विधायक बन चुके थे, उनकी जगह इस बार कांग्रेस ने युवा नेता हरीश चौधरी को मैदानम में उतारा उनके सामने भाजपा से मानवेन्द्रसिंह मैदान में थे। प्रेदश में कांग्रेस सरकार होने का फायदा हरीश चौधरी को मिला और वे जीतने में कामयाब हो गये। 

-2014-16 वीं लोकसभा के चुनाव देश भर में रोचक थे ही बाडमेर-जैसलमेर में उनसे भर ज्यादा रोचक थे यहां पर भाजपा के कद्दवार नेता रहे जसंवतसिंह की टिकट काट कर कांग्रेस पार्टी को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए कर्नल सोनाराम चौधरी को टिकट दिया गया। इसके बाद वसुंधरा राजे ने इन बाडमेर-जैसलमेर सीट को मूछ का सवाल बना दिया तो दूसरी तरफ पूर्व विदेश मंत्री जसवंतसिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में डटे रहे और जातीय धु्रवीकरण के चलते यहां पर भाजपा के कर्नल सोनाराम चौधरी को जीत हासिल हुई। जबकि इन चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी हरीश चौधरी तीसरे नम्बर रहे।

विधानसभा की तरह की लोकसभा चुनावों में भी दोनो ही प्रमुख दलों से कई बडे नेता टिकट पाने की कतार में हैं, बाडमेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र में मुददो के बजाय जातीय फैक्टर पर चुनाव लडा जाता रहा हैं। यहीं वजह है की देश के मुद्दे यंहा काम नही आते है। दरअसल अब बात करते है बाड़मेर जैसलमेर लोकसभा सीट से भाजपा के संभावित दावेदारो में वर्तमान सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। हालांकि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कर्नल सोनाराम चौधरी ने बाड़मेर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी मेवाराम जैन ने कर्नल सोनाराम चौधरी को करीब 30 हजार से अधिक मतों से हरा दिया। जिसके चलते इस बार भारतीय जनता पार्टी को कर्नल सोनाराम चौधरी को लोकसभा की टिकट देने के बारे में विचार करना पड़ेगा। इसके अलावा भाजपा से संभावित दावेदारों में बायतू से पूर्व विधायक एवं भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष कैलाश चौधरी का नाम भी संभावित दावेदारों में बताया जा रहा है। इतना ही नही कद्दावर जाट नेता रहे गंगाराम चौधरी की पौत्री डॉ. प्रियंका चौधरी का पार्टी ने विधानसभा चुनाव में बाड़मेर से टिकट काट दिया था जिसके बाद से प्रियंका चौधरी ने लोकसभा चुनाव सीट के लिए पार्टी के सामने अपनी दावेदारी जताई है। 

इसके अलावा जैन समाज से तालुकात रखने वाले युवा नेता एवं समाज सेवी पीयुष डोसी को भाजपा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाने के लिए मानस बना रही है। इतना ही नही पोकरण से भाजपा की टिकट पर हाल ही में विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले महंत प्रताप पुरी भी भाजपा की ओर से दावेदार माने जा रहे है। तो वही दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के संभावित दावेदारों की बात करे तो भाजपा छोड कांग्रेस में शामिल हुए कर्नल मानवेन्द्रसिंह भी कांग्रेस से लोकसभा चुनावों में अपनी प्रबल दावेदारी जता रहे है। जबकि वर्तमान सरकार में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी भी लोकसभा चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं। यंहा तक की राजस्व मंत्री ने पिछले दिनों प्रेसवार्ता में कहा था की अगर पार्टी लोकसभा चुनाव की टिकट देती है तो वो लड़ने के लिए तैयार है। 

तो वहीं दूसरी और राजस्थान विश्व विद्यालय की पहली महिला अध्यक्ष प्रभा चौधरी ने भी लोकसभा चुनावों में कांग्रेसी पार्टी की ओर से चुनाव लडने की दावेदारी पिछले दिनो बाड़मेर जिले के दौरे पर आए प्रभारी मंत्री बीडी कल्ला के सामने जताई थी। 

