बीकानेर : बीकानेर की धरती ने देश को महाराजा करणी सिंह और राज्यश्री कुमारी जैसे दिग्गज निशानेबाज दिए हैं. अब उसी ऐतिहासिक विरासत को नई ऊंचाई देने की तैयारी शुरू हो गई है.बीकानेर का प्रतिष्ठित सादुल क्लब अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है. इंग्लैंड से मंगवाई गईं ओलंपिक स्तर की 17 अत्याधुनिक मशीनों के जरिए यहां ट्रैप और स्कीट शूटिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा.लक्ष्य है 2028 के ओलंपिक की तैयारियों को मजबूती देना और बीकानेर की प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना.
मरुधरा से ओलंपिक तक का सपना, रेगिस्तान की धरती… निशानेबाजी का गौरवशाली इतिहास… और अब ओलंपिक में पदक जीतने का नया सपना… बीकानेर एक बार फिर निशानेबाजी की दुनिया में अपनी पहचान मजबूत करने की ओर बढ़ रहा है. महाराजा करणी सिंह और राज्यश्री कुमारी की ऐतिहासिक उपलब्धियों के लिए पहचाने जाने वाले इस शहर में अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज तैयार की जा रही है.
बीकानेर के सादुल क्लब में ओलंपिक स्तर की 17 अत्याधुनिक मशीनें लगाई जा रही हैं. इनमें 15 मशीनें ट्रैप शूटिंग और 2 मशीनें स्कीट शूटिंग के लिए होंगी. खास बात ये है कि इन मशीनों को इंग्लैंड से मंगवाया गया है.इन्हें स्थापित करने के लिए इंग्लैंड के इंजीनियर केविन और जोस की सेवाएं ली जाएंगी. इस पहल के जरिए बीकानेर के निशानेबाजों को अपने ही शहर में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण की सुविधा मिल सकेगी.
बीकानेर और निशानेबाजी का रिश्ता कोई नया नहीं है. महाराजा करणी सिंह ने अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी में बीकानेर को गौरव दिलाया. वहीं राज्यश्री कुमारी ने भी अपनी शानदार उपलब्धियों से देश और प्रदेश का नाम रोशन किया. दोनों दिग्गजों को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.अब इसी विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी के कंधों पर है.
सादुल क्लब में वर्तमान में करीब 300 से 400 बच्चे विभिन्न खेलों का अभ्यास कर रहे हैं.ऐसे में शूटिंग रेंज की यह पहल बीकानेर के खेल जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है. जहां कभी महाराजा करणी सिंह की निशानेबाजी ने दुनिया में बीकानेर की पहचान बनाई थी. वहीं अब उम्मीद है कि इसी धरती से देश को नए अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और भविष्य के ओलंपियन मिलेंगे.
सिर्फ आधुनिक मशीनें ही नहीं. बल्कि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए भी व्यापक योजना तैयार की गई है.शूटिंग रेंज का निरीक्षण नेशनल राइफल एसोसिएशन के तकनीकी विशेषज्ञ करेंगे.तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद यहां विधिवत प्रशिक्षण शुरू होगा. देश के नामचीन शूटिंग कोच खिलाड़ियों को निशानेबाजी के गुर सिखाएंगे. जरूरत पड़ने पर विदेशी कोच की सेवाएं भी ली जाएंगी.इतना ही नहीं, प्रशिक्षण के लिए खिलाड़ियों को सादुल क्लब की ओर से बंदूकें भी उपलब्ध करवाई जाएंगी. क्लब प्रबंधन का लक्ष्य है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर संसाधनों के अभाव में पीछे नहीं रहना पड़े… और बीकानेर से निकलने वाले निशानेबाज राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी देश का परचम लहराएं.
बीकानेर की पहचान अब केवल इतिहास, कला और संस्कृति तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि खेलों की दुनिया में भी यह शहर एक नई इबारत लिखने की तैयारी कर रहा है. सादुल क्लब की यह शूटिंग रेंज अगर तय मानकों पर खरी उतरती है, तो यहां की प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण का बड़ा अवसर मिलेगा. अब देखना होगा कि महाराजा करणी सिंह की इस धरती से अगला ओलंपियन कब निकलता है.