जयपुर: कांग्रेस के 'वोट बचाओ देश बचाओ' अभियान के तहत एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक 'मेगा' रैली का आयोजन किया जा रहा है. कांग्रेस और 'INDIA' गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ संयुक्त रूप से होने वाली इस रैली के लिए कांग्रेस ने पूरे देश में तैयारी शुरू कर दी है. यह रैली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में बुलाई गई है. रैली की सफलता के लिए कांग्रेस का फोकस मुख्य रूप सें राजस्थान, उत्तरप्रदेश, पंजाब व हरियाणा पर है. दिल्ली से सटे इन राज्यों को एक नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाले विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन के लिए भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है. राजस्थान में हालांकि पंचायत चुनाव चल रहे हैं इसके बावजूद यहां की प्रदेश इकाई को बड़ा लक्ष्य दिया गया है.
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे व वोट चोरी के मुद्दे पर दिल्ली में छोटे मोटे प्रदर्शन करने के बाद अब कांग्रेस इंडिया गंठबंधन के सहयोगी दलों के साथ दिल्ली में नेशनल लेवन की मेगा रैली करने जा रही है. विपक्षी गठबंधन की मुख्य धुरी होने के नाते कांग्रेस इस रैली के लिए समर्थन जुटाने में सबसे आगे है. संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल खुद इस रैली की सफलता को सुनिश्चित कर रहे हैं. सभी प्रदेश इकाईयों को विशेष निर्देश जारी कर दिए गए हैं. सभी महासचिवों व प्रदेश प्रभारियों को भी रैली की सफलता का टारगेट दिया गया है. केसी ने एक पत्र लिखकर रैली के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं.
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रैली की सफलता के लिए लिखा पत्र:
-सभी प्रदेश अध्यक्षों, AICC के सभी महासचिवों/प्रभारियों को निर्देश दिए
-दिल्ली की रैली में अधिकतम भागीदारी के निर्देश दिए गए
-कहा - पीसीसी पदाधिकारियों, डीसीसी/बीसीसी अध्यक्षों, सांसदों, विधायकों
-स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों, अग्रिम संगठनों, विभागों, प्रकोष्ठों तथा
-जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की अधिकतम संभव भागीदारी सुनिश्चित करें
-केसी वेणुगोपाल ने कहा कि प्रत्येक जिले और ब्लॉक का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए
-रैली में जनभागीदारी की योजना पहले से तैयार करें, जिला-वार लक्ष्य तय किए जाए
-जिम्मेदार नेताओं की सूची सहित पूरी प्लानिंग 26 अक्टूबर तक AICC को भेजने के निर्देश
-त्योहारों के मौसम में भीड़ को देखते हुए रेल, बस एवं अन्य यात्रा टिकटों की व्यवस्था स्वयं करनी होगी
-दिल्ली में ठहरने की व्यवस्था भी कांग्रेस नेताओं को स्वयं करने के निर्देश दिए गए हैं
-केसी वेणुगोपाल ने प्रत्येक प्रतिनिधिमंडल के लिए अग्रिम बुकिंग सुनिश्चित करने के लिए कहा है
-एआईसीसी के राष्ट्रीय वॉर रूम/कनेक्ट सेंटर राज्यवार तैयारियों की निगरानी करेंगे
दिल्ली की कांग्रेस रैली में हमेशा राजस्थान की भागीदारी सबसे ज्यादा होती हैं, लेकिन इस बार रैली की टाइमिंग ने राजस्थान की प्रदेश इकाई को परेशानी में डाल दिया है. दरअसल राजस्थान में पंचायत व जिला परिषद के चुनाव चल रहे हैं. सभी सांसद, विधायक व अन्य प्रमुख नेता चुनावों में जुटे हुए हैं. ऐसे चलते चुनाव के बीच कार्यकर्ताओं को प्रदेश से दिल्ली ले जाना मुश्किल काम है. अगर नेता व कार्यकर्ता दिल्ली की रैली में व्यस्त हो जाएंगे, तो इसके पीछे से भाजपा पूरा फायदा उठाएगी. अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्लान बनाया है कि जिन जगहों पर पहले चरण का मतदान हो चुका है, वहां के कार्यकर्ता व नेता दिल्ली की रैली में भाग लें. इसके अलावा चौथे चरण में जहां मतदान होंगे, वहां से भी लोग रैली में जा सकते हैं. चुनाव के चलते ही हाल ही कांग्रेस का जयपुर में तीन दिन चला प्रदर्शन फीका रहा था. जब नेता व कार्यकर्ता चुनाव छोड़क जयपुर ही नहीं आ सके, तो फिर वे दिल्ली कैसे जा पाएंगे. इसके बावजूद नेताओं को भीड़ दिल्ली ले जाने के टारगेट दिए जा रहे हैं.
उधर भाजपा ने इस रैली की तारीख को लेकर नया मुद्दा खड़ा कर दिया हैं. बीजेपी नेताओं का मानना है कि 1 नवंबर 1984 को सिख दंगों के दौरान हजारों सिखों की हत्या की गई थी अब फिर से इस दिन रैली करके एक बार दिए कांग्रेस सिखों के जख्मों को कुरेदने का काम कर रही है. उस समय भी देश में अराजकता का माहौल कांग्रेस नेताओं ने बनाया था आज भी अराजकता का माहौल देश में बनाने की कोशिश है. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक अगर कांग्रेस अपनी प्रस्तावित रैली की तारीख को कोई बदलवा नहीं लाती है तो बीजेपी बड़े स्तर पर उसके विरोध में कार्यक्रमों की योजना बना रही है. ये कार्यक्रम सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेंगे इनका प्रभाव पंजाब के विधानसभा चुनाव और वहां की राजनीति पर भी देखने को मिलेगा.