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सरहदी जिले का एक अनूठा पुलिस थाना, 27 सालों में बलात्कार का एक भी मुकदमा नहीं हुआ दर्ज

सरहदी जिले का एक अनूठा पुलिस थाना, 27 सालों में बलात्कार का एक भी मुकदमा नहीं हुआ दर्ज

जैसलमेर: जिले में एक थाना ऐसा भी है जहां 27 वर्ष में महज 60 मुकदमे दर्ज हुए हैं और जहां पुलिस कर्मियों के पास कोई काम ही नहीं है. कई बार पूरे साल में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं होता. इस थाने को 27 साल तक हेड कांस्टेबल ही संभालता रहा है. शाहगढ़ का यह थाना जैसलमेर में पाकिस्तान सीमा से सटा है, जहां 27 वर्ष में महज 60 मुकदमे दर्ज हुए हैं. थाना वीरान मरुस्थल क्षेत्र में है, जहां आसपास कोई मनुष्य मुश्किल से ही नजर आता है. आइए बताते है ऐसे थाने की कहानी... 

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यह थाना अपने आप में मिसाल बना हुआ:  
देश के अमूमन लगभग हर थाना क्षेत्र में प्रतिदिन हत्या, बलात्कार और चोरी-डकैती के मामले बड़ी संख्या में दर्ज होते रहते हैं. वहीं, राजस्थान के जैसलमेर से लगती अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर एक ऐसा पुलिस थाना मौजूद है जो अपने आपमें काफी अनूठा है. जी हां, इस पुलिस थाने में पूरे साल एक भी मुकदमा दर्ज नहीं होता है. अगर कभी एक दो मामले दर्ज होते भी हैं तो वो भी छोटी-मोटी चोरी का. पिछले 27 सालों में 1993 में पुलिस थाना शुरू होने के बाद यानी अभी तक एक भी बलात्कार का मामला दर्ज नहीं हुआ है. हत्या तो बहुत दूर की बात है. यह थाना अपने आप में मिसाल बना हुआ है. इस थाने का नाम शाहगढ़ बल्ज है. यह थाना राजस्थान के जैसलमेर से लगती अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के मात्र 15 किलोमीटर पर बना हुआ है. इस थाने में 27 सालों से धारा 302 यानी हत्या का मुकदमा व 307 यानी हत्या के प्रयास का एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है. इस थाने के आसपास ढांणियों में रहने वाले ग्रामीण इतने प्रेम व भाई चारे के साथ यहां रहते हैं कि 27 सालों में मात्र यहां करीब 60 मुकदमे ही दर्ज हुए हैं. इस वर्ष 6 महीनों में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है. न ही कभी किसी महिला और पुरुष कैदी को थाने की जेल में कैद रखा गया. 

महिला और पुरुष बैरक भी अपराधियों के लिए तरस रही: 
भारत-पाक सीमा के निकट शाहगढ़ बल्ज पर बना हुआ थाना सचमुच एक ऐसी मिसाल बना हुआ है. जहां अपराध का दूर-दूर तक वास्ता नहीं है. इस थाने की सबसे बड़ी दिलचस्प बात यह है कि शाहगढ़ क्षेत्र में इस थाने की एक मात्र बिल्डिंग बनी हुई है. आसपास कई गांव, कई कस्बे हैं, जहां करीब 4000 की आबादी वाले इस क्षेत्र में ग्रामीण दूर-दूर ढांणियों में रहते हैं. इस थाने की बिल्डिंग में बने हुए महिला और पुरुष बैरक भी अपराधियों के लिए तरस रही है. जानकारी के मुताबिक, महिला बैरक में आज तक किसी महिला कैदी को नहीं रखा गया है क्योंकि किसी महिला-पुरुष पर गंभीर अपराध का मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है. यही स्थिति पुरुष बैरक की भी बनी हुई है. हालांकि, इस थाने की एक समस्या है कि यहां आवागमन के साधन नहीं हैं. जैसलमेर शहर जाना हो तो वहां से गुजरने वाले बी.एस.एफ के वाहनों में लिफ्ट लेकर ही आगे जाया जा सकता है.