इतना ही नही वरिष्ठ जाट नेता हेमाराम चौधरी का नाम भी लोकसभा चुनावों में संभावित प्रत्याशियों में चल रहा र्हैं। क्योंकि हेमाराम चौधरी को अशोक गहलोत की वर्तमान सरकार में किसी तरह का बड़ा पद नही दिया गया है जिससे वो खुद की सरकार से नाराज बताए जा रहे है। इसलिए कयास लगाए जा रहे है की हेमाराम चौधरी को बाड़मेर जैसलमेर सीट से चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। अब देखना होगा कि दोनो ही दल किसे चुनावी दंगल में उतारते हैं। 
पप्पू कुमार बृजवाल फर्स्ट इंडिया न्यूज बाड़मेर

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VIDEO: फिर इतिहास दोहराएंगे कांग्रेसी! कोरोना की जंग में मदद को आये आगे

जयपुर: राजस्थान की कांग्रेस फिर इतिहास दोहराएगी. मुख्यमंत्री की अपील के बाद प्रदेश भर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कोरॉना के खिलाफ लड़ाई में अपना योगदान देने का निश्चय किया है. ठीक वैसे ही जैसे कई साल पहले अकाल के ख़िलाफ़ कांग्रेस ने जंग लड़ी थी और कैंप लगाए थे. विधायकों ने इस दिशा में शानदार कार्य किया है और सीएम की अपील को सार्थक बनाया. अब बारी जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की.

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भीषण अकाल पड़ने पर भी गहलोत ने उठाए थे ऐसे कदम:
पुराने राजनेता बखूबी जानते है कि जब अशोक गहलोत ने पहली बार राजस्थान में सरकार बनाई थी, उस समय राज्य में भीषण अकाल पड़ा था. तब अशोक गहलोत ने ऐसे ही कदम उठाए थे. उस समय गहलोत के आह्वान पर कांग्रेस सेवादल की और से सूखा बनाम सेवादल अभियान चलाया था. साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष फॉलो अप कार्यक्रम भी चलाया गया था, सोनिया गांधी राजस्थान के कई क्षेत्रों में आयी थी और राहत कार्यों का जायज़ा लिया. तत्कालीन कांग्रेस सेवादल के मुख्य संगठक बाबू लाल नागर ने अशोक गहलोत की अपील पर अभियान चलाया था. हालांकि इस बार हालात अलग है, यह अकाल नहीं महामारी है संक्रमण है जिससे बचना कांग्रेसी के लिए भी जरुरी है.

सीएम की अपील के बाद प्रदेश कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया:
कोरोना के खिलाफ जंग में सीएम की अपील के बाद प्रदेश कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है. संकल्प लिया है जनता के संवाद बनाए रखने का जिससे उनकी समस्याओं को दूर किया जा सके. सीएम अशोक गहलोत ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं को कहा था कि वे भी अपना योगदान दे और ऐसे कठिन समय में अपनी भूमिका को निभाए,जनता को घर पर ही रहने के लिए प्रेरित करे.

प्रदेश कांग्रेस ने निर्देश जारी किया:
प्रदेश कांग्रेस ने निर्देश जारी किए हैं कि प्रदेश कार्यकारिणी, जिलाअध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्षों, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्रिय, जिला प्रमुख और प्रधान अपनी और से मुख्यमंत्री सहायता कोष में आर्थिक सहयोग दे और मदद को आगे आए.

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अपने जिले के लोगों की हरसंभव मदद करने की अपील:
जिलाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ अपने जिलों में लोगों की हर संभव मदद करें और जिला प्रशासन के अधिकारियों के संपर्क में रहकर कोरोना वायरस के लॉक डाउन के बाद सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं से लोगों को लाभान्वित करवाएं. साथ ही सोशल मीडिया पर संपर्क रहने के निर्देश भी दिए गए है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ये भी निर्देश जारी किया गया है कि तमाम जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता सोशल मीडिया पर लगातार संपर्क में रहें और सोशल डिस्टेंस के लिए लोगों को जागरुक करने का काम भी करें.
...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

किसी 'वायरस' के कारण पहली बार राजस्थान की विधानसभा अनिश्चितकाल के लिये स्थगित

किसी 'वायरस' के कारण पहली बार राजस्थान की विधानसभा अनिश्चितकाल के लिये स्थगित

जयपुर: किसी 'वायरस' के कारण पहली बार राजस्थान की विधानसभा को अनिश्चितकाल के लिये स्थगित किया गया. कोरोना के कारण विधानसभा की कार्यवाही स्थगित की गई. विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद स्पीकर डॉ सीपी जोशी ने 26मार्च से बुलाये गये सत्र को अनिश्चितकाल के लिये स्थगित करने के निर्देश जारी किये. विधानसभा के सचिव प्रमिल कुमार माथुर बैठक में मौजूद रहे.

