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साफा बांध घोड़ी पर बैठी दुल्हन की अनूठी पहल बनी चर्चा का विषय

साफा बांध घोड़ी पर बैठी दुल्हन की अनूठी पहल बनी चर्चा का विषय

बिसाऊ(झुंझुनू): इन दिनों झुंझनू के गांव गांगियासर में घोड़ी पर चढ़ने वाली एक दुल्हन चर्चा का विषय बनी हुई है. इस दुल्हन का नाम है ललीता कंवर. शादियां तो आपने बहुत देखी होगी, परंतु क्या आपने कभी देखा या सुना हैं कि एक लड़की साफा बांधकर घोड़ी पर चढ़कर शादी की कुछ रस्मों को पूरा करने के लिए निकलीं हो. जी हां ये सच हैं. ये अनोखा काम झुंझुनू जिले के गांव गांगियासर कस्बे का अजमेर डिस्कॉम बिसाऊ में तकनीकी कर्मचारी सीताराम चैहान की बेटी ललीता कंवर ने किया हैं. ललीता कंवरा जब गांगियासर कस्बे में घोड़ी पर साफा बांधकर रस्म पूरा करने के लिए निकली, तो लोग आश्चर्यचकित होकर देखते रह गए. ऐसा करने के पीछे उनका एक मकसद है, वह चाहती हैं कि लोगों की सोच बदले, लड़का लड़की समान है. लड़का व लड़की में भेदभाव नही होना चाहिये. उन्हे आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिये. जिसमें वे काफी हद तक सफल भी रही हैं. वह अपनी शादी से पहले तीन दिन तक बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संदेश दे रही है. 

मेरे माता-पिता बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के लिए संदेश देते आ रहे: 
ललीता कंवर ने बताया की ग्रामीण इलाकों में लोग टीवी शो या अखबारों में पढ़ने के बजाय एक्शन से ज्यादा प्रभावित होते हैं. मेरे माता-पिता बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के लिए संदेश देते आ रहे है. एक अजमेर डिस्कॉम बिसाऊ में तकनीकी कर्मचारी की बेटी अगर एक्शन ले रही है, तो जरूर इससे सोसायटी में बदलाव आ सकता है. एक महिला का घोड़े की सवारी करना जल्द ही दूसरे परिवार के लोग भी फॉलो करने वाले हैं. अब समाज में यह बात जरूर जाएगी कि शादी के वक्त घोड़ी पर बैठने की रस्म केवल बेटे ही नहीं, बल्कि बेटियां भी अदा करती है. 

ललीता कंवर ने रस्म को बदलकर घोड़ी पर सवार होना पसंद किया: 
बिंदोरी भारत की प्रसिद्ध प्रीवेडिंग रस्म बिंदोली से थोड़ी अलग है. इस रस्म में दूल्हा-दुल्हन के संबंधियों को दावत में आमंत्रित किया जाता है, इसलिए दूल्हा लड़की के घर तक घोड़े की सवारी करके हुए आता है. ललीता कंवर ने इस रस्म को बदलते हुए खुद ही घोड़ी पर सवार होना पसंद किया. 

...फर्स्ट डंडिया के लिए बिसाऊ, झुंझूनू से अशोक सोनी की रिपोर्ट


 

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शिक्षा का मंदिर हुआ शर्मसार, शिक्षक पर छात्राओं से अश्लील हरकत करने का आरोप

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बिसाऊ(झुंझुनूं): शिक्षा का मंदिर बच्चों के लायक बनाने में अहम भूमिका निभाते है. लेकिन झुंझुनूं जिले के बिसाऊ थाना क्षेत्र के गांव कोदेसर के राजकीय माध्यमिक स्कूल के साइंस शिक्षक ही हैवान बन गये. शिक्षक द्वारा छात्राओं के साथ अश्लील हरकत करने का मामला सामने आया है. बच्चियों की शिकायत के बाद परिजनों ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ बिसाऊ थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है.

