अमेरिका ने भारत से छीना GSP का दर्जा, ये होगा असर

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/01 03:16

नई दिल्ली: मोदी सरकार बनने के साथ ही मंत्रियों के विभागों का भी बंटवारा हो गया है, और वित्त विभाग पूर्व रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण को दिया गया है. इसकी के साथ अब उनकी चुनौतियां भी बढ़ गई हैं. क्योंकि अमेरिका ने भारत को मिले सामान्य तरजीही प्रणाली (GSP) को खत्म कर दिया है, जिसका असर भारत की व्यापार प्रणाली पर पड़ने वाला है. अमेरिका इसे 5 जून से लागू हो जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप ने 4 मार्च को व्हाइट हाउस में इस बात की घोषणा की थी कि वह GSP कार्यक्रम से भारत को बाहर करने वाले हैं. 

अब इस संबंध में किसी भी समय औपचारिक सूचना जारी की जा सकती है. यूएस ट्रेड रेप्रिजेंटटिव ऑफिस के मुताबिक GSP का उद्देश्य विकासशील देशों को अपने निर्यात को बढ़ाने में मदद करना है ताकि उनकी अर्थव्यवस्था बढ़ सके और गरीबी घटाने में मदद मिल सके. 

व्यापार नीति पर अमेरिका का आक्रामक रूप
दरअसल, डॉनल्ड ट्रंप व्यापार घाटे को कम करने के लिए काफी आक्रामक हैं. चीन के साथ तो उन्होंने ट्रेड वॉर ही छेड़ दी है. बता दें कि भारत अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस वाला 11वां सबसे बड़ा देश है यानी भारत का अमेरिका को निर्यात वहां से आयात से ज्यादा है। 2017-18 में भारत का अमेरिका के प्रति सालाना ट्रेड सरप्लस 21 अरब डॉलर था.

भारत को बड़ा झटका
GSP के तहत केमिकल्स और इंजिनियरिंग जैसे सेक्टरों के करीब 1900 भारतीय प्रॉडक्ट्स को अमेरिकी बाजार में ड्यूटी फ्री पहुंच हासिल है. अमेरिका द्वारा GSP के तहत लाभ बंद किया जाना भारत के लिए निश्चित तौर पर एक झटका है. हालांकि, वाणिज्य सचिव अनूप वधावन ने पिछले दिनों कहा था कि भारत को कोई खास नुकसान होगा. वधावन ने कहा कि GSP के तहत तरजीही दर्जा वापस लेने का कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि GSP के फायदे बहुत ज्यादा नहीं थे.

GSP का मतलब
GSP यानी जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज. यह अमेरिका द्वारा अन्य देशों को व्यापार में दी जाने वाली तरजीह की सबसे पुरानी और बड़ी प्रणाली है. इसकी शुरुआत 1976 में विकासशील में आर्थिक वृद्धि बढ़ाने के लिए की गई थी. दर्जा प्राप्त देशों को हजारों सामान बिना किसी शुल्क के अमेरिका को निर्यात करने की छूट मिलती है. अभी तक लगभग 129 देशों को करीब 4,800 गुड्स के लिए GSP के तहत फायदा मिला है.  साल 2017 में भारत GSP कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है.

उल्लेखनीय है कि ट्रंप अमेरिका का व्यापार घाटा कम करने की जद्दोजहद कर रहे हैं और इसी क्रम में वह भारत पर अमेरिकी वस्तुओं पर ऊंची दर से शुल्क लगाने का आरोप लगता रहा है. उन्होंने अमेरिकी संसद के नेताओं को लिखे पत्र में कहा था, 'मैं यह कदम अमेरिका और भारत सरकार के बीच गंभीर बातचीत के बाद उठा रहा हूं.

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