अब तक करीब 60 मुकदमे ही इस थाने में दर्ज हुए:
इस थाने पर इंस्पेक्टर सहित कुल 15 पुलिसकर्मियों की स्ट्रेन्थ हैं लेकिन यहां वर्तमान में एक सब इंस्पेक्टर सहित 9 पुलिसकर्मी तैनात है. 1995 में तारबंदी से पूर्व सीमा पार होने वाली तस्करी व सीमाई अपराध घटित होते रहते थे लेकिन तारबंदी के बाद से तस्करी और अन्य अवांछनीय गतिविधियों में विराम लग गया है. 1993 में इस थाने की स्थापना हुई थी तब से लेकर अब तक करीब 60 मुकदमे ही इस थाने में दर्ज हुए हैं. पिछले कुछ सालों का आंकड़ा देखे तो इस थाने में 2005 में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ. 2006 में एक, 2007 में दो, 2008 में एक 2009 में जीरो, 2010 में जीरो, 2011 में एक, 2012 में चार, 2013 में दो, 2014 में दो, 2015 में तीन मुकदमे दर्ज हुए जबकि 2016 में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ. 2019 में 2 मुकदमे दर्ज हुए थे जबकि इस साल अभी तक एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है. ये अपराध रहित थाना पूरे देश में एक मिसाल बना हुआ है. 

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कई साल बीत जाने के बावजूद भी मुकदमे दर्ज नहीं होते:
शाहगढ़ का यह थाना जैसलमेर में पाकिस्तान सीमा से सटा है. सबसे बड़ी बात है कि 60 मुकदमे में एक भी केस दुष्कर्म का नहीं है. थाना वीरान मरस्थल क्षेत्र में है, जहां आसपास कोई आदमी मुश्किल से ही नजर आता है. यहां रिपोर्ट दर्ज कराना भी मुश्किल काम है, क्योंकि थाने तक पहुंचने में करीब एक डेढ़ घंटा लगता है. वहीं इस थाने में तैनात पुलिसकर्मी और थाने के आसपास रहने वाले ग्रामीण बताते हैं कि यहां पर कई साल बीत जाने के बावजूद भी मुकदमे दर्ज नहीं होते. छोटे-मोटे मामले मिल बैठ कर निपटा लेते हैं. 

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पिता का आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराली जन दहेज से संतुष्ट नहीं थे. जिसको लेकर वह उनकी बेटी को आए दिन दहेज की खातिर प्रताड़ित करते थे आखिरकार उन्होंने आज उस को मौत के घाट उतार दिया. घटना को लेकर पुलिस उपाधीक्षक विजय कुमार ने बताया कि मृतका का पति शिवराम जेल प्रहरी के पद पर वारा जिले में कार्यरत है. घटना के दौरान वह गांव में ही था.आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है तथा अनुसंधान करते हुए कार्यवाही शुरू कर दी है. जिस घर में महिला की मौत हुई है उस घर में आज शादी थी. महिला की मौत के बाद शादी वाले घर में खुशियां मातम में बदल गई है. आरोपी घर छोड़कर फरार हो गए हैं जिससे शादी वाले घर में सन्नाटा पसरा हुआ है. 

डिजिटल बाल मेला में कोरोना क्विज़, कोरोना से जुड़े बच्चों के सवालों का डॉ. सुदीप्तो चक्रवर्ती ने दिया जवाब 

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जयपुर: डिजिटल बाल मेला में शामिल होने वाले बच्चों के लिए हर दिन ऑनलाइन एक्टिविटी आयोजित की जा रही है. बाल मेला की टीम ने मंगलवार को ऑनलाइन डिबेट की थी तो आज कोरोना क्विज़ आयोजित हो रही है. कोरोना से जुड़े बच्चों के सवालों का डॉक्टर सुदीप्तो चक्रवर्ती ने जबाव दिया.

कोरोना की वजह से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. इसलिए डिजिटल बाल मेला  उन्हें घर बैठे ही अपनी प्रतिभा सामने लाने का मौका दे रहा है. साथ ही हर दिन अलग अलग तरह की ऑनलाइन एक्टिविटी में शामिल होने का अवसर भी. 

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जयपुर के डॉ. सुदीप्तो चक्रवर्ती आज बच्चों के सवाल के ऑनलाइन जवाब दे रहे हैं. गौरतलब है कि डिजिटल बाल मेला में होने वाले हर आयोजन को बच्चे ही संभालते हैं. आज की क्विज़ को अजमेर से गौरी खंडेलवाल मोडरेट करेंगी.

