गांव से कस्बे की दूरी तय करने के लिए लेना पड़ता है रेलवे ट्रैक का सहारा

गांव से कस्बे की दूरी तय करने के लिए लेना पड़ता है रेलवे ट्रैक का सहारा

बसेड़ी(धौलपुर)। अधिकांश गांवो में ग्रामीणों के आवागमन के लिए सड़क से लेकर पगडण्डी तक कोई न कोई मार्ग बना हुआ है, लेकिन बसेड़ी उपखण्ड में एक गांव ऐसा भी है जहां उपखण्ड प्रशासन सहित जिला प्रशासन की अनदेखी की वजह से आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जी हाँ, हम बात कर रहे है बसेड़ी क्षेत्र के नकटेपुरा गांव की, क्यूँ कि इस गांव में जाने के लिए  न तो सड़क है और न ही पगडंडी। यहां के स्थानीय ग्रामीण सहित बुजुर्ग और नन्हें-मुन्ने बच्चे गांव में जाने के लिए और बसेड़ी मुख्यालय की दूरी तय करने के लिए रेलवे ओवरब्रिज के ट्रैक का सहारा लेते है, जी हाँ यह दृश्य कुछ ऐसा ही है जिसे देखने से किसी की भी रूह कांप जाए। 

फर्स्ट इंडिया न्यूज आपको बता रहा है कुछ ऐसी ही तस्वीरें, जहां हर पल खतरा रहता है। तस्वीरों में नैरोगेज ट्रेन के इस ओवरब्रिज पुल के ट्रैक पर से लोग आवागमन कर रहे है, तो वहीं कुछ लोग मजबूरन जान-जोखिम में डालकर अपने वाहनों को भी इसी मार्ग से ही ले जाते है। तस्वीर में एक लड़के द्वारा बिना भय के इस रेलवे पुल की रैलिंग पर खड़े होकर सेल्फी तक ले रहा है। तो वहीं एक महिला अपनी गोद मे बच्चे को लेकर इस ट्रैक पर से ही सफर करना पड़ रहा है। 

यहां तक कि स्कूली बच्चे भी इसी मार्ग से अपनी शिक्षा को ग्रहण करने जाते है और इसी मार्ग से वापस घर को आते है। बच्चों को भी डर सताता रहता है कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए जिससे उनका भविष्य ही खतरे में पड़ जाए। एक तस्वीर में आप देख सकते है कि इस ट्रैक से सब्जी वाला भी अपने सिर पर सब्जियाँ रखकर बसेड़ी के सब्जी मंडी में बेचने जा रहा है। जहाँ रेलवे ट्रैक पर ट्रैन के पहिये दौड़ते है वहां मजबूरन लोगों को बाइक, साइकिल भी चलानी पड़ रही है। गांव के अंदर भी ट्रैक बिछा हुआ है जिसके दोनों ओर घर बसे हुए है तो वही गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय के लिए भी कोई मूल रास्ता नही है और विद्यालय भी रेलवे ट्रैक के नजदीक बना हुए है।

गांव में नही पहुंचती 108, बसेड़ी हॉस्पिटल में खटिया पर लाते है मरीजो को-
फर्स्ट इंडिया ने वहाँ के स्थानीय नागरिकों से वहाँ के हालात जानना चाहा तो बताया गया कि हर वक्त जान को खतरा तो रहता ही है, लेकिन सबसे ज्यादा समस्या तब आती है जब गांव में कोई बीमार हो जाए या गर्भवती महिला की डिलीवरी हो, क्यों कि मार्ग नही होने से हालात ऐसे हो जाते है कि गांव तक 108 एम्बुलेंस नही पहुंच पाती तो खुद ही ग्रामीण खटिया पर मरीजो को लिटाकर बसेड़ी अस्पताल तक लाते है।

अब तक हो चुकी दो मौते, कई घायल-
बसेड़ी क्षेत्र के नकटेपुरा जाने वाले इस रेलवे ओवरब्रिज पर आवागमन में दो मौत हो चुकी है, जिनमे से अभी करीब चार महीने पहले एक सरकारी कर्मचारी की भी मौत हुई थी। तो वही इस मार्ग से सफर करने वाले कई लोग घायल भी हो चुके हैं।

फर्स्ट इंडिया से स्कूल छात्रा ने सड़क बनवाने का किया निवेदन-
फर्स्ट इंडिया द्वारा जब एक स्कूल छात्रा अनुष्का से हालात जाने तब अनुष्का ने इस मार्ग से आने-जाने में डर बताया, तो वही गांव में हुई मौत के बारे में भी दर्द बयां किया। और फर्स्ट इंडिया से निवेदन करते हुए कहा कि इस गांव के लिए कोई सड़क बनवा दो।

...... अंकित गर्ग, फर्स्ट इंडिया न्यूज, बसेड़ी

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