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संपूर्ण विपक्ष और सत्तापक्ष के कुछ सदस्यों ने मांग की थी: 
वैसे कोरोना संकट के मद्देनजर लगातार विचार जारी था. लेकिन 26 मार्च को राज्यसभा चुनाव के तहत मतदान और सदन की कार्यवाही रखी गई थी. कुछ महत्वपूर्ण बिल भी रखे जाने थे. लेकिन जैसे ही राज्यसभा चुनाव टाले जाने का ऐलान चुनाव आयोग ने किया उसके बाद यह तय हो गया था विधानसभा का भावी सत्र भी स्थगित होगा. देश की सबसे बड़ी पंचायत में भी सत्र स्थगित किया चुका था. सदन के नेता और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल से चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी ने 26 मार्च को होने वाली कार्यवाही स्थगित कर दी. इस बारे में संपूर्ण विपक्ष और सत्तापक्ष के कुछ सदस्यों ने मांग की थी. 

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सदन में सार्थक चर्चा देखने को मिली:
15वीं विधानसभा में 4 सत्र बुलाये गये, रिकॉर्ड 56 बार सदन में बैठकें आयोजित की गई. डॉ सीपी जोशी के नाम इस बार प्रश्नकाल के दौरान सर्वाधिक प्रश्न पूरे किये जाने का रिकॉर्ड भी बनाया. हंगामे की घटनाओं में रिकॉर्ड कमी और सदन में सार्थक चर्चा देखने को मिली. यह जरुर है कि स्पीकर डॉ सीपी जोशी को समय समय पर सख्त रवैया अपनाना पड़ा. 15 वीं विधानसभा शुरु हुई थी 2019 में 15जनवरी से, पहला सत्र चला 15 जनवरी-13फरवरी के बीच, दूसरा सत्र चला 27 जून से 5 अगस्त 2019 तक, तीसरा सत्र चला महज 2 दिन 28 और 29 नव.2019 को, चौथा सत्र 24जनवरी से 13 मार्च के बीच तक चला.
...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

कोरोना बचाव को लेकर केन्द्र और राज्य सरकार को सराहा, बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में हुई बैठक 

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जयपुर: राज्यसभा चुनाव टलने की खबर आने के बीच ही बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई. करीब 70 विधायक बैठक में शामिल हुए. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे नहीं आई. बैठक में कोरोना से बचाव और चुनाव स्थगित किये जाने पर इलेक्शन कमीशन की प्रशंसा की.कोरोना बचाव को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को सराहा. 26 मार्च को राज्यसभा चुनाव तो नहीं हो रहे.लिहाजा विधायकों के साथ कोरोना से बचाव पर संवाद किया गया.

दिया कोरोना जागरुकता का संदेश:
बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने कोरोना जागरुकता का संदेश अपने विधायकों को दिया.विधायकों को जांच के बाद ही कार्यालय के अंदर प्रवेश दिया.डॉ एस एस अग्रवाल की अगुवाई में बीजेपी के मेडिकल सेल ने एक एक विधायक की जांच की. सेनिटाइज किये जाने के बाद ही बैठक में भाग लेने की अनुमति दी गई. भीलवाड़ा से आये विधायकों की भी विशेष जांच हुई. विधायक भीलवाड़ा, झुंझुनूं से भी बैठक में भाग लेने पहुंचे थे. 