गुजरात के पीरामन गांव में किए जाएंगे अहमद पटेल सुपुर्द ए खाक, निधन की खबर से पूरा गांव दुखी

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भरूच: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल गुजरात के भरूच जिले में उनके पैतृक गांव पीरामन में सुपुर्द ए खाक किए जाएंगे. यह जानकारी उनके एक सहयोगी ने दी. पटेल के निधन की खबर मिलने के बाद पीरामन गांव के निवासियों ने स्थान के विकास में उनके योगदान को याद किया और कुछ ने कहा कि वह उनके लिए पिता तुल्य थे. यह गांव अंकलेश्वर तालुका में पड़ता है.

कांग्रेस के वर्षों तक रणनीतिकार रहे पटेल:
कांग्रेस के स्थानीय नेता और पटेल के निकट सहयोगी नाजुभाई फदवाला ने कहा कि पटेल ने इच्छा जताई थी कि उनका अंतिम संस्कार भरूच के पीरामन गांव में उनके माता-पिता की कब्र के पास ही किया जाए. कांग्रेस के वर्षों तक रणनीतिकार रहे पटेल (71) का बुधवार को निधन हो गया. वह कुछ हफ्ते पहले कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे और उपचार के दौरान उनके कई अंगों ने काम करना बंद दिया था.

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अहमद पटेल की थी ये अंतिम इच्छा:
फदवाला ने कहा कि उनके पार्थिव शरीर को शाम तक गांव में लाया जाएगा और  बृहस्पतिवार को सुपुर्द ए खाक होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 प्रोटोकॉल के मुताबिक सुपुर्द ए खाक किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि अहमद भाई की अंतिम इच्छा थी कि पीरामन में उनके माता-पिता की कब्र के पास उन्हें सुपुर्द ए खाक किया जाए. वह अपने गांव से बहुत जुड़े हुए थे और अकसर यहां आते थे.

निधन की खबर से पूरा गांव दुखी:
उन्होंने कहा कि वह अपने माता-पिता के बेहद करीब थे, खासकर अपनी मां से और जब भी पीरामन आते थे तो काफी समय तक मां की कब्र के पास बैठे रहते थे. उन्होंने कहा कि उचित सामाजिक दूरी के साथ अंतिम नमाज के लिए मैदान तैयार किया जा रहा है.स्थानीय निवासी सुलेमान पटेल ने कहा कि कांग्रेस नेता के निधन की खबर से पूरा गांव दुखी है. उन्होंने कहा कि वह मेरे पिता की तरह थे। पूरा गांव दुखी है. एक अन्य ग्रामीण गणेशभाई ने कहा कि अहमद पटेल के निधन की खबर सुनकर वह दुखी हैं.

लिफ्ट में फंसे 3 लोगों को दमकल कर्मियों ने निकाला बाहर, कोई जनहानि नहीं

लिफ्ट में फंसे 3 लोगों को दमकल कर्मियों ने निकाला बाहर, कोई जनहानि नहीं

पालघर: महाराष्ट्र के पालघर जिले में एक बड़ा हादसा होते-होते रह गया है. खबर है की पालघर जिले के वसई शहर में छह मंजिला इमारत में एक लिफ्ट में तीन लोग फंस गये थे जिसके बाद दमकल कर्मियों की मदद से उन्हें बाहर निकाला गया है. इस घटना की जानकारी दमकर विभाग के एक अधिकारी ने दी है. 

दमकल विभाग के सूत्रों ने बताया कि पपड़ी इलाके में मंगलवार की दोपहर एक इमारत की लिफ्ट खराब हो गई थी और पहली व दूसरी मंजिल के बीच फंस गई थी. उस वक्त लिफ्ट में तीन लोग मौजूद थे जिनकी सांस अटक के रह गई थी . बताया जा रहा है  कि  यह स्थिति करीब एक घंटे तक रही थी. 

अधिकारी ने जानकारी देते हुए  बताया  है कि लिफ्ट में फंसे एक व्यक्ति ने दमकल कर्मियों को बुलाया था. इसके बाद दमकल विभाग के कर्मी शीघ्र ही वहां पहुंचे और अंदर फंसे तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिय़ा था. जिससे बड़ा हादसे होते-होते रह गया है. (सोर्स-भाषा)

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वनडे से पहले अलग-अलग शिविर में ट्रेनिंग पर वेड ने कहा-हमारी ओर से कोई बहाना नहीं होगा

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सिडनी: भारत के खिलाफ एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला से पहले ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को अलग-अलग समूह में ट्रेनिंग को बाध्य होना पड़ा है लेकिन विकेटकीपर बल्लेबाज मैथ्यू वेड ने कहा कि टीम ‘कोई बहाना नहीं बनाएगी’ क्योंकि खिलाड़ी इतने अनुभवी हैं कि इस तरह की स्थिति से निपट सकें.

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ऑस्ट्रेलिया की सीमित ओवरों की टीम इस समय दो स्थानों पर ट्रेनिंग पर रही है. एक समूह मुख्य कोच जस्टिन लैंगर के मार्गदर्शन में सिडनी क्रिकेट मैदान पर ट्रेनिंग कर रहा है. यूएई में हाल में संपन्न इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने वाले स्टीव स्मिथ, डेविड वार्नर और पैट कमिंस जैसे खिलाड़ी 14 दिन के अनिवार्य पृथकवास से गुजर रहे हैं और सहायक कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड के साथ ट्रेनिंग कर रहे हैं.

वेड ने ‘क्रिकेट.कॉम.एयू’ से कहा कि हमने कुछ हद तक इस तरह की स्थिति का सामना पहले भी किया है लेकिन मौजूदा स्थिति पहले की स्थिति से बिलकुल अलग है. यह टीम लंबे समय से साथ है, विशेषकर अंतिम एकादश, इसलिए हम शुक्रवार सुबह उतरेंगे और सभी को अपनी भूमिका पता है. हमारी ओर से कोई बहाना नहीं है. दोनों समूह गुरुवार को एक साथ आएंगे और पहला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय शुक्रवार को खेला जाएगा और ऐसे में खिलाड़ियों के पास एक समूह के रूप में अभ्यास करने का समय नहीं होगा. दूसरी तरफ भारतीय टीम भी यूएई से आने के बाद पृथकवास से गुजर रही है और सीमित ओवरों की टीम के अलावा टेस्ट टीम भी एक समूह के रूप में ट्रेनिंग कर रही है.

वेड ने कहा कि भारत भी पृथकवास में है लेकिन उन्हें एक साथ ट्रेनिंग करने का मौका मिल रहा है जो हमारी स्थिति से थोड़ा अलग है. कप्तान आरोन फिंच, डेविड वार्नर, स्टीव स्मिथ की मौजूदगी में ऑस्ट्रेलिया का एकदिवसीय शीर्ष क्रम काफी मजबूत है जिसमें एलेक्स कैरी विकेटकीपर की जिम्मेदारी निभाएंगे और ऐसे में अक्टूबर 2017 में अपना पिछला एकदिवसीय खेलने वाले वेड की नजरें चार दिसंबर से शुरू होने वाली टी20 श्रृंखला पर टिकी है.
सोर्स भाषा

TDB की बड़ी घोषणा सबरीमला तीर्थयात्रियों को बोतलों में मिलेगा औषधीय पेयजल

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सबरीमलाः हाल ही में केरल के सबरीमला से एक बड़ी खबर आ रही है. बताया जा रहा है कि भगवान अय्यप्पा के मंदिर में आने वाले  श्रद्धालुओं को पीने के लिए जल बोतलों में दिया जाएगा. ऐसा कहा गया है कि अयप्पा मंदिर में चढा़ई के दौरान श्रद्धालुओं में वितरित किए जाने वाले औषधीय जल को अब सील पैक बोतलों में वितरित किया जाएगा. ये कदम कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जिसे काफी सराहा गया है. 

वायरस के मद्देनजर पहाड़ी मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (टीडीबी) ने विशेष रूप से तैयार पेयजल को अलग स्टील की बोतलों में वितरित करने की नई व्यवस्था शुरू की है, ताकि बीमारी फैलने का खतरा न हो. टीडीबी के अधिकारियों के मुताबिक, तीर्थयात्री स्टील की बोतल प्राप्त करने के लिए 200 रुपये जमा कर सकते हैं और आधार शिविर पम्बा के अंजनिया सभागार से औषधीय पेयजल एकत्र कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि जब दर्शन के बाद स्टील की बोतल काउंटर पर वापस कर दी जाएगी तो 200 रुपये की जमा राशि उन्हें वापस कर दी जाएगी. हर साल भगवान अयप्पा भक्तों के बीच वितरित किए जाने वाले औषधीय पेयजल को चुक्क(सूखे अदरक), रामचमऔर पाथिमुखम (सपनवुड) जैसे प्राकृतिक पदार्थों को उबालकर तैयार किया जाता है. ये स्वास्थ्य के लिए बहुत ही अच्छा होता है. जिसके बाद सभी ने इस फैसले की हौसलाआफजाई की है. (सोर्स-भाषा)

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