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परीक्षा में फेल करने की धमकी देकर करता था अश्लील हरकत:
पुलिस ने तत्काल प्रकरण दर्ज कर आरोपी की तलास में जुट गई है. सूचना पर एससी एसटी सैल प्रभारी डीएसपी भंवरलाल ने बताया कि गांव कोदेसर में राजकीय माध्यमिक स्कूल के कक्षा 8 व 10 में पढ़ने वाली बच्चियों के साथ साइंस शिक्षक धर्मवीर धांगड़ जो तीन छात्राओं के साथ कलाश में पढ़ाते समय चोक फेंककर, व परीक्षा में फेल करवाने की धमकी देकर अश्लील हरकते करता रहता है. इस बारे में घरवालों को बताने से मना करता है. कहता है कि किसी को बताओगी तो परीक्षा में फेल कर दूंगा.

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पुलिस कर रही आरोपी की तलाश:
बच्चियों की आपबीती सुनने के बाद परिजनों ने इसकी सूचना बिसाई पुलिस को दी. उसके बाद पुलिस ने तुरंत स्कूल पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. इसके बाद पुलिस ने अश्लील हरकत करने वाले पॉक्सो व एससी एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश में जगह-जगह दबिश देना शुरू कर दिया. 

नया उत्साह नई उमंग के साथ उड़ी पतंग, चाइना डोर के खिलाफ चलाया गया अभियान बुरी तरह से फेल

नया उत्साह नई उमंग के साथ उड़ी पतंग, चाइना डोर के खिलाफ चलाया गया अभियान बुरी तरह से फेल

बिसाऊ(झुंझुनूं): मकर संक्रांति पर्व के उपलक्ष्य में शहर में पतंग बाजी में बच्चों के साथ युवा व महिलाओं में भारी उत्साह देखा गया. जिसमें बच्चों और युवाओं ने पतंगबाजी का हुनर दिखाते हुए आकाश में पैच लड़ाए. पतंगों का मुकाबला देखने के लिए काफी तादाद में छतों पर महिला पुरुष जमा हुए. शहर के पतंगबाजों ने आसमान में उड़ती विरोधियों की पतंग काटी. सर्वाधिक पतंग युवा वर्ग की लड़कियों ने काटे. शहर में सभी छतों पर चारों तरफ पतंग उत्सव का लुत्फ लेने के लिए दर्शक जमा थे. उपस्थित दर्शकों ने एक दूसरे का उत्साह बढ़ाया.

मकर संक्रांति पर्व का स्वागत नृत्य कर किया गया: 
पतंग उत्सव में महिलाओं व युवतियों ने उत्साह से भागीदारी की. पतंग उत्सव में आकर्षक पतंगों को आसमान में उड़ाया. पतंग उड़ाने की कला में महिलाओं ने पुरुषों को मात दी. मकर संक्रांति पर्व का स्वागत नृत्य कर किया गया. पतंग बाजी में बच्चों ने दिखाया उत्साह, लूटी पतंग वहीं पतंग कटने पर बच्चों ने लूटकर उत्सव का आनंद लिया. आसमान में रंगबिरंगी पतंगों से सजा रहा. देश की राजनीति के केंद्र बिंदु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच पतंग के पोस्टर पर भी मुकाबला बना हुआ है. खासकर चायनिज मांझे पर बैन के बावजुद भी सभी जगह इसी मांझे से उड़ती देखी गई पतंगे. 

चाइना डोर के खिलाफ चलाया गया अभियान बुरी तरह से फेल:
मकर संक्रांति के त्यौहार को देखते हुए जिला प्रशासन पुलिस प्रशासन की तरफ से चाइना डोर के खिलाफ चलाया गया अभियान बुरी तरह से फेल साबित हुआ है. हालत यह है कि लोग सरेआम बेखौफ होकर प्रशासन के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए चाइना डोर का प्रयोग कर रहे हैं और चाइना डोर से पतंग उड़ाते नजर आ रहे हैं. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की तरफ से भी चाइना डोर की बिक्री करने वालों इसका प्रयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे लेकिन इसका भी कोई खास असर नजर नहीं आया. ऐसे बहुत कम लोग नजर आ रहे हैं जिनके हाथ में परंपरागत दौर की चरखी या परंपरागत डोर का पीना है. सभी के हाथों में चाइना डोर चरखी ही नजर आ रहे हैं. 

