Live News »

ईरानः तेहरान एयरपोर्ट के पास यूक्रेन का विमान क्रैश, 180 यात्री थे सवार

ईरानः तेहरान एयरपोर्ट के पास यूक्रेन का विमान क्रैश, 180 यात्री थे सवार

तेहरान: ईरान की राजधानी तेहरान स्थित इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक यात्री विमान क्रैश हो गया है. इस विमान में 180 लोग सवार थे. विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई है. 

टेक ऑफ करने के तुरंत बाद हुआ क्रैश: 
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी ISNA के अनुसार बोइंग 737 जेट एक तकनीकी समस्या के कारण टेक ऑफ करने के तुरंत बाद ईरान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. फिलहाल, राहत और बचाव कार्य शुरू हो गया है. अभी पूरी जानकारी नहीं मिल सकी है.

ईरान और अमेरिका के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण: 
विमान हादसा से पहले ईरान और अमेरिका के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गए थे. पिछले लंबे समय से दोनों के बीच तनातनी जारी है और दोनों देशों के बीच जंग की आशंका के बीच इराक स्थित अमेरिकी सेना के ठिकानों पर हमला हुआ है. सैन्य ठिकानों पर ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल से हमला बोला.

और पढ़ें

Most Related Stories

संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधन में बोले पीएम मोदी, वैश्विक महामारी से निपटने के प्रयासों में UN कहां है?

संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधन में बोले पीएम मोदी, वैश्विक महामारी से निपटने के प्रयासों में UN कहां है?

नई दिल्ली: देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए क​हा कि भारत को इस बात का बहुत गर्व है कि वो संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक देशों में से एक है. आज के इस ऐतिहासिक मौके पर मैं आप सभी के सामने भारत के 130 करोड़ लोगों की भावनाएं इस वैश्विक मंच पर साझा करने आया हूं.पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरे विश्व समुदाय के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है कि जिस संस्था का गठन तब की परिस्थितियों में हुआ था, उसका स्वरूप क्या आज भी प्रासंगिक है?

संयुक्त राष्ट्र के सामने गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता:
पीएम मोदी ने कहा कि अगर हम बीते 75 वर्षों में संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियों का मूल्यांकन करें, तो अनेक उपलब्धियां दिखाई देती हैं. अनेक ऐसे उदाहरण भी हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के सामने गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता खड़ी करते हैं. ये बात सही है कि कहने को तो तीसरा विश्व युद्ध नहीं हुआ, लेकिन इस बात को नकार नहीं सकते कि अनेकों युद्ध हुए, अनेकों गृहयुद्ध भी हुए. कितने ही आतंकी हमलों ने खून की नदियां बहती रहीं. इन युद्धों और हमलों में, जो मारे गए वो हमारी-आपकी तरह इंसान ही थे. लाखों मासूम बच्चे, जिन्हें दुनिया पर छा जाना था, वो दुनिया छोड़ कर चले गए. उस समय और आज भी, संयुक्त राष्ट्र के प्रयास क्या पर्याप्त थे? 

{related}

पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र से किया सवाल?:
पिछले 8-9 महीने से पूरा विश्व कोरोना वैश्विक महामारी से संघर्ष कर रहा है.इस वैश्विक महामारी से निपटने के प्रयासों में संयुक्त राष्ट्र कहां है? एक प्रभावशाली Response कहां है? पीएम मोदी ने कहा कि भारत के लोग UN के रिफॉर्म्स को लेकर जो प्रोसेस चल रहा है, उसके पूरा होने का बहुत लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं. भारत के लोग चिंतित हैं कि क्या ये प्रोसेस कभी logical end तक पहुंच पाएगा. कब तक भारत को संयुक्त राष्ट्र के decision making structures से अलग रखा जाएगा.

फार्मा इंडस्ट्री ने भेजी 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाइयां:
पीएम मोदी ने कहा कि भारत जब किसी से दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, तो वो किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं होती. भारत जब विकास की साझेदारी मजबूत करता है, तो उसके पीछे किसी साथी देश को मजबूर करने की सोच नहीं होती. हम अपनी विकास यात्रा से मिले अनुभव साझा करने में कभी पीछे नहीं रहते.भारत ने हमेशा पूरी मानव जाति के हित के बारे में सोचा है, न कि अपने निहित स्वार्थों के बारे में, भारत की नीतियां हमेशा से इसी दर्शन से प्रेरित रही हैं. महामारी के इस मुश्किल समय में भी भारत की फार्मा इंडस्ट्री ने 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाइयां भेजीं हैं. विश्व के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के तौर पर आज मैं वैश्विक समुदाय को एक और आश्वासन देना चाहता हूं. भारत की वैक्सीन प्रोडक्शन और वैक्सीन डिलीवरी क्षमता पूरी मानवता को इस संकट से बाहर निकालने के लिए काम आएगी.