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चुनाव आयोग का जताया आभार:
राज्यसभा चुनाव में होने वाले मतदान के संदर्भ में बैठक बुलाई गई थी. दूर दराज से कठिनाई सहन करते हुए विधायक पहुंचे भी और फिर चुनाव ही आगे खिसक गये. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री वी सतीश ओर संगठन महामंत्री चंद्रशेखर मौजूद रहे. राज्यसभा चुनाव स्थगित किये जाने पर चुनाव आयोग का आभार जताया गया. बीजेपी कोर कमेटी के सदस्यों के बीच भी अलग से बैठकों का दौर चला. बीजेपी नेतृत्व ने प्रत्येक विधायक से कोरोना वायरस के फैलाव और बचाव से जुड़ा फीडबैक लिया और उन्हें निर्देश दिये कि अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र की जनता के संपर्क में रहे.

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VIDEO- राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस जारी करेगी विधायकों के लिये व्हिप, अनुशासन बिगड़ते ही सदस्यता समाप्त!

जयपुर: राज्यसभा चुनाव तय समय पर होते है तो कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों के लिये व्हीप जारी करेगी. व्हीप में साफ होगा कि अगर उल्लघंन किया तो सदस्यता रद्द हो जाएगी. अनुशासन बनाये रखना ही व्हीप का असली मकसद होता है. इतिहास गवाह है कि गुजरात में बीते राज्यसभा चुनावों में अहमद पटेल तभी जीते थे जब उन्हीं के पार्टी के 2 विधायकों को जनप्रतिनिधि कानून के दायरे में लाया गया.

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राज्यसभा चुनाव में राजस्थान में 3 सीटों पर चुनाव होने है, चुनावी समर में उम्मीदवार उतरे है 4,दो कांग्रेस के और दो बीजेपी के.. लिहाजा चुनाव बेहद दिलचस्प और रोमांचक हो गये है. सत्ताधारी दल कांग्रेस जीत के प्रति आश्वस्त है लेकिन कोई जोखिम मोल नहीं लेना चाहता.  लिहाजा कांग्रेस विधायक दल की ओर से सभी विधायकों के व्हिप जारी किया जाएगा, इसे मानना विधायकों के लिये अनिवार्य होगा. वैसे तो कांग्रेस विधायक दल के अंदर क्रास वोटिंग की संभावना नजर नहीं आ रही लेकिन राजनीति में कु़छ कहा नहीं जा सकता है. आइये पहले आपको बता देते है व्हिप क्या होता है..

---व्हिप के मायने---
--व्हिप का उल्लंघन दल बदल विरोधी अधिनियम के तहत माना जा सकता है
--उल्लंघन पर सदस्यता रद्द कर दी जा सकती है
--व्हिप 3 तरह के होते हैं
-एक लाइन का व्हिप
 2 लाइन का व्हिप और 3 लाइन का व्हिप.
-इन तीनों व्हिप में 3 लाइन का व्हिप अहम माना जाता है, इसे कठोर कहा जाता है
-इसका इस्तेमाल सदन में अविश्वास प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस या वोटिंग में किया जाता है.
-यदि किसी सदस्य ने इसका उल्लंघन किया तो उसकी सदस्यता खत्म होने का भी प्रावधान है.
-व्हिप के मुताबिक राज्यसभा चुनाव में ओपन बैले के तहत मतदान प्रक्रिया होती है.
-किसी भी दल के विधायक को उसकी पार्टी के एंजेट को दिखाकर ही मत देना होता है ऐसा नहीं होने पर वोट अमान्य हो सकता है.

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अदालत के महत्वपूर्ण निर्णय के अनुसार संसदीय परम्पराओं को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये व्हिप का प्रावधान है जिसके तहत क्रास वोटिंग को रोका जा सके और पार्टी के आदेश का विधायक अनुशासित होकर पालन करे, हार्स ट्रैडिंग को प्रोत्साहन नहीं मिले. राजस्थान में कांग्रेस पार्टी ने दो उम्मीदवारों को चुनावी समर में उतारा है के सी वेणुगोपाल और नीरज डांगी........ इन्हें 13 निर्दलीय,2 सीपीएम,2 बीटीपी,1 आरएलडी के वोटों की उम्मीद है. इस गणित के लिहाज से तो कांग्रेस को 3 में से 2 सीटें मिलना तय है. फिर भी सियासत आखिर सियासत ही है. यहां दूध का जला छाछ फूंक फूंक कर पीता है.