...अशोक सोनी, बिसाऊ झुंझूनूं  

नव वर्ष की पूर्व संध्या पर पिलाया केसर युक्त दूध, युवाओं से की गई नशा छोड़ने की अपील 

नव वर्ष की पूर्व संध्या पर पिलाया केसर युक्त दूध, युवाओं से की गई नशा छोड़ने की अपील 

बिसाऊ, झुंझुनू: झुंझुनू जिले के गागिंयासर गांव के मुख्य बस स्टेण्ड पर समाज सेवी अविनाश महला कोदेसर के नेतृत्व में नव वर्ष की पूर्व संध्या पर नववर्ष मिलन समारोह व युवा दूध महोत्सव मनाया गया. जिसमें अनोखे रूप से साल की विदाई का कार्यक्रम हुआ. नए साल का स्वागत केसर युक्त दूध पिलाकर नए साल का स्वागत किया गया. जिसमें युवाओं में भारी उत्साह दिखा.

उत्साह के साथ सभी लोगों को दूध पिलाया गया. गागिंयासर गांव के लिए यह एक अनोखी बात रही, जिसमें 101 लीटर केसर युक्त दूध पिलाया गया और इस साल को विदाई दी गई. इस मौके पर सरपंच सुरेश भामु, अनिल महला, सच्चिदानन्द बेनीवाल ने नशा छोड़ दुध पीने की बात कही. बल्कि जो युवा नशा नहीं करते वो भी एक एक परीचित का नशा छुड़वायेगें, ऐसा संकल्प दिलाया गया. 

पतंगबाजी बनी परेशानी का सबब, बैन के बावजुद धड़ल्ले से बिक रहा है चायनीज मांझा

पतंगबाजी बनी परेशानी का सबब, बैन के बावजुद धड़ल्ले से बिक रहा है चायनीज मांझा

झुंझुनूं: झुंझुनूं जिले के बिसाऊ कस्बे में रंग बिरंगी पतंगों को हवा में उड़ाना बच्चों और बड़ों के लिए खास मनोरंजन का साधन रहा है, लेकिन यह पतंगबाजी अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रही है. इसका मुख्य कारण है चायनीज मांझा. नायलॉन से बना ये मांझा दर्दनाक हादसों का कारण बन रहा है. मकर संक्रांति पर्व पास आते ही शहर में पतंग और मांझें की मांग बढ़ रही है. बाजार में सादा मांझे की जगह नायलॉन, प्लास्टिक का ही मांझा बिक रहा है. 

संस्थाएं कर रही जागरूक:
हालांकि बिसाऊ सघर्ष समिति पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्थाएं तो पिछले वर्ष भी इस मांजे को नहीं बिकने देने की बात कह चुकी है, इसके बावजुद भी चायनीज मांझा धड़ल्ले से बिक रहा है. संस्थाएं इस बार भी वे पतंग के शौकीनों को चाइनीज मांझे की बजाएं धागे से तैयार मांजे से पतंग उड़ाने के लिए जागरूक कर रही हैं. 

मांझे की चपेट में आने से कई हादसे:
पिछले दिनों बाईपास पर इस मांझे की चपेट में आए व्यक्ति की नाक कट गई थी. फिर एक हादसे में एक बच्चे की मांझे ने उसकी शर्ट और जैकेट को काट दिया. देसी मांझा कसता है तो वह टूट जाता है, लेकिन चायनीज मांझा कसने पर शरीर के उस अंग को काट देता है. इस मांजे को तैयार करने में लोहकण भी उपयोग में लाये जाते हैं, जो बिजली के तारों में फंसकर शॉट कर सकते हैं. इससे बिजली का करंट भी लगने की आशंका रहती है. चाइनीज मांझा अजैविक सिंथेटिक धागे और कांच की परत चढ़ा कर बनाया जाता है, इसलिए नष्ट नहीं होता है. 