रूस की कोरोना वैक्सीन Sputnik V फिर आई सवालों के घेरे में, हर 7 में से एक शख्स में दिखे साइड इफेक्ट

रूस की कोरोना वैक्सीन Sputnik V फिर आई सवालों के घेरे में, हर 7 में से एक शख्स में दिखे साइड इफेक्ट

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के खिलाफ पूरी दुनिया अभी जंग लड़ रही है. सभी देश कोरोना वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. इस दौर में रूस सबसे आगे है और उसकी कोरोना वैक्सीन Sputnik V पर सबकी नजरें टिकी हैं, लेकिन इसके ट्रायल पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं. दरअसल, इस वैक्सीन को जिन लोगों को लगाया जा रहा है, उनमें से सात में से एक स्वयंसेवक पर इसके दुष्प्रभाव देखे जा रहे हैं. इस बारे में रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने जानकारी दी है. 

300 से अधिक को अब तक स्पुतनिक वी वैक्सीन लगाई गई:
राज्य द्वारा संचालित ताश समाचार एजेंसी के मुताबिक, मुराशको ने कहा कि 40,000 घोषित स्वयंसेवकों में से 300 से अधिक को अब तक स्पुतनिक वी वैक्सीन लगाई गई है. ताश ने मुराशको के हवाले से लिखा, लगभग 14 फीसदी स्वयंसेवकों ने 24 घंटे कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द और शरीर के तापमान में कभी-कभी वृद्धि की शिकायतें कीं. हालांकि इन लक्षणों को हल्का बताते हुए उन्होंने कहा कि ये अगले ही दिन गायब भी हो गए.

{related}

Sputnik V वैक्सीन को लेकर मिल रहीं ये शिकायतें अनुमानित: 
टीएएसएस के अनुसार, Sputnik V वैक्सीन को लेकर मिल रहीं ये शिकायतें अनुमानित हैं और इसे पहले ही बता दिया गया था. उम्मीद की जा रही है कि वॉलंटियर्स को पहले डोज के 21 दिन के भीतर ही दूसरी खुराक भी दी जाएगी.

Sputnik V के तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा:  
बता दें कि अभी Sputnik V के तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है और भारत में भी इसके ट्रायल और वितरण के लिए डॉ. रेड्डी लेबोरेटरिज से समझौता हुआ है और इसी महीने की शुरुआत में मास्को में इस वैक्सीन के फाइनल स्टेज का क्लिनिकलल ट्रायल शुरू होना है.

रिपोर्ट में खुलासा- 13 फीसदी आबादी वाले चंद अमीर देशों ने खरीदी 50 फीसदी कोरोना वैक्सीन

रिपोर्ट में खुलासा- 13 फीसदी आबादी वाले चंद अमीर देशों ने खरीदी 50 फीसदी कोरोना वैक्सीन

वाशिंगटन: धनी देशों के एक समूह ने भविष्य में आने वाले कोरोना वायरस के टीकों का 50 फीसदी से ज्यादा खुराक खरीद लिए हैं. सबसे बड़ी बात तो यह है कि ये देश पूरी दुनिया की मात्र 13 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं. ऑक्सफैम की एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है. एनालिटिक्स कंपनी एयरफिनिटी द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर गैर-सरकारी संगठन ने परीक्षण के अंतिम दौर से गुजर रहे पांच वैक्सीन की उत्पादक कंपनियां, फार्मास्यूटिकल्स और खरीदार देशों के बीच हुए सौदों का विश्लेषण किया है.

टीके सभी के लिए उपलब्ध हों और सस्ती हों:  
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ऑक्सफैम अमेरिका के रॉबर्ट सिल्वरमैन ने कहा कि जीवन रक्षक वैक्सीन की पहुंच इस बात पर निर्भर नहीं करनी चाहिए की आप कहां रहते हैं या आपके पास कितना पैसा है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एक सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन का विकास और अनुमोदन महत्वपूर्ण है, लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण यह भी सुनिश्चित करना है कि टीके सभी के लिए उपलब्ध हों और सस्ती हों क्योंकि कोविड -19 सिर्फ एक जगह नहीं बल्कि हर जगह है.

{related}

उत्पादकों की कुल संयुक्त उत्पादन क्षमता की गणना 5.9 बिलियन खुराक:
आपको बता दें कि जिन पांच टीकों का विश्लेषण किया गया है, उनमें  एस्ट्राजेनेका, गामालेया/ स्पुतनिक, मॉडर्न, फाइजर और सिनोवैक के वैक्सीन हैं. ऑक्सफैम ने इन पांचों वैक्सिन उत्पादकों की कुल संयुक्त उत्पादन क्षमता की गणना 5.9 बिलियन खुराक की है.  ऐसे में यह केवल 3 बिलियन लोगों के लिए ही पर्याप्त है क्योंकि प्रति वैक्सनी की दो खुराक दिए जाने की संभावना जताई जा रही है. वहीं सप्लायर्स कंपनियों ने 5.3 बिलियन वैक्सीन खुराक के लिए डील किए हैं. इनमें से 2.7 बिलियन (51 फीसदी) खुराक की डील सिर्फ चंद विकसित और अमीर देशों ने की है, जहां दुनिया की मात्र 13 फीसदी आबादी बसती है. इन देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय यूनियन, ऑस्ट्रेलिया, हॉन्गकॉन्ग और मकाऊ, जापान, स्विटजरलैंड और इजरायल शामिल है.

BRICS देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की वर्चुअल बैठक आज, अजीत डोवाल और चीनी NSA होंगे आमने सामने

BRICS देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की वर्चुअल बैठक आज, अजीत डोवाल और चीनी NSA होंगे आमने सामने

नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच LAC पर चल रहे सीमा विवाद के बीच ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की वर्चुअल बैठक आज होगी. इस बैठक में भारत के साथ साथ चीन के प्रतिनिधि भी शरीक होंगे. ऐसे में सबका ध्यान भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और चीनी सुरक्षा सलाहकार पर होगा. क्योंकि LAC पर तनाव के बीच चीनी NSA यांग जिएची और भारतीय NSA अजीत डोवाल की बैठक होने वाली है. 

बैठक रूस की मेजबानी में आयोजित होगी:
ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की यह बैठक रूस की मेजबानी में आयोजित होगी. ब्रिक्स एनएसए की यह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले होने वाली अहम बैठकों की ही एक कड़ी है. बैठक आज शाम लगभग 6 बजे शुरू होगी. बता दें कि दोनों देशों के NSA अधिकारियों की बैठक उन अहम मुद्दों में से एक है जिसमें हाल ही में सहमति बनी थी.

{related}

निकोलाई पैट्रूशेव इस बैठक का प्रतिनिधित्व करेंगे:
रूस ने अपने बयान में कहा कि BRICS देश आज की बैठक में वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर पैदा हुए खतरों और चुनौतियों पर बहस करेंगे. रूस के सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी निकोलाई पैट्रूशेव इस बैठक का प्रतिनिधित्व करेंगे. हालांकि बैठक में भारत और चीन के NSA के बीच सीमा पर चल रहे तनाव को लेकर कोई बातचीत होगी या नहीं इसके बारे में अभी कुछ पता नहीं चल पाया है. 

इन पांच देशों का संगठन है ब्रिक्स: 
ब्रिक्स ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का संगठन है. इन पांचों देशों में विश्व की 42 फीसदी जनसंख्या रहती है और दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद में इनकी हिस्सेदारी 23 फीसदी है. ऐसे में ये सभी तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था है. 

संसद में बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीन सीमा पर जवानों ने संयम और शौर्य का परिचय दिया, विफल कर दिया स्टेटस बदलने का प्रयास

संसद में बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीन सीमा पर जवानों ने संयम और शौर्य का परिचय दिया, विफल कर दिया स्टेटस बदलने का प्रयास

नई दिल्ली: कोरोना संकट के बीच संसद के मॉनसून सत्र का आज दूसरा दिन है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चीन से तनाव पर लोकसभा में बयान दिया. राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख का दौरा कर हमारे जवानों से मुलाकात की. उन्होंने यह संदेश भी दिया था वह हमारे वीर जवानों के साथ खड़े हैं. मैंने भी लद्दाख जाकर अपने यूनिट के साथ समय बिताया था. मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि उनके साहस शौर्य और पराक्रम को महसूस भी किया था. आप जानते हैं कर्नल संतोष मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था.

राजनाथ सिंह ने दी चीन की एक-एक नापाक करतूतों की जानकारी:
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन की एक-एक नापाक करतूतों की जानकारी सदन को दी. उन्होंने बताया कि 29-30 अगस्त की रात को पैंगोंग लेक के साउथ बैंक इलाके में यथास्थिति बदलने का प्रयास था. हमारे सेना ने उनके प्रयास विफल कर दिया गया. चीन ने द्विपक्षीय संबंधों का अनादर पूरी तरह दिखता है. LAC का सम्मान करना और इसे 1993-1996 के समझौते में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है. चीन की तरफ से ऐसा नहीं हुआ है, उनकी कार्रवाई के कारण के सीमा पर झड़प हुए हैं. राजनाथ सिंह ने कहा कि 15 जून को चीन के साथ गलवान घाटी में खूनी संघर्ष में हमारे जवानों ने बलिदान दिया और चीनी पक्ष को भी भारी नुकसान पहुंचाया. जहां संयम की जरूरत थी वहां हमारे जवानों संयम रखा और जहां शौर्य की जरूरत थी वहां शौर्य प्रदर्शित किया है. किसी को भी हमारी सीमा की सुरक्षा के प्रति हमारे प्रतिबद्धता पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए.

{related}

दोनों देशों को करना चाहिए LAC का सम्मान:
राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारे सुरक्षाबल हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं. हम उनके साथ मजबूती से खड़े हैं. उन्होंने कहा कि 15 जून को हमारे जवानों ने स्टेटस बदलने के प्रयास को असफल कर दिया. जवानों ने बलिदान दिया है. चीन को भी भारी नुकसान हुआ. चीन की ये कोशिश हमें मंजूर नहीं है. दोनों देशों को LAC का सम्मान करना चाहिए.

राष्ट्रपति-पीएम-सोनिया गांधी समेत देश की कई बड़ी हस्तियों की जासूसी कर रहा चीन

राष्ट्रपति-पीएम-सोनिया गांधी समेत देश की कई बड़ी हस्तियों की जासूसी कर रहा चीन

नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर काफी समय से तनाव चल रहा है. हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति तक बन रही है. इस तनाव के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जहां चीन कुछ कंपनियों के द्वारा भारतीयों पर नजर रख रहा है. इनमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री तक, मुख्यमंत्री से लेकर सेना के वरिष्ठ अफसरों तक की जासूसी होने की जानकारी है. जो भारत का लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है. 

कंपनी का चीन की सरकार और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से सीधा संबंध:  
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया कि शेनजेन बेस्ड चीनी कंपनी 'झेनझुआ डाटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड' भारत में करीब दस हजार लोगों की निगरानी कर रही है. इस कंपनी का चीन की सरकार और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से सीधा संबंध है.  

{related}

40 मुख्यमंत्रियों, 350 सांसद सूची में शामिल:
इस जासूसी लिस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पांच प्रधानमंत्रियों, पूर्व और वर्तमान के 40 मुख्यमंत्रियों, 350 सांसद, कानून निर्माता, विधायक, मेयर, सरपंच और सेना से जुड़े समेत करीब 1350 लोगों के नाम शामिल हैं. 

अलग-अलग पार्टियों के करीब 700 नेताओं पर भी चीन की नज़र:
इतना ही नहीं, चीन के द्वारा अलग-अलग पार्टियों के करीब 700 नेताओं की निगरानी रखी जा रही है. इसके अलावा 460 वो लोग भी हैं जो इन नेताओं के करीबी रिश्तेदार हैं. 100 से ज्यादा नेताओं की फैमिली ट्री बनायी गयी है, जिन पर निगाह रखी जा रही है. करीब एक दर्जन मौजूदा और पूर्व राज्यपालों की भी डिटेल्स रखी गयी हैं. वहीं चीन की निगरानी सूची में कई पोर्टियों के 200 छोटे बड़े नेता भी शामिल हैं. इस खुलासे से ये साफ हो गया है कि चीन सिर्फ सीमा पर नहीं बल्कि साइबर की दुनिया में भी एक जंग लड़ रहा है.
 

भारतीय सेना ने एक बार फिर खोली चीनी चालबाजियों के झूठ की पोल, कहा- चीन ने की फायरिंग, हमने LAC पार नहीं की

भारतीय सेना ने एक बार फिर खोली चीनी चालबाजियों के झूठ की पोल, कहा- चीन ने की फायरिंग, हमने LAC पार नहीं की

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने एक बार फिर चीनी चालबाजियों के झूठ की पोल खोल दी है. भारतीय सेना की ओर से एलएसी पर फायरिंग के चीन के दावे को भारतीय सेना ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर खारिज कर दिया है. सेना ने कहा कि भारतीय सेना ने ना तो एलएसी पर किसी तरह की आक्रामक कदम नहीं उठाया. फायरिंग चीन की तरफ से हुई. इससे पहले चीन ने दावा किया था कि भारतीय सेना की ओर से एलएसी पर फायरिंग की गई. 

चीन आगे बढ़ने के लिए उत्तेजक गतिविधियां कर रहा:
वहीं इसी पर अब भारतीय सेना की ओर से पूरी घटना पर प्रेस विज्ञप्ति जारी किया गया है. सेना का कहना है कि भारत, जहां एलएसी पर तनाव कम करने के लिए प्रतिबद्ध है. चीन आगे बढ़ने के लिए उत्तेजक गतिविधियां कर रहा है. भारतीय सेना ने एलएसी पार नहीं की, ना ही गोलीबारी समेत किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई नहीं की.

{related}

हमारे सैनिकों ने बड़े संयम का परिचय दिया: 
भारतीय सेना ने कहा कि 7 सितंबर 2020 को पीएलए सैनिकों ने हमारे एक फॉरवर्ड पोजिशन पर कब्जा करने की कोशिश की, जब हमारे सैनिकों ने चीनी जवानों का मुकाबला किया तो उन्होंने (पीएलए) हवा में कुछ राउंड फायरिंग की. सैनिकों को डराने की कोशिश की, हालांकि गंभीर उकसावे के बावजूद हमारे सैनिकों ने बड़े संयम का परिचय दिया और परिपक्वता दिखाते हुए जिम्मेदार तरीके से व्यवहार किया.

क्या है चीन का बयान: 
चीनी सेना की वेस्टर्न कमांड ने आरोप लगाया है कि भारतीय सेना ने गश्त कर रही चीनी सैनिकों की टुकड़ी पर फायरिंग की है. इसके जवाब में चीनी सेना ने भी जवाबी कार्रवाई की है. 

चीन अपनी चालबाजियों से नहीं आ रहा बाज, घुसपैठ रोकने के लिए भारत ने की चेतावनी फायरिंग

चीन अपनी चालबाजियों से नहीं आ रहा बाज, घुसपैठ रोकने के लिए भारत ने की चेतावनी फायरिंग

नई दिल्ली: लद्दाख सीमा पर भारत और चीन के बीच गतिरोध जारी है. चीन लगातार अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आ रहा है. इस बीच भारतीय सेना अब चीन से निपटने के लिए हर तैयारी कर रही है. इसकी वजह है चीन की लद्दाख में की गई कायराना हरकत. दरअसल, चीन ने बीती रात वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी की. जिसका भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया. हालांकि इस गोलीबारी में किसी को निशाना नहीं बनाया गया.  

घुसपैठ रोकने के लिए भारतीय सेना ने भी वॉर्निंग फायरिंग की: 
जानकारी के मुताबिक चीनी सेना की एलएसी में घुसपैठ रोकने के लिए भारतीय सेना ने भी वॉर्निंग फायरिंग की है. घटना लद्दाख के पेंगोंग लेक के दक्षिण की है. चीनी सेना की वेस्टर्न कमांड ने आरोप लगाया है कि भारतीय सेना ने गश्त कर रही चीनी सैनिकों की टुकड़ी पर फायरिंग की है. इसके जवाब में चीनी सेना ने भी जवाबी कार्रवाई की है. लेकिन भारतीय सेना के सूत्रों ने साफ कहा है कि भारत ने सिर्फ एलएसी में घुसपैठ रोकने के लिए चेतावनी देने के लिए फायरिंग की.

{related}

चीन की सेना बौखलाई हुई:
बता दें कि काला टॉप और हेल्मेट टॉप सहित पेंगोंग इलाके के कई हिस्सों पर भारतीय सेना का कब्जा होने से चीन की सेना बौखलाई हुई है. इसी के चलते चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी सोमवार रात को सीमा पर आगे बढ़ने लगी. इस दौरान भारतीय सेना ने चेतावनी के लिए हवा में फायरिंग दागे. इसके बाद चीन के जवान पीछे हटे. कुछ देर बाद ही सीमा पर हालातों को नियंत्रित कर लिया गया था. 

लद्दाख में पिछले कई दिनों से हालात खराब:
आपको बता दें कि लद्दाख में पिछले कई दिनों से हालात खराब हैं और हर रोज सीमा पर कुछ ना कुछ हो रहा है. ऐसे में भारतीय सेना अभी से ही तैयारी में जुटी है, ताकि अगर हालात और भी बिगड़ते हैं तो मोर्चे पर डटा जा सके.