...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट


 

VIDEO- कोरोना वायरस: ओम माथुर के ठीक पास में बैठे हुए थे दुष्यंत सिंह, किरोड़ी मीणा भी नहीं थे ज्यादा दूर

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जयपुर: बॉलीवुड की मशहूर सिंगर कनिका कपूर के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद सांसद दुष्यंत सिंह भले ही सेल्फ आइसोलेशन में चले गए हैं, मगर इस खबर से राजस्थान के कुछ सांसद और परेशान हो गए है. दरअसल, ओम माथुर दुष्यंत सिंह के ठीक पास में बैठे हुए थे. राष्ट्रपति भवन में अल्पाहार के कार्यक्रम में माथुर दुष्यंत के करीब दिखे थे. ऐसे में अब ओम माथुर समर्थकों में इस बात की चिंता है. अलबत्ता ओम माथुर भी स्वयं की जांच करवाएंगे. वहीं दुष्यंत किरोड़ी लाल मीणा और अर्जुन लाल मीणा से भी ज्यादा दूर नहीं थे. 

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दुष्यंत ने कनिका कपूर के साथ पार्टी अटेंड की थी:
बता दे कि बीजेपी सांसद दुष्यंत सिंह ने कोरोना पीड़ित सिंगर कनिका कपूर के साथ एक पार्टी अटेंड की थी. इसके बाद दुष्यंत सिंह ने कई सांसदों से मुलाकात की थी. यहां तक कि उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मुलाकात की थी. सांसद दुष्यंत सिंह ने और उनकी मां वसुंधरा राजे जिन्होंने रविवार को पार्टी अटेंड की थी खुद को आइसोलेट कर लिया है. अब इसके बाद कई सांसद खुद को सेल्फ क्वॉरेंटाइन कर रहे हैं जो कि पिछले हफ्ते दुष्यंत सिंह से मिले थे. 

 

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मुख्यमंत्री पद से कमलनाथ का इस्तीफा, कहा- बीजेपी याद रखे कि कल भी आएगा

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भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस्तीफा दे दिया है. सीएम कमलनाथ ने कहा कि मैंने हमेशा विकास में विश्वास रखा. प्रदेश की जनता आज पूछ रही है कि कमलनाथ का क्या कसूर है. मुझे जनता ने पूरे पांच सालों के लिए बहुमत दिया था. प्रदेश के साथ धोखा करने वाले नेताओं के साथ जनता कभी न्याय नहीं करेगी.

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अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनवाया: 
कमलनाथ ने इस दौरान अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनवाया और कहा कि हमने आम लोगों के लिए काम किया, लेकिन ये भाजपा को रास नहीं आया. हमारी सरकार पर किसी तरह का आरोप नहीं लगा, बीजेपी ने किसानों के साथ धोखा किया लेकिन हमें उनके लिए काम नहीं करने दिया. प्रेस कॉन्फ्रेंस में कमलनाथ ने कहा कि हमने अपने कार्यकाल में माफियाओं को खत्म करने का काम किया, बीजेपी को यहां सरकार चलाने के लिए 15 साल मिले.

बीजेपी ने 22 विधायकों को बंधक बनाया: 
कमलनाथ ने कहा कि बीजेपी ने 22 विधायकों को बंधक बनाया और ये पूरा देश बोल रहा है. करोड़ों रुपये खर्च कर खेल खेला जा रहा है. एक महाराज और उनके 22 साथियों के साथ मिलकर साजिश रची. सीएम बोले कि जिसकी सच्चाई थोड़ी समय में सामने आएगी. हमने तीन बार विधानसभा में अपनी बहुमत साबित की. बीजेपी की ओर से जनता के साथ विश्वासघात किया जा रहा है और लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या की जा रही है, जनता इन्हें कभी माफ नहीं करेगी.

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कमलनाथ सरकार के पास बहुमत नहीं था:
बता दें कि 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार के पास बहुमत नहीं था और आज शाम को फ्लोर टेस्ट होना था. लेकिन उससे पहले ही कमलनाथ ने इस्तीफे का ऐलान किया.