मांझे की डोर में उलझ कर मर गऐ आधा दर्जन पक्षी:
कस्बे में सरकार द्वारा प्रतिबंधित चाइनिज मांझे से उड रही पंतगों की डोर में आसमान में उडने वाले पक्षी उलझ कर मर रहे है. इस मांझे की बिक्री प्रतिबंधित होने के बाद भी कस्बे में धडल्ले से चाइनिज मांझो की बिक्री हो रही है. पुलिस भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही है. इससे पहले भी चाइनिज मांझे की डोर में आधे दर्जन पक्षी घायल होकर दम तोड चूके है।

... बिसाऊ झुंझूनू से अशोक सोनी की रिपोर्ट 

बच्चों की अनूठी मुहिम, चाईनीज मांझे के विरोध में निकाली जागरुकता रैली

बच्चों की अनूठी मुहिम, चाईनीज मांझे के विरोध में निकाली जागरुकता रैली

बिसाऊ, झुंझुनूं: खतरनाक चाईनीज मांझे की धार लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रही है. शहर से लेकर देहात तक धड़ल्ले से बिक रहे इस मांझे से कई हादसे हो चुके हैं. धारदार हथियार से भी तेज इस मांझे से हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद प्रशासन इसे प्रतिबंधित करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है. इसके मद्देनजर बिसाऊ में हाईटन अकेडमी के नन्हे मुन्हे बच्चों ने आज शहर के मुख्य मार्गों पर जागरुकता रैली निकाली. 

'बंद करो ये धागा खुनी, ये मां की गोद करता है सुनी':
दरअसल सस्ता और ज्यादा मजबूत होने के कारण पतंगबाज नासमझी में इसका प्रयोग कर रहे हैं. आसमान से जमीन पर आने तक यह जानलेवा साबित हो रहा है. बच्चों ने आज शहर के मुख्य मार्गों से श्लोगन लिखी तख्तियां हाथों में लेकर 'बंद करो ये धागा खुनी, ये मां की गोद करता है सुनी' नारों के साथ चाईनीज मांझे का उपयोग नहीं करने के लिये जागरुकता रैली निकाली एवं शपथ लेते हुये आमजन से अपील की कि आज बाद चाईनीज मांझे का उपयोग नही होने देगें. इस मौके पर पालिकाध्यक्ष मुश्ताक खान, थानाधिकारी रामपाल मीणा ने बच्चों का साथ देते हुए सभी को शपथ दिलाई और दुकानदारों व आमजन से अपील करते हुए कहा कि अगर चाईनीज मांझे को बेचते हुए व खरीदते हुए पाया गया तो कानुनी कार्रवाई की जायेगी. 

विधायक की अध्यक्षता में हुई नगरपालिका के नवगठित बोर्ड की पहली बैठक

विधायक की अध्यक्षता में हुई नगरपालिका के नवगठित बोर्ड की पहली बैठक

बिसाऊ(झुंझुनूं): बिसाऊ नव निर्वाचित पार्षदों की पहली साधारण बोर्ड की बैठक पालिका के नये भवन में विधायक रीटा चौधरी की अध्यक्षता में हुई.  बैठक का आगाज विधायक व सभी पार्षदों एवं चेयरमैन का ईओ मनीष पारीक द्वारा माला पहनाकर स्वागत के साथ किया. ईओ ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 के तहत घर घर कचरा संग्रहण की प्रभावी मॉनिटरिंग हेतू सीकर मॉडल अडोप्ट करने एवं प्रशासनिक वित्तीय स्वीकृति देने के एजेन्डे पर चर्चा शुरू की तथा सीकर से वीबॉइस लैब्ल कंपनी से आये मैनेजर कमल कुमार ने सीकर मॉडल पर घर घर कचरा संग्रहण के उपर बनाए गए चलचित्र को पर्दे पर दिखाकर जानकारी दी. ईओं ने जब घर घर कचरा संग्रहण पर प्रति एक घर पर एक माह का 50 रूपये यूजर चार्ज वसुलने के बारे बताना शुरू किया तो वार्ड 21 के पार्षद मोहम्मद सदीक खान इस का विरोध जताया.

