UNSC ने पुलवामा हमले की कड़े शब्दों में निंदा की, दोषियों को सजा की मांग

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/02/22 07:43

जम्मू कश्मीर। पुलवामा के अवंतिोरा में 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले की विश्व की कई महाश्क्तियों ने निंदा की है। अंतर्राष्ट्रीय मंच से भारत को इस हमले के बाद भरपूर सहयोग मिल रहा है। UNSC ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे पाकिस्तान की कायराना हरकत बताया है। सुरक्षा परिषद ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के बारे में कहा कि ऐसे निंदनीय हमलों के लिए दोषियों को न्याय के कठघरे में लाकर कड़ी सजा मिलनी चाहिए। बतादें, UNSC के 15 देशों के संगठन में चीन भी शामिल है।

मालूम हो, जम्मू कश्मीर में हुए आतंकी हमले में पैरा मिलिट्री फोर्स के 40 जवानों की मौत हुई है और दर्जनों जख्मी हो गए। इस हमले की जैश-ए-मोहम्मद ने जिम्मेदारी ली है।' जिसकी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने कड़े शब्दों में निंदा की है।

यूएनएसी में कहा गया कि 'आतंकवाद के ऐसे निंदनीय कृत्य के लिए जिम्मेदार साजिशकर्ता, फाइनैंसर, और स्पॉन्सर को न्याय के दायरे में लाने की आवश्यकता है। हम सभी देशों को उनकी अंतरराष्ट्रीय कानूनी बाध्यताओं और सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों का अनुपालन करते हुए भारत सरकार और दूसरी सभी एजेंसियों के साथ सक्रिय सहयोग की अपील करते हैं।' 

बतादें, UNSC में पुलवामा हमले की आलोचना यूएन में पाकिस्तान की नियमित प्रतिनिधि मलीहा लोधी की शीर्ष यूएन नेताओं से मुलाकात के एक दिन बाद आई है। इससे पहले मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने की कोशिशों को फ्रांस से बड़ा समर्थन मिलने की उम्मीद है। ऐसी संभावना है कि फ्रांस की ओर से इस संबंध में जल्द प्रस्ताव लाया जा सकता है। 

गौरतलब है कि अजहर जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले का भी मास्टरमाइंड है। 2016 में भारत के साथ पी-3 देशों अमेरिका, यूके और फ्रांस ने प्रस्ताव पर साथ दिया था। 2017 में भी पी-3 देश यूएन में ऐसा ही प्रस्ताव लाए थे। हालांकि, हर बार चीन ने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करते हुए प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले ही अड़ंगा लगा दिया। पिछले 10 सालों के दौरान यूएन में इस आतंकी संगठन को बैन कराने की भारत की यह चौथी कोशिश होगी। 2009 और 2016 में भारत मसूद अजहर पर बैन लगाने के लिए प्रयास कर चुका है। 
 

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