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भोपाल: मध्य प्रदेश में चल रही सियासत पर आज स्थिति साफ हो जाएगी. बहुमत परीक्षण से पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. आज विधानसभा की कार्यवाही से पहले प्रेस कांफ्रेंस होनी है जिसमें मुख्यमंत्री अपने इस्तीफे की घोषणा कर सकते हैं. दूसरी ओर देर रात को विधानसभा स्पीकर ने बागी 16 विधायकों का इस्तीफा स्वीकार किया.

सरकार अब सुरक्षित नहीं:
वहीं दिग्विजय सिंह ने अपनी हार स्वीकार करते हुए कहा है कि सरकार अब सुरक्षित नहीं है. 16 विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस विधायकों की संख्या घटकर 92 हो गई है. इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष सरकार में मंत्री रहे छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर चुके थे. 

बीजेपी विधायक का इस्तीफा भी स्वीकार:
मध्य प्रदेश में फ्लोर टेस्ट से पहले बीजेपी के विधायक शरद कौल ने इस्तीफा दे दिया है. अब तक विधानसभा में कुल 23 विधायकों के इस्तीफे मंजूर हो गए हैं. मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से विधानसभा में बहुमत के लिए 104 का आंकड़ा चाहिए और बीजेपी के पास अभी 106 है.

23 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार:
विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति का कहना है कि विधायकों ने खुद इस्तीफा दिया है. मेरे ऊपर लगाए गए आरोप गलत हैं. मैंने निष्पक्ष होकर काम किया है. दुखी मन से विधायकों के इस्तीफे स्वीकर किए है. मुझे इस्तीफों पर अधिकार लेने का अधिकार है. वहीं भाजपा विधायक शरद कौल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. 
 

राज्यसभा चुनाव पॉलिटिक्स: कांग्रेस ने किया तय, विधायकों की नहीं की जाएगी बाड़ेबंदी

राज्यसभा चुनाव पॉलिटिक्स: कांग्रेस ने किया तय, विधायकों की नहीं की जाएगी बाड़ेबंदी

जयपुर: भले ही जयपुर में गुजरात के कांग्रेस विधायकों की बाड़ेबंदी जारी है. लेकिन राजस्थान के राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस बाड़ेबंदी नहीं करेगी.विधायकों को ट्रैनिंग तो दी जाएगी लेकिन एक जगह नहीं रखा जाएगा. 

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राजस्थान बीते 1 साल से बाड़ेबंदी के लिये चर्चित: 
राजस्थान बीते 1साल से बाड़ेबंदी के लिये चर्चित है. महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के बाद गुजरात के विधायकों का कैम्प जयपुर में चल रहा है. कांग्रेस शासन है लिहाजा कांग्रेस आलाकमन के लिये राजस्थान मुफ़ीद राज्य है, इसके पीछे बड़ा कारण भी है और वो है अशोक गहलोत. लेकिन गहलोत ने खुद के राज्य में अपने ही विधायकों के एक साथ दो या तीन दिनों के ठहराव को ठीक नहीं माना है. यहीं कारण है कि राज्यसभा चुनावों मे़ राजस्थान में बाडेबंदी नहीं होगी. केवल कांग्रेस विधायकों के लिये मॉक पोल ट्रैनिंग का कार्यक्रम रखा जाएगा. 

कांग्रेस ने गुरुवार अपने एंजेट भी घोषित कर दिये:
माना जा रहा है कि 25 मार्च को संभावना है कि 8 सिविल लाइंस में ट्रैनिंग कार्यक्रम होगा. खासतौर से नये विधायकों को सीखाया जाएगा कि कैसे राज्यसभा में मतदान करना है. कांग्रेस ने गुरुवार अपने एंजेट भी घोषित कर दिये. 

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राज्यसभा चुनावों के जरिये सियासी संदेश:
विधायकों को मतदान के मद्देनजर एक जगह ठहरना अथवा उन्हें एकजुट किसी जगह पर रखने को बाड़ेबंदी कहते है जिसके पीछे कारण होता है कि विरोध दल कहीं सेंध ना लगा दे और ना ही हार्स ट्रैडिंग हो पाये. लगता है कि अशोक गहलोत राजस्थान राज्यसभा चुनावों के जरिये सियासी संदेश देना चाहेंगे.

...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

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