कचरा संग्रहण पर यूजर चार्ज की गाइडलाइन सरकार व एनजीटी की: 
ईओ ने समझाया की कचरा संग्रहण पर यूजर चार्ज की गाइडलाइन सरकार व एनजीटी की है. इस पर सदीक खान ने कहा की यूजर चार्ज लेना या नहीं लेना इसका निर्णय सरकार नही हमारी सरकार तय करेगी. वार्ड एक के पार्षद खुसी मोहम्मद ने भी यूजर चार्ज व पलेन्टी नही वशुलने का समर्थन किया. वार्ड 8 के पार्षद अकबर खान ने यूजर चार्ज के बारे में अपना प्रस्ताव रखते हुए बताया की अभी यूजर चार्ज नही लगाए पहले वार्ड पार्षद घर घर कचरा संग्रहण की प्रक्रिया के बारे में अपने वार्ड के लोगो को समझायेगे उसके बाद लागू करें. इस पर विधायक ने कहा की हमारा दायित्व बनता है की हम अपने वार्ड व शहर को स्वच्छ रखे इतना यूजर चार्ज ज्यादा नहीं है. विधायक ने सीकर मॉडल की जानकारी लेते हुए ईओ को बताया की कचरा संग्रहण का संपूर्ण कार्य या तो पालिका करें या फिर पूरा इस कंपनी को दे दे. 

कई पार्षदों ने अपने वार्डों में नाली व सड़क आदि कार्यों की मांग रखी:
पूर्व में जारी निविदाओं के संबंध ईओ ने सदन को बताया की पिछले बोर्ड के कार्यकाल में छोड़े गए विकास कार्यों के ठेकों में 33 कार्यों की शिकायतें हो रही है जिसमें 20 कार्य पैंडिग पड़े हैं इसमें 12 के कार्य ही चालू नही हुए है. इस लिए इन कार्यो की निविदाये निरस्त कर अमानता राशि जप्त कि जाए. इस पर पार्षद सदीक खान ने ठेकेदारों की अमानता राशि जप्त कर इन्हे ब्लैक लिस्ट करने की बात कही. कस्बे के गंदे पानी निकासी के बारे में विधायक ने बताया की निकासी के लिए पालिका प्रपोजल बनाकर भेजे सरकार से स्वीकृत करवाना मेरा काम है. कई पार्षदों ने अपने वार्डों में नाली व सड़क आदि कार्यों की मांग रखी. इस पर चेयरमैन मुस्ताक खान ने सभी पार्षदों से कार्यो की लिस्ट बनाकर देने को कहा. चेयरमैन ने सदन से कहा की सरकार द्वारा स्वीकृत विकास राशि को व्यर्थ नही जाने देंगे उसका सही उपयोग करेगे. बैठक में 21 पार्षदों ने हिस्सा लिया. बैठक में कांग्रेस पार्षद डॉ. कमला सहारण, निर्दलिय रामवतार चेजारा,भाजपा के पार्षद हारून खत्री,जुलेखा बानो, हासीम खत्री उनुपस्थीत रहे. 

....अशोक सोनी, बिसाऊ झुंझूनूं

पालिका के सफाई कर्मचारी के साथ मारपीट, CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हुआ सारा घटनाक्रम

पालिका के सफाई कर्मचारी के साथ मारपीट, CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हुआ सारा घटनाक्रम

बिसाऊ(झुंझुनूं): जिले के बिसाऊ कस्बे में आज सुबह पालिका के सफाई कर्मचारी के साथ मारपीट की घटना सामने आई है. घटना को लेकर वाल्मीकि समाज एवं सफाई कर्मचारियों ने पुलिस थाने पहुंच कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की. कर्मचारी मनोज की सूचना पर पालिका के अधिशासी अधिकारी मनीष पारीक ने पुलिस थाने में रिपोर्ट देकर अज्ञात के खिलाफ राजकार्य में बाधा एव मनोज को जान से मारने के प्रयास का आरोप लगाया है.

सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुआ पूरा घटनाक्रम: 
प्राप्त जानकारी के अनुसार सफाई कर्मचारी मनोज आज सुबह बाइपास इलाके में सफाई का काम कर रहा था. इस दौरान गाड़ी से सवार होकर आए 5-6 बदमाशों ने मनोज से बात करते करते अचानक से हाथापाई शुरू कर दी. बाद में आरोपियों ने मनोज को गाड़ी से टक्कर मारने की कोशिश की तो मनोज ने भाग कर अपनी जान बचाई. पूरा घटनाक्रम पास ही एक दुकान पर लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई. पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच में जुटी हुई है. 

मूक रामलीला का रावण 180 साल से है खामोश, दशहरे वाले दिन भी नहीं मरता

मूक रामलीला का रावण 180 साल से है खामोश, दशहरे वाले दिन भी नहीं मरता

बिसाऊ(झुंझुनू): बिसाऊ जहां सभी रामलीला मे अहंकार में चूर होकर रावण अपनी तेज और डरावनी आवाज मे दहाडता है. रावण के साथ साथ लंका के राक्षसों की आवाज इतनी तेज होती है कि दूर-दूर तक उनकी गूंज सुनाई देती है, मगर बिसाऊ के मूक रामलीला का रावण ऐसा नहीं है. यह बोलता नही बल्की मूक बना रहता है. हां ये जरूर है कि सब कार्य उसी प्रकार करता है जिस प्रकार सभी रामलीला में रावण करते है लेकिन यह रावण करता है खामोशी के साथ और मूक बनकर. तो वहीं मर्यादा पुरूषोत्तम रामचन्द्र की मधुर आवाज भी इस रामलीला मे नहीं सुनाई देती ना ही अयोध्या के भजन सुनाई देते है और ये सिलसला लगातार पिछले 180 साल से भी अधिक समय से मूकरामलीला के रूप मे चला आ रहा है. जी हां हम बात कर रहे झुंझुनू जिले के बिसाऊ कस्बे में होने वाली मूक रामलीला की जो अपने आप मे एक अनुठी तो है ही साथ ही इनके पात्र व उनके रामलीला का मंचन भी अपने आप मे अनौखा है. 

पूरे संसार में होने वाली सभी रामलीलाओं से अलग: 
देशभर में हो रही रामलीलाओं की बात करे तो झुंझुनू जिले के बिसाऊ मे हो रही मूक रामलीला का इतिहास को खंगाला जाये तो कई रोचक जानकारियां सामने आती है. बिसाऊ की मूक रामलीला देशभर मे ही नही अपितु पूरे संसार में होने वाली सभी रामलीलाओं से इसलिए अलग है, क्योंकि इसके मंचन के दौरान सभी पात्र बिन बोले (मूक बनकर) ही सब कह जाते हैं. यही नही इनके सभी पात्र अपने मुखौटो से अपनी पहचान दर्शाते है ना की बोल कर. यही कारण है कि इसको मूक रामलीला के नाम से जाना जाता है. इस तरह की रामलीला का मंचन पुरे संसार मे अन्य कही नहीं होती. यही कारण है कि यह अपने-आप मे सबसे अनुठी व अनौखी रामलीला है. मूक रामलीला की शुरुआत रामाणा जोहड़ से हुई. फिर इसका मंचन गुगोजी के टीले पर होने लगा. बाद में काफी समय तक स्टेशन रोड पर हुई. वर्ष 1949 से गढ के पास बाजार में मुख्य सड़क पर लीला का मंचन शुरू हुआ, जो वर्तमान में जारी है. 

180 साल पुराना इतिहास: 
यदी मूक रामलीला के कब से शुरू होने के पीछे की कहानी की बात करे तो इसके बारे मे अलग-अलग तथ्य सामने आते है कुछ का कहना है यह 200 साल पुरानी है तो कुछ 180 साल पहले शुरू होना बताते है. वहीं इस बारे मे इतिहासकार त्रिलोकचन्द शर्मा से पूछा गया तो उनके अनुसार यह रामलीला लगभग 180 साल पहले जमना नाम की एक साध्वी के द्वारा बिसाऊ के रामाण जौहडा से शुरूआत करना बताया. साध्वी जमना ने गांव के कुछ बच्चों को एकत्रित कर रामाणा जोहड़ में रामलीला का मंचन शुरू किया. हाथ से उनके पात्र के मुताबिक मुखोटे बनाए गए, लेकिन मुखोटे पहनने के बाद बच्चों को संवाद बोलने में दिक्कत होने लगी तो उनसे मूक रहकर ही अपने पात्र की भूमिका निभाने को कहा गया और इस प्रकार बिसाऊ में मूक रामलीला की शुरुआत हुई, जो आज तक जारी है. 

रामलीला शुक्ल प्रथम से पूर्णिमा तक चलती है: 
इस लीला की खास बात यह है कि यह शुक्ल प्रथम से पूर्णिमा तक चलती है. वहीं इस लीला मे रावण दशहरे वाले दिन नही मरता बल्की चतुरदर्शी को मरता है और यहां की रामलीला में विजयादशमी की बजाय चतुर्दशी यानी दशहरे के चार दिन बाद रावण दहन होता है. साथ ही मूक रामलीला का मंचन आसोज शुक्ल प्रथम से पूर्णिमा तक 15 दिन तक होता है.

साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतिक:  
यह लीला अपने आप में साम्प्रदायिक सौहार्द के प्रतिक के रूप में भी जानी जाती है. त्रिलोक चन्द शर्मा कि माने तो लीला का मंच ढोल-नगाडो पर होती है जो स्थानिय मुस्लिम समुदाय के ईल्लाही लोगों के द्वारा बजाया जाता है. जहां लगभग सभी रामलीला मे अमूमन हर दिशाओं में लाउड स्पीकर लगाए जाते हैं, मगर यहां एक भी लाउड स्पीकर नहीं लगाया जाता है. सभी पात्र अपना अभिनय मूक रहकर ही करतेहैं. खास बात तो यह है कि रामलीला का मंच ही नहीं होता. पूरी रामलीला का मंचन खुले मैदान पर ही होता है.

लीला के पात्रों की पोशाक भी अलग तरह की: 
लीला मे पंचवटी व लंका की बनावट मैदान के उत्तरी भाग में काठ (लकडी) की बनी हुई अयोध्या व दक्षिण भाग में सुनहरे रंग की लंका तथा मध्य भाग में पंचवटी रखी जाती है. मैदान में बालू मिट्टी डालकर पानी का छिड़काव किया जाता है. लीला शुरू होने से पहले चारों स्वरूप रामलीला हवेली से पहले घोड़ों पर बैठकर आते थे लेकिन अब वाहन में बैठकर आते हैं. लीला के पात्रों की पोशाक भी अलग तरह की होती है. अन्य रामलीला की तरह शाही एवं चमक दमक वाली पोशाक न होकर साधारण पोशाक होती है. राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न की पीली धोती, वनवास में पीलाकच्छा व अंगरखा, सिर पर लम्बे बाल एवं मुकुट होता है. मुख पर सलमें-सितारे चिपका कर बेल-बूंटे बनाए जाते है. हनुमान, बाली-सुग्रीव, नल-नील, जटायू एवं जामवन्त आदि की पोशाक भी अलग अलग रंग की होती है. सुन्दर मुखौटा तथा हाथ में घोटा होता है. 

रावण की सेना काले रंग की पोशाक में होती है: 
रावण की सेना काले रंग की पोशाक में होती है. हाथ में तलवार लिए युद्ध को तैयार रहती है. मुखौटा भी लगाया हुआ होता है. आखिरी चार दिनों में कुम्भकरण, मेधनाथ, नारायणतक एवं रावण के पुतलों का दहन किया जाता है. फिर भरत मिलाप के दिन पूरे नगर में श्रीराम दरबार की शोभा यात्रा निकाली जाती है. इस मूक रामलीला को देखने के लिये अप्रवासी भारतीयों के साथ साथ काफी संख्या मे शैलानीयों का भी आना इस रामलीला की खासियत है. 

....फर्स्ट इंडिया के लिए बिसाऊ, झुंझुनू से अशोक सोनी की रिपोर्ट 
 

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