पंचायत चुनाव में पहले दौर की वोटिंग, अब कांग्रेस की रणनीति की होगी परीक्षा, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः राजस्थान में गांवों की सरकार के चुनावी रण में पहले दौर का मतदान पूरा हो गया है. 16 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए वोट डाले गए. शाम 6 बजे तक प्रदेश में करीब 63 फीसदी मतदान दर्ज होने की रिपोर्ट है. पहले चरण में 16 जिला परिषदों के 293 और 104 पंचायत समितियों के 1,788 वार्डों के लिए चुनाव हुआ. कुल 6,926 प्रत्याशी मैदान में थे. कांग्रेस ने चुनाव में जीत का दावा किया है, लेकिन पहले चरण में जयपुर कमिश्नरेट पर प्रदर्शन के चलते पार्टी के नेता प्रचार नहीं कर सके. अब कांग्रेस आगामी चरणों के लिए नई रणनीति बनाने में जुटी है. 

राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण में ग्रामीण मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. 16 जिलों में मतदान के दौरान कई जगहों पर मतदाताओं की कतारें नजर आईं.  शाम 6 बजे तक करीब 63 फीसदी मतदान हुआ, जबकि अंतिम आंकड़ों में बदलाव संभव है. इस चरण में जिला परिषद के 293 वार्डों के लिए 1,693 और पंचायत समिति के 1,788 वार्डों के लिए 5,233 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे. यानी कुल 2,081 वार्डों के लिए 6,926 प्रत्याशियों की सियासी किस्मत ईवीएम में बंद हो गई. अब सभी की नजरें चुनावी नतीजों पर हैं.

पहले दौर के मतदान के बाद कांग्रेस ने जीत का दावा किया है. हालांकि, चुनावी दावों की असली परीक्षा नतीजों में होगी. इस बीच जयपुर कमिश्नरेट में कांग्रेस के प्रदर्शन के कारण पार्टी के नेता पहले चरण में प्रचार नहीं कर सके. अब राजनीतिक चर्चा इस बात पर भी है कि प्रचार के लिए समय नहीं मिल पाना पार्टी के चुनावी अभियान को किस हद तक प्रभावित कर सकता है.

पहले दौर का मतदान पूरा होते ही कांग्रेस ने आगामी मतदान चरणों की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया है. पार्टी में बैठकों का दौर जारी है और चुनावी रणनीति पर मंथन हो रहा है. अब प्रचार अभियान को गति देने, नेताओं की जिम्मेदारियां तय करने और स्थानीय संगठन के साथ समन्वय मजबूत करने पर जोर रह सकता है. कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि राजनीतिक प्रदर्शन और संगठनात्मक गतिविधियों के बीच तालमेल बनाते हुए आगामी चरणों में प्रचार को प्रभावी बनाया जाए. आज पीसीसी चीफ गोविन्द डोटासरा ने अपने आवास पर कई नेताओं से मुलाक़ात की और चुनावी रणनीति पर विचार विमर्श किया. वॉर रूम में भी बैठकों का दौर चलता रहा     

पंचायत चुनाव केवल गांवों के प्रतिनिधियों को चुनने का मुकाबला नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के जमीनी संगठन की परीक्षा भी हैं. कांग्रेस ने पहले दौर में जीत का दावा किया है, लेकिन आगे की राह में उसे अपने प्रचार अभियान को व्यवस्थित करना होगा. बैठकों से निकलने वाली रणनीति और कार्यकर्ताओं की सक्रियता आगामी चरणों में पार्टी की तैयारियों का अहम हिस्सा होगी. जयपुर के प्रदर्शन के बीच प्रचार से दूर रहे नेताओं की भूमिका और नई रणनीति पर मंथन के बीच सवाल यही है—आगामी दौर में कांग्रेस अपने चुनावी अभियान को किस तरह आगे बढ़